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500 साल पहले मुसलमान बुरे थे, आज के मुसलमान भुगतेंगे, इस सोच से मुझे परेशानी: शशि थरूर

India Today Conclave 2021: सांसद शशि थरूर ने कहा कि भारत सेक्युलर है लेकिन अब की सरकार मानती है कि भारत हिंदुवादी देश है. बाकि सब बाहर से आए मेहमान हैं या फिर घुसपैठिये हैं.

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India Today Conclave 2021: सांसद शशि थरूर India Today Conclave 2021: सांसद शशि थरूर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2021 में बोले शशि थरूर
  • मोदी सरकर पर शशि थरूर ने साथा निशाना

भारत की विरासत, इतिहास और अभिमान पर बात करते हुए कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इस बात पर चिंता जताई कि 500 साल पहले अगर मुसलमान शासकों ने कुछ गलत किया था तो उसकी सजा लोग आज के मुसलमानों को देना चाहते हैं. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2021 (India Today Conclave 2021) में बात करते हुए शशि थरूर ने यह भी आरोप लगाया कि पुराने भर चुके जख्मों को फिर से कुरेदने का काम किया जा रहा है.

Bulls in our Memory Shop: Debating heritage, history, hubris (विरासत, इतिहास, अभिमान) पर बात करते हुए सांसद शशि थरूर ने यह बात कही. हालांकि, कई बातों पर उनके साथ बहस में शामिल इतिहासकार विक्रम संपत ने आपत्ति भी जताई.

जिनको धर्म ही पहचान लगती थी उन्होंने अलग देश बनाया - थरूर

India Today Conclave 2021 में शशि थरूर ने कहा कि 1947 में किसी विचारधारा को लेकर बंटवारा नहीं हुआ था. जिन लोगों को लगता था कि धर्म ही उनकी पहचान है उन्होंने अलग जाकर पाकिस्तान बना लिया था. लेकिन तब कई लोगों ने जिनमें महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, मौलाना आजाद, सरदार पटेल, राजेंद्र प्रसाद शामिल थे उन्होंने कहा कि नहीं, स्वतंत्रता के आंदोलन में सब शामिल थे और भारत सबके लिए होगा.

फिर अंबेडकर ने जब संविधान बनाया उसमें भी भारत को सेक्युलर बनाया गया. इसमें रंगभेद, धर्म, बोले जानी वाली भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं किया गया. करीब 6 दशक तक ऐसा रहा. लेकिन अब की सरकार मानती है कि भारत हिंदुवादी देश है. बाकि सब बाहर से आए मेहमान हैं या फिर घुसपैठिये हैं. शशि थरूर ने कहा कि भारत को जिस रूप में वह देखते हैं वह संविधान से आया है लेकिन इनका (मौजूदा सरकार) का जो नजरिया है वह कहां से आया है? 

शशि थरूर ने आगे कहा कि मुसलमान 500 साल पहले बुरे थे, इसलिए आज के मुसलमानों को भुगतना होगा...इस तरह की सोच से मुझे परेशानी है. शशि थरूर ने आगे कहा कि हिंदू संगठन बख्तियारपुर की तरह औरंगजेब रोड का नाम भी बदलना चाहते हैं, वह समझ आता है. लेकिन अकबर? मतलब उस वक्त में उस जैसे आदर्श राजा का उदाहरण नहीं मिल सकता.

 

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