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'Good Night, Take Care of Children' कहकर सोए थे सुरेश, सुबह से पहले उजड़ गया परिवार, अमेरिकी हमले में मारे गए मरीन इंजीनियर का आखिरी संदेश

विशाखापट्टनम के 44 वर्षीय मरीन इंजीनियर सुरेश की ओमान तट के पास अमेरिकी सैन्य हमले में मौत हो गई. उनका आखिरी संदेश पत्नी भार्गवी को Good night. Take care of children था. परिवार 15वीं शादी की सालगिरह पर उनके लौटने का इंतजार कर रहा था. इस घटना ने पत्नी और दो बच्चों को गहरे सदमे में डाल दिया है.

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भारत के इंजीनियर सुरेश की ओमान तट के पास अमेरिकी सैन्य हमले में मौत हुई. (Photo: ITG)
भारत के इंजीनियर सुरेश की ओमान तट के पास अमेरिकी सैन्य हमले में मौत हुई. (Photo: ITG)

विशाखापट्टनम के रहने वाले 44 वर्षीय मरीन इंजीनियर सुरेश की मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है. ओमान तट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले में सुरेश समेत तीन भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत हो गई. इस घटना के बाद उनके घर में मातम पसरा हुआ है और पत्नी भार्गवी तथा दो बेटों का रो-रोकर बुरा हाल है. परिवार के लिए यह खबर किसी सदमे से कम नहीं है, क्योंकि सुरेश कुछ दिन पहले तक रोजाना पत्नी और बच्चों को संदेश भेजते थे. उनकी पत्नी भार्गवी ने बताया कि हर सुबह उनका एक Good morning मैसेज जरूर आता था. लेकिन हमले के दिन सुबह उन्होंने कोई संदेश नहीं भेजा, जिससे परिवार को चिंता होने लगी थी.

सुरेश का आखिरी संदेश रात में पत्नी को भेजा गया था, जिसमें उन्होंने लिखा था Good night. Take care of the children. यह संदेश अब परिवार के लिए उनकी आखिरी याद बन गया है. इस संदेश के बाद उनका फोन बंद हो गया और संपर्क पूरी तरह टूट गया. भार्गवी ने बताया कि परिवार 24 जून को अपनी 15वीं शादी की सालगिरह मनाने की तैयारी कर रहा था. सभी लोग सुरेश के घर लौटने का इंतजार कर रहे थे. लेकिन अचानक आई इस खबर ने पूरे परिवार की खुशियों को खत्म कर दिया.

परिवार के अनुसार सुरेश लगभग पांच महीने से जहाज पर कार्यरत थे. वो समुद्री इंजीनियरिंग क्षेत्र में करीब 20 साल से काम कर रहे थे और पिछले 12 वर्षों से एक ही कंपनी में सेवाएं दे रहे थे. घटना के समय वे जहाज पर चीफ इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे. जानकारी के अनुसार सुरेश मूल रूप से एक छोटे असाइनमेंट के लिए जहाज पर गए थे, जो सिर्फ 10 दिनों का था. लेकिन बाद में परिस्थितियों के कारण उनका कार्यकाल बढ़ता चला गया. जहाज पर मौजूद दूसरे चीफ इंजीनियर को रिलीव कर दिया गया और सुरेश को उनकी अनुभवी क्षमता के कारण बनाए रखा गया.

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जनरेटर की जांच के लिए गए थे सुरेश

परिवार ने बताया कि उस दौरान जहाज पर चीनी नववर्ष के समय करीब 20 दिन तक काम रुका रहा और बाद में ऑपरेशन शुरू हुए. इसके बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण जहाज को वहां अधिक समय तक रुकना पड़ा. भार्गवी ने बताया कि जहाज लगभग एक सप्ताह से उसी स्थान पर खड़ा था और उस पर करीब 28,000 टन कार्गो लोड हो चुका था. सुरेश जहाज पर जनरेटर की जांच के लिए गए थे, तभी हमला हुआ. परिवार को बताया गया कि उन्हें सीधे हमला लगा और उन्हें बचने का कोई मौका नहीं मिला.

इस घटना में सुरेश के साथ दो अन्य भारतीय क्रू मेंबर्स की भी मौत हुई है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस हमले की पुष्टि की है और कहा है कि यह जहाज ईरान से तेल परिवहन के प्रयास में प्रतिबंध का उल्लंघन कर रहा था. परिवार अब सबसे बड़ी चिंता सुरेश के पार्थिव शरीर को भारत लाने को लेकर कर रहा है. उन्होंने सरकार से मदद की अपील की है और कहा है कि उन्हें जल्द से जल्द आधिकारिक जानकारी दी जाए और शव को भारत लाया जाए.

पत्नी और दो बेटों पर टूटा दुखों का पहाड़

भार्गवी ने बताया कि क्षेत्र में संचार पर प्रतिबंध और जामर लगे होने के कारण वीडियो या ऑडियो कॉल संभव नहीं थे. इसलिए परिवार केवल टेक्स्ट मैसेज के जरिए ही संपर्क में रहता था. आंध्र प्रदेश भवन के आयुक्त अर्जा श्रीकांत ने इस मामले में संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया है और हर संभव मदद का आश्वासन दिया है. उन्होंने भारत के ओमान में राजदूत को भी पत्र लिखकर तत्काल सहायता और आवश्यक दस्तावेज प्रक्रिया तेज करने का अनुरोध किया है. सुरेश का परिवार अब केवल उनके लौटने का इंतजार कर रहा था, लेकिन यह इंतजार हमेशा के लिए अधूरा रह गया. पत्नी और बच्चों के लिए यह नुकसान असहनीय है और पूरा परिवार गहरे शोक में डूबा हुआ है. 
 

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