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पैंगोंग झील में तैनाती के लिए बोट की डिलिवरी शुरू, लद्दाख में भारत की स्थिति होगी मजबूत

भारतीय सेना को 29 बोट मिलने वाले हैं. अगले कुछ महीनों में इन सबकी डिलिवरी हो जाएगी. इन बोट के ऑर्डर जनवरी महीने में दिए गए थे. इनमें से 12 बोटों का प्रयोग सर्विलांस और पेट्रोलिंग में किया जाएगा. जबकि 17 बोट का प्रयोग, सैनिकों को लाने ले जाने में होगा.

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लद्दाख में भारत की स्थिति होगी मजबूत (सांकेतिक फोटो)
लद्दाख में भारत की स्थिति होगी मजबूत (सांकेतिक फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भारतीय सेना को मिलेगी 29 बोट
  • सैनिकों को लाने ले जाने में होगी सुविधा
  • क्विक रिएक्शन टीम के लिए होगा इस्तेमाल

भारतीय सेना को पैंगोंग त्सो झील के लिए बोट की डिलिवरी मिलनी शुरू हो गई है. सूत्रों के मुताबिक इस बोट से ट्रूप्स झील पार कर सकेंगे, इसके अलावा निगरानी करेंगे. उन्होंने बताया कि आर्मी को दो तरह के बोट की जरूरत है. एक पेट्रोलिंग और सर्विलांस के लिए और दूसरा ट्रूप्स की जल्दी से तैनाती के लिए. जिससे सैनिकों को लाने, ले जाने में लगने वाला समय कम हो. 

भारतीय सेना को 29 बोट मिलने वाले हैं. अगले कुछ महीनों में इन सबकी डिलिवरी हो जाएगी. इन बोट के ऑर्डर जनवरी महीने में दिए गए थे. इनमें से 12 बोटों का प्रयोग सर्विलांस और पेट्रोलिंग में किया जाएगा. जबकि 17 बोट का प्रयोग, सैनिकों को लाने ले जाने में होगा. जिससे कि कम से कम समय में उनकी तैनाती की जा सके. इनका प्रयोग क्विक रिएक्शन टीम के तौर पर भी की जाएगी. 

इन बोटों के जरिए 20 ट्रूप्स को हथियार आदि के साथ क्विक मोबाइलाइजेशन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. एक अधिकारी ने कहा कि बोट्स के दोनों ऑर्डर लगभग एक समय में ही दिए गए हैं. साल की शुरुआत में ऑर्डर दिए गए थे और अब डिलिवरी शुरू हो गई है. इन बोटों का इस्तेमाल नदी वाले इलाकों में सैनिकों की तैनाती के लिए की जा सकती हैं. 

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सूत्रों ने बताया कि काफी समय से पेट्रोलिंग बोट को अपग्रेड करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी. इसके अलावा बोट में एंटी-रैमिंग क्षमता की भी मांग थी. इसके अलावा लद्दाख में भारत और चीन के बीच जारी तनाव के दौरान नए बोट की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जिससे कि सैनिकों को तुरंत भेजा जा सके. 

और पढ़ें- LAC विवाद: आर्मी के टॉप कमांडरों की अगले सप्ताह बैठक, सीमा पर चीन की स्थिति को लेकर होगी चर्चा

पूर्वी लद्दाख में पिछले साल 5 मई से दोनों देशों के बीच तनाव शुरू हुआ था. उस वक्त 45 साल बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प भी हुई थी. पैंगॉन्ग लेक इलाके से सैनिकों के वापसी शुरू हो गई है, लेकिन अभी भी कई इलाकों को लेकर बातचीत जारी है.

आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे ने कुछ दिनों पहले ही चीन को साफ संदेश देते हुए कहा कि जब तक लद्दाख में तनाव वाली जगहों से चीनी सैनिकों की वापसी नहीं हो जाती, तब तक भारत भी अपने सैनिक पीछे नहीं हटाएगा. न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है.  

जनरल नरवणे ने जोर देते हुए कहा कि ऊंचे इलाकों पर भारतीय सेना की पकड़ मजबूत है और हम किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा, "हम बहुत स्पष्ट हैं कि जब तक सभी फ्रिक्शन पॉइंट्स से डिसइंगेजमेंट नहीं होता है, तब तक भारतीय सेना भी पीछे नहीं हटेगी. भारत और चीन के बीच कई समझौते हुए हैं जिन्हें चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) एकतरफा तोड़ रही है." 

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उन्होंने बताया कि उत्तरी सीमा पर स्थिति काबू में है और चीन के साथ मिलिट्री लेवल की कई दौर की बातचीत होनी है, जिसमें अप्रैल 2020 की स्थिति बहाल करने पर ध्यान दिया जाएगा.

 

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