रक्षा क्षेत्र में भारत की 'आत्मनिर्भरता' को अब तक की सबसे बड़ी मजबूती मिलने वाली है. इजरायल के मुंबई स्थित महावाणिज्य दूत (Consul General) यानिव रेवाच ने संकेत दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान दोनों देश अपने रक्षा समझौतों का विस्तार करेंगे.
इस डील का सबसे अहम हिस्सा इजरायल की मशहूर 'आयरन डोम' मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तकनीक का हस्तांतरण (Technology Transfer) हो सकता है.
इजरायली राजदूत यानिव रेवाच के अनुसार, यह केवल हथियारों की खरीद-बिक्री का सौदा नहीं होगा, बल्कि 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत भारत में ही इन प्रणालियों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.
उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य इस समझौते को उन विशिष्ट विषयों तक ले जाना है जिसमें भारत में विनिर्माण (Manufacturing) और आयरन डोम जैसी तकनीकों को साझा करना शामिल है." यानिव रेवाच ने जोर देकर कहा कि भारत और इजरायल दोनों ही समान सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. यानिव ने कहा इजरायल अपनी सुरक्षा प्रणालियों की तकनीक भारत के साथ साझा करने को तैयार है क्योंकि वह भारत को एक मजबूत और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार मानता है.
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यानिव ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस विशेष यात्रा के दौरान, हम इस समझौते का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं ताकि कुछ विशेष क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके, जैसे कि भारत में निर्माण, रक्षा सहयोग और आयरन डोम तथा इजरायल की अन्य रक्षा प्रणालियों के संबंध में सहयोग, जिनकी तकनीक हम भारत में अपने साझेदारों के साथ साझा कर सकते हैं.'
क्या है आयरन डोम
इजरायल की 'आयरन डोम' (Iron Dome) प्रणाली मौजूदा दौर में सबसे उन्नत और विश्वसनीय मिसाइल रक्षा प्रणालियों में से एक मानी जाती है. आयरन डोम सिस्टम अपनी 90% से अधिक की सफलता दर के लिए जाना जाता है, जो दुश्मन की छोटी दूरी की मिसाइलों और रॉकेटों को हवा में ही तबाह कर देता है.
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यह विशेष रूप से कम और मध्यम दूरी की मिसाइलों, रॉकेटों और ड्रोन हमलों को हवा में ही नष्ट करने के लिए डिजाइन की गई है. हालिया संघर्ष के दौरान, इस प्रणाली ने अपनी अचूक क्षमता का प्रदर्शन किया. ईरान की ओर से दागी गईं लगभग 450 मिसाइलों और 1000 ड्रोनों में से आयरन डोम ने 90% से अधिक को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट (रोकना) किया था. यह आंकड़ा वैश्विक स्तर पर किसी भी मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.