भारत ने बीजिंग और इस्लामाबाद द्वारा आयोजित यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की एक अनौपचारिक मीटिंग में जम्मू-कश्मीर पर 'बेवजह' टिप्पणी करने के लिए पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है. भारत ने कहा कि यह केंद्र शासित प्रदेश का मामला 'पूरी तरह से देश का आंतरिक' मामला है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पर्वथानेनी हरीश ने मंगलवार को सिक्योरिटी काउंसिल की 'Bridging the Implementation Gap: Security Council Resolutions and the Maintenance of International Peace and Security' मुद्दे पर 'Arria-फॉर्मूला' मीटिंग में ये बातें कहीं.
राजदूत पर्वथानेनी हरीश ने कहा, "मैं पाकिस्तान के प्रतिनिधि द्वारा दिए गए बेवजह के बयानों का भी जिक्र करना चाहता हूं. यह हैरानी की बात है कि एक सह-अध्यक्ष ने इस मंच का राजनीतिकरण करने का रास्ता चुना है, जिससे अपने आचरण में संतुलित और निष्पक्ष रहने की उम्मीद की जाती है." उन्होंने कहा, "वक्त की कमी को देखते हुए मैं बस इतना ही जोर देकर कहना चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर केंद्र-शासित प्रदेश का मामला पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है. यह हमेशा से ऐसा ही रहा है, अभी भी है और आगे भी ऐसा ही रहेगा."
भारतीय राजदूत हरीश का बयान तब आया, जब संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत आसिम इफ़्तिखार अहमद ने मीटिंग के दौरान जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया. यह बैठक संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान और चीन के स्थायी मिशनों द्वारा आयोजित की गई थी.
मीटिंग में पाकिस्तान की क्या भूमिका?
पाकिस्तान अभी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के गैर-स्थायी सदस्य के तौर पर 2025 और 2026 के लिए चुने गए दो साल के कार्यकाल में अपनी भूमिका निभा रहा है. भारत का हमेशा से यही रुख रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र-शासित प्रदेश देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं और हमेशा रहेंगे.
कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं. नई दिल्ली ने किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को सख्ती से खारिज किया है और इस बात पर कायम है कि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है.
'एरिया-फॉर्मूला' बैठकें अनौपचारिक और गोपनीय होती हैं, जिनमें सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्य और बुलाए गए प्रतिभागी लचीले माहौल में अपनी बातें रख सकते हैं. इस फॉर्मेट का नाम वेनेजुएला के पूर्व राजदूत डिएगो एरिया के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने 1992 में इस प्रोसेस की शुरुआत की थी.
भारत ने याद दिलाए नियम...
चर्चा के मुख्य विषय पर विस्तार से बताते हुए भारतीय राजदूत हरीश ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और सुरक्षा बनाए रखने की जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की है और संयुक्त राष्ट्र चार्टर में चैप्टर VI और VII के तहत विवादों को सुलझाने के लिए अलग-अलग तरीके बताए गए हैं. उन्होंने बताया कि ये दोनों चैप्टर अलग-अलग हैं और इनके लागू होने का तरीका भी अलग-अलग है.
राजदूत पर्वथानेनी हरीश ने कहा कि चैप्टर VII के उपायों का मकसद शांति के लिए खतरा, शांति भंग और हमले की स्थिति में 'अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखना या फिर से ठीक करना' है. इन्हें लागू न करने से गंभीर नतीजे हो सकते हैं.
उन्होंने कहा कि चैप्टर VI 'पूरी तरह से अलग' है और उन स्थितियों से निपटने के लिए कई तरह के ऑप्शन देता है, जिनके बने रहने से अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को खतरा हो सकता है.
जिन प्रस्तावित तरीकों पर विचार किया जा सकता है, उनमें बातचीत, पूछताछ, मीडिएशन, सुलह और मध्यस्थता शामिल हैं, जिसमें संबंधित पार्टियों द्वारा पहले से ही द्विपक्षीय रूप से अपनाए गए किसी भी प्रोसेस को ध्यान में रखा जाएगा.
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भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि जब सदस्य देश UN80 पहल के तहत UN जनरल असेंबली के आदेशों की समीक्षा कर रहे हैं, जिससे कामकाज बेहतर हो सके, तो कोई वजह नहीं है कि सुरक्षा परिषद के आदेशों को ऐसी समीक्षाओं के दायरे से बाहर रखा जाए.
भारत लंबे वक्त से एक सुधारे गए और विस्तार किए गए सिक्योरिटी काउंसिल में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है. भारत का तर्क है कि 15 सदस्यों वाली इस संस्था का मौजूदा ढांचा पुराना हो चुका है और आज की वैश्विक हकीकत को ठीक से नहीं दिखाता है.
नई दिल्ली की उम्मीदवारी को कई देशों का समर्थन मिल रहा है, जिनमें यूरोप के कई देश और G4 समूह के अन्य सदस्य- ब्राजील, जर्मनी और जापान शामिल हैं. UNSC में पांच स्थायी सदस्य- चीन, फ्रांस, रूस, UK और US और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं, जिन्हें दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है. इसमें भारत भी शामिल है.