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कार छुपा रहे, गलत नंबर दे रहे, कहीं अविश्वास तो कहीं नो एंट्री... 10 शहरों से जनगणना की ग्राउंड रिपोर्ट, कर्मचारियों की बढ़ी चुनौती

देशभर में भीषण गर्मी के बीच जनगणना का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन जमीन पर कर्मचारियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. दिल्ली, गुरुग्राम, पंजाब, गोरखपुर और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में लोग आय और संपत्ति की जानकारी देने से बच रहे हैं. वहीं शिक्षक और आशा वर्कर्स 45 डिग्री तक की गर्मी में डोर-टू-डोर सर्वे कर रहे हैं और डिहाइड्रेशन, लंबी दूरी और जागरूकता की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं.

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अंगारे बरसते आसमान के नीचे सस्पेंशन के खौफ और लू के थपेड़ों में पिस रहे शिक्षक (Photo: AI Generated)
अंगारे बरसते आसमान के नीचे सस्पेंशन के खौफ और लू के थपेड़ों में पिस रहे शिक्षक (Photo: AI Generated)

देशभर में भीषण गर्मी के बीच जनगणना का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन जमीन पर तस्वीर आसान नहीं दिख रही. कहीं लोग निजी जानकारी साझा करने से हिचकिचा रहे हैं, तो कहीं शिक्षकों और कर्मचारियों को घरों के बाहर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. दिल्ली से लेकर गुरुग्राम, गोरखपुर, चंदौली, पंजाब, महाराष्ट्र और भोपाल तक जनगणना में लगे कर्मचारियों ने गर्मी, जागरूकता की कमी और लोगों के संकोच को सबसे बड़ी चुनौती बताया है.

दिल्ली: जागरूकता की कमी और लोगों की झिझक
 

देश की राजधानी दिल्ली में जनगणना को लेकर कई तरह के मतभेद हैं. आम लोगों में जागरूकता की भी काफी कमी है. इसी कारण राजधानी दिल्ली में जनगणना कराना बेहद मुश्किल हो रहा है. दिल्ली का पारा जब 40-45 डिग्री पार कर रहा है, उस परिस्थिति में भी सरकारी शिक्षक जनगणना करने के लिए राजधानी के घरों में डोर-टू-डोर जा रहे हैं. लेकिन उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

जनगणना में हो रही दिक्कतों का रियलिटी चेक करने के लिए हम दक्षिणी दिल्ली के वसंतकुंज इलाके में पहुंचे. जनगणना करने वाले शिक्षकों ने ऑन रिकॉर्ड कुछ भी कहने से मना कर दिया. लेकिन कुछ शिक्षकों ने ऑफ रिकॉर्ड हमें जो बातें बताईं, वे इस प्रकार हैं.

दिल्ली में जनगणना को लेकर लोगों में जागरूकता की बहुत कमी है. जनगणना में पूछे जाने वाले सवालों से बचने के लिए लोग घर के अंदर तक नहीं घुसने दे रहे हैं. बहुत समझाने के बाद अगर घर के अंदर जाने की अनुमति मिल भी जाती है, तो लोग पूरी जानकारी नहीं दे रहे हैं.
 
पॉश इलाकों में ज्यादा परेशानी

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पॉश इलाकों में डोर-टू-डोर जनगणना करना बहुत मुश्किल हो रहा है. ज्यादातर कामकाजी लोग अपने फ्लैट से बाहर चले जाते हैं, लिहाजा उनसे जानकारी नहीं मिल पाती है. वहीं पॉश इलाकों में अपनी पूरी डिटेल बताने में लोग और ज्यादा घबरा रहे हैं.

जनगणना में लोगों की संपत्ति और आमदनी से जुड़ी कई बातों को बताना पड़ रहा है. परिवार के सदस्यों के बारे में तो लोग जानकारी दे देते हैं, लेकिन चल और अचल संपत्ति की जानकारी देने से बच रहे हैं. इसके कारण सरकारी कर्मचारियों की दिनभर की मेहनत बेकार चली जा रही है.

गांवों में विरोध और बहस

अगर दिल्ली के गांव वाले इलाकों की बात करें, तो वहां भी स्थिति आसान नहीं है. जब शिक्षक लोगों से चल और अचल संपत्ति के बारे में पूछ रहे हैं, तो कई लोग उन्हें घरों से निकाल दे रहे हैं. कई जगह झगड़े जैसी स्थिति भी बन रही है. यानी जनगणना की प्रक्रिया लोगों को इतनी जटिल लग रही है कि राजधानