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NDA के 53% वोटर्स को रास नहीं आया E20 पेट्रोल! सी-वोटर सर्वे में सामने आए आंकड़े

केंद्र सरकार देशभर में 20% एथेनॉल मिक्स E20 पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है ताकि कच्चे तेल के आयात में कमी आए, प्रदूषण घटे और गन्ना किसानों को लाभ मिले. लेकिन सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं.

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E20 पेट्रोल को लेकर लोग सहज नहीं हैं
E20 पेट्रोल को लेकर लोग सहज नहीं हैं

केंद्र सरकार देशभर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिक्स E20 पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है. सरकार का कहना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी, प्रदूषण कम होगा और गन्ना किसानों को फायदा मिलेगा. हालांकि, C-Voter के हालिया सर्वे से सामने आया है कि बड़ी संख्या में लोग अभी भी E20 पेट्रोल को लेकर सहज नहीं हैं. सर्वे के मुताबिक, आधे से अधिक लोग न केवल E20 पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते, बल्कि उन्हें यह भी डर है कि इससे उनकी गाड़ी की माइलेज कम हो सकती है और इंजन को नुकसान पहुंच सकता है.

NDA समर्थकों में भी E20 को लेकर हिचक

सर्वे में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सत्ता पर काबिज NDA के समर्थकों में भी E20 पेट्रोल को लेकर उत्साह नहीं दिखा. सर्वे के अनुसार, 52.5 प्रतिशत NDA समर्थकों ने कहा कि वे अपनी गाड़ियों में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं करना चाहेंगे. केवल 18.1 प्रतिशत लोगों ने इसका समर्थन किया, जबकि 29.5 प्रतिशत लोग अभी भी इस मुद्दे पर फैसला नहीं कर पाए हैं. विपक्षी दलों के समर्थकों में E20 के प्रति विरोध और ज्यादा देखने को मिला. 

57.9 प्रतिशत विपक्षी समर्थकों ने कहा कि वे अपनी गाड़ियों में E20 पेट्रोल नहीं डलवाना चाहते. वहीं, अन्य राजनीतिक दलों के समर्थकों में भी 55 प्रतिशत लोगों ने इसे अस्वीकार किया. कुल मिलाकर 55.1 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे E20 पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते, जबकि केवल 17.1 प्रतिशत लोगों ने इसका समर्थन किया.

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गडकरी के बयान के बाद बढ़ी चर्चा

यह सर्वे ऐसे समय सामने आया है जब केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने E20 पेट्रोल के विरोधियों को चुनौती देते हुए कहा था कि वे ऐसा एक भी व्यक्ति सामने लाएं जिसकी गाड़ी को एथेनॉल मिक्स पेट्रोल से नुकसान हुआ हो. इसके जवाब में प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि उनके पास ऐसे छह लोग हैं, जिनकी गाड़ियों पर E20 का प्रतिकूल असर पड़ा है. उन्होंने कहा कि वे मीडिया के सामने आने से पहले गडकरी से मिलना चाहते हैं.

सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि E20 पूरी तरह सुरक्षित है और विशेषज्ञों की राय भी इसी के पक्ष में है. दूसरी ओर, कई वाहन मालिकों का कहना है कि E20 पेट्रोल से माइलेज कम हो जाती है और खासकर E10 या उससे पुराने मानकों के लिए बनी गाड़ियों में इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.

सरकार की नीति को भी सीमित समर्थन

सर्वे में केवल E20 पेट्रोल ही नहीं, बल्कि एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी पर भी लोगों की राय ली गई. इसमें 52 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की सरकारी पॉलिसी का समर्थन नहीं करते. इसके मुकाबले सिर्फ 22 प्रतिशत लोगों ने इस नीति का समर्थन किया, जबकि बाकी लोग असमंजस में रहे. NDA समर्थकों में भी 48.2 प्रतिशत लोगों ने इस नीति का विरोध किया. केवल 24.4 प्रतिशत लोगों ने इसका समर्थन किया, जबकि 27.4 प्रतिशत लोग निर्णय नहीं ले सके.

