चंद्रयान-3 के चांद पर उतरने में कुछ ही समय बचा है. आज शाम 6 बजकर 4 मिनट का टाइम, वो समय होगा, जब चांद की सतह पर चंद्रयान 3 के लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग होगी. हर किसी की धड़कनें बढ़ी हुई हैं, क्योंकि चंद्रयान 2 की क्रैश लैंडिंग हुई थी, लेकिन इस दफा तैयारी तगड़ी है. इसरो के वैज्ञानिकों का दावा है कि चंद्रयान-3 की लैंडिंग तो होकर ही रहेगी.
इसके लिए आज की तारीख भी सोच-समझकर चुनी गई है. आखिर चंद्रयान-3 के चांद पर उतरने से क्या फायदा होने वाला है? और अगर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग होती है तो कैसे भारत विश्व चैंपियन बन जाएगा? अब से चंद्रयान-3 की चांद पर लैंडिंग में सिर्फ कुछ घंटे बचे हैं. यानी कामयाबी का सबसे बड़ा काउंट डाउन शुरू हो चुका है.
आज शाम चंद्रयान-3 की लैडिंग होगी, इसरो की तैयारी पूरी है. अंतरिक्ष की दुनिया में नया इतिहास रचने का इंतजार है. बहुत लोगों के मन में सवाल हैं कि चंद्रयान-3 की लैंडिंग के बाद क्या होगा? चांद पर भारतीय वैज्ञानिकों की कामयाबी में देश और दुनिया के लिए क्या संदेश छिपा है? चंद्रमा का सबसे बड़ा रहस्य खुलने वाला है? क्या नासा से पहले चांद पर भारत जिंदगी खोजेगा? जो कोई नहीं कर सका, वो चंद्रयान-3 करेगा! क्या चांद पर इंसानी घर का सपना पूरा होगा?
नासा से लेकर यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने चांद को लेकर किया है ये दावा
हर इंसान के दिमाग में चांद को समझने की जिज्ञाषा है, लेकिन आज तक चांद को लेकर तमाम सवाल जस के तस हैं. दुनियाभर के अंतरिक्ष वैज्ञानिक चांद को पढ़ने की कोशिश में जुटे हैं. यहां तक नासा से लेकर यूरोपियन स्पेस एजेंसी चांद पर इंसानी बस्ती का दावा कर चुकी है.
मिशन चंद्रयान-3 से जुड़ी स्पेशल कवरेज देखने के लिए यहां क्लिक करें
दुनिया का सबसे शक्तिशाली मुल्क अमेरिका चांद तक पहुंच गया, लेकिन चांद का रहस्य सुलझाने में नाकाम रहा. रूस चांद तक तो पहुंच गया, लेकिन चंद्रमा पर जीवन की संभावना है या नहीं, इस सवाल का जवाब नहीं तलाश सका. चांद पर चीन का अंतरिक्ष यान भी लैंड हुआ, लेकिन चांद की पहेली सुलझ नहीं सकी.

भारत के मून मिशन पर टिकी हैं पूरी दुनिया की नजरें
पिछली बार भले ही भारत का चंद्रयान लैंडिंग के वक्त फेल हो गया, लेकिन भारत के मिशन से दुनिया को पहली बार पता चला कि चांद पर पानी मौजूद है. इससे पहले चांद पर पानी की संभावनाओं को नासा सिरे से नकार चुका था. अब पूरी दुनिया की नजरें भारत के चंद्रयान-3 पर हैं. आज शाम चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग का मतलब है- चांद को लेकर इंसानी दिमाग में चल रहे एक-एक सवाल का जवाब मिलने की उम्मीद.
How to Watch Chandrayaan-3 Landing Live Streaming
Chandrayaan-3 की लैंडिंग का लाइव प्रसारण आज शाम 5 बजकर 27 मिनट से शुरू हो होगा. इसे ISRO की वेबसाइट... isro.gov.in के साथ ही YouTube पर... youtube.com/watch?v=DLA_64yz8Ss, Facebook पर... Facebook https://facebook.com/ISRO या फिर डीडी नेशनल टीवी चैनल पर देख सकते हैं.
चांद को लेकर बीते साल नासा के एक बड़े वैज्ञानिक की भविष्यवाणी आई थी. नासा के अंतरिक्ष प्रोग्राम के चीफ हावर्ड हू ने दावा किया था कि 2030 से पहले चांद पर इंसान लंबे वक्त तक रह सकता है. तो क्या धरती से 3 लाख 84 हजार किलोमीटर दूर चंद्रमा पर जिंदगी संभव है? वैज्ञानिक क्या मानते हैं?
चांद को लेकर नासा ने की थी ये भविष्यवाणी
हावर्ड हू ने कहा था कि साल 2030 से पहले चांद पर इंसान एक्टिव हो सकते हैं, जिसमें उनके रहने के लिए बस्ती होंगी और उनके काम में मदद करने के लिए रोवर्स होंगे. इस दशक में हम कुछ लंबे कालखंडों के लिए चांद पर रह सकते हैं. वहां इंसानों के रहने लायक जगह होगी. उनके पास जमीन पर रोवर्स होंगे. हम चांद की जमीन पर इंसानों को भेजेंगे और वो वहां रहकर वैज्ञानिक काम करेंगे. वैज्ञानिक जल्द ही वहां के वातावरण में ढल जाएंगे.

चंद्रयान-2 के बाद इसरो ने की है तगड़ी तैयारी
नासा ने चांद पर इंसानी बस्ती बसने का दावा किया, लेकिन ये कैसे होगा, सवाल बड़ा है. इस सवाल का जवाब भारत का चंद्रयान-3 खोजेगा. वैज्ञानिकों की मानें तो पूरी दुनिया की नजरें भारत के मिशन चांद पर टिकी हुई हैं, क्योंकि चांद के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला भारत पहला देश होगा.
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चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के लिए रत्तीभर भी गलती की गुंजाइश नहीं छोड़ी है और तैयारियां इसलिए भी तगड़ी की गई हैं, क्योंकि पहले चंद्रयान-2 क्रैश हो चुका है. इसरो के वैज्ञानिकों को पूरी उम्मीद है कि चंद्रयान-3 में बदलावों के बाद चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग का सपना साकार होगा.
चंद्रयान-3 लाइव ट्रैकर
इसरो चंद्रयान 3 की स्पीड और उसकी दिशा पर नजर रख रहा है. इसके लिए लाइव ट्रैकर के जरिए देखा जा सकता है कि अंतरिक्ष में इस समय चंद्रयान 3 कहां पर है.
ISRO के पूर्व डायरेक्टर प्रमोद काले ने कहा कि सबकुछ प्लान के मुताबिक चलते हुए, चंद्रयान-3 लैंडिंग पेज तक पहुंच चुका है. लैंडर विक्रम को चांद पर उतरने का काउंट डाउन भी शुरू हो चुका है.
आज 23 अगस्त की तारीख लैंडिंग के लिए बहुत ही सोच समझकर तय की गई है.
इसरो के मुताबिक, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर तापमान माइनस 230 डिग्री तक चला जाता है. इतनी कड़ाके की ठंड में दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान का काम कर पाना संभव नहीं है. यही वजह है कि 14 दिन तक जब दक्षिणी ध्रुव पर रोशनी रहेगी, तभी तक इस मिशन को अंजाम दिया जाएगा.