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सुप्रीम कोर्ट का फर्जी आदेश दिखाकर कैदी की रिहाई, कर्नाटक जेल DIG हिरासत में

कर्नाटक जेल विभाग के DIG सोमशेखर को हिरासत में लिया गया है. जांच में जेल अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही सामने आई है. पुलिस ने दो आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा है और जेल विभाग के DIG को पुलिस हिरासत में भेजकर पूछताछ की जा रही है.

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कर्नाटक जेल विभाग के DIG सोमशेखर को हिरासत में लिया गया (Photo: ITG)
कर्नाटक जेल विभाग के DIG सोमशेखर को हिरासत में लिया गया (Photo: ITG)

कर्नाटक जेल विभाग के DIG सोमशेखर को हिरासत में लिया गया है. सुप्रीम कोर्ट के नकली आदेश का इस्तेमाल कर एक कैदी को कथित तौर पर रिहा करने के मामले में यह कार्रवाई की गई है. 

सोमशेखर पहले परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में तैनात थे. उनके पूछताछ की गई है. यह मामला कैदी शंकर अरमुगम से जुड़ा है. वह एक अपहरण के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था. लेकिन 13 नवंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट का नकली रिहाई आदेश जमा करने और 10 हजार का जुर्माना भरने के बाद उन्हें जेल से रिहाई मिल गई थी. इसी मामले में सोमशेखर को हिरासत में लिया गया है.

कैदी की रिहाई में जेल अधिकारियों की कथित लापरवाही और मिलीभगत की भी जांच की जा रही है. 20 मई को बेंगलुरु सेंट्रल जेल अधीक्षक ने परप्पना अग्रहरा थाने में इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी. उनकी शिकायत पर परप्पना अग्रहारा थाने में मामला दर्ज किया गया. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि कैदी शंकर अरमुगम पर चिकपेट थाने में दर्ज एक मामले में मुकदमा चलाया गया था और उसे 12 जुलाई 2004 को उम्रकैद को 10 हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई थी. 

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इस मामले में शंकर अरमुगम ने सजा रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी अपील डाली थी लेकिन अदालतों ने निचली अदालत के आदेश को ही बरकरार रखा. जांच में सामने आया कि उस समय SDA के तौर पर काम कर रहे श्रीकांत एस. ने कैदी शंकर की अपील के मामले में सुप्रीम कोर्ट का एक नकली आदेश तैयार किया था. इसी के आधार पर उन्हें 13 नवंबर 2018 को रिहाई मिल गई थी. 

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जांच के दौरान कैदी की पत्नी से भी पूछताछ की गई. उन्होंने बताया कि उस समय के चीफ सुपरिटेंडेंट ने भी उसके पति की सेंट्रल जेल से रिहाई कराने में मदद की थी. इस मामले में दो आरोपियों को कोर्ट के सामने पेश किया गया है,  कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा है. 

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि जेल विभाग के DIG और जेल-सुधार सेवा विभाग के तत्कालीन चीफ सुपरिटेंडेंट ने मामले की जांच में सहयोग नहीं किया और मामले से जुड़ी जरूरी जानकारी छिपाई. ऐसे में रविवार को उन्हें हिरासत में लिया गया और आगे की पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में रखा गया है. 

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