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माइलेज घटने और इंजन खराब होने की चिंता

सर्वे के अनुसार, लोगों की सबसे बड़ी चिंता वाहन की परफॉर्मेंस को लेकर है. 52.8 प्रतिशत लोगों का मानना है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों की माइलेज कम हो जाती है. NDA समर्थकों में 51.2 प्रतिशत और विपक्षी समर्थकों में 55.4 प्रतिशत लोगों ने भी यही चिंता जताई. इंजन को नुकसान पहुंचने को लेकर भी लोगों की आशंकाएं काफी मजबूत हैं. 54.2 प्रतिशत लोगों का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल अधिकांश वाहनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. NDA समर्थकों में यह आंकड़ा 49.9 प्रतिशत रहा, जबकि विपक्षी समर्थकों में 60.2 प्रतिशत लोगों ने ऐसा माना.

इसके अलावा 14.3 प्रतिशत लोगों का मानना है कि E20 केवल कुछ विशेष प्रकार के वाहनों को नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं, केवल 10.9 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इससे वाहनों को कोई नुकसान नहीं होता.

पुराने वाहनों के मालिकों की चिंता

सर्वे में यह भी सामने आया कि 56.3 प्रतिशत लोगों का मानना है कि E20 पेट्रोल को अनिवार्य बनाना पुराने वाहनों के मालिकों के साथ अन्याय होगा. NDA समर्थकों में 49.2 प्रतिशत और विपक्षी समर्थकों में 65.8 प्रतिशत लोगों ने इस राय से सहमति जताई.

लोग चाहते हैं विकल्प मिले

हालांकि E20 को लेकर विरोध काफी अधिक है, लेकिन सर्वे में एक बात पर लगभग सभी वर्गों में सहमति दिखाई दी. 75.9 प्रतिशत लोगों ने कहा कि बाजार में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल और सामान्य पेट्रोल दोनों उपलब्ध रहने चाहिए, ताकि उपभोक्ता अपनी जरूरत और वाहन के अनुसार विकल्प चुन सकें. NDA समर्थकों में भी 72.4 प्रतिशत लोगों ने इस मांग का समर्थन किया. इसी तरह 74.5 प्रतिशत लोगों का मानना है कि यदि E20 पेट्रोल बेचा जाता है तो इसकी कीमत सामान्य पेट्रोल से कम होनी चाहिए. NDA समर्थकों में 75.6 प्रतिशत लोगों ने भी यही राय दी.

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हालांकि कीमत कम होने पर भी लोगों का भरोसा पूरी तरह नहीं बनता दिखा. केवल 40.8 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अगर E20 सस्ता होगा तो वे इसका इस्तेमाल करेंगे, जबकि 40.4 प्रतिशत लोगों ने साफ कहा कि कम कीमत होने के बावजूद वे इसे नहीं अपनाएंगे.

सरकार के दावे पर बंटी राय

केंद्र सरकार का कहना है कि E20 नीति से भारत का कच्चे तेल का आयात कम होगा. इस दावे पर 37.2 प्रतिशत लोगों ने पूरी तरह सहमति जताई, जबकि 19.5 प्रतिशत लोगों ने आंशिक सहमति व्यक्त की. दूसरी ओर, 17.1 प्रतिशत लोगों ने इस दावे से पूरी तरह असहमति जताई और 14.1 प्रतिशत लोगों ने आंशिक असहमति व्यक्त की. जब लोगों से पूछा गया कि सरकार E20 पेट्रोल को बढ़ावा क्यों दे रही है, तो 27.5 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात को कम करना है. 21.3 प्रतिशत लोगों का मानना था कि सरकार गन्ना किसानों को लाभ पहुंचाना चाहती है, जबकि 11 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इसका प्रमुख उद्देश्य प्रदूषण कम करना है.

कैसे हुआ सर्वे?

यह सर्वे C-Voter ने 8 और 9 जुलाई के बीच Computer Assisted Telephone Interviewing (CATI) पद्धति से कराया. इसमें देशभर के 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के 1,641 लोगों से बातचीत की गई. C-Voter के अनुसार, सर्वे के आंकड़ों को जनगणना और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के आधार पर देश की जनसांख्यिकीय संरचना के अनुरूप वेटेज दिया गया. सर्वे का मार्जिन ऑफ एरर मैक्रो स्तर पर ±3 प्रतिशत और माइक्रो स्तर पर ±5 प्रतिशत बताया गया है.
 

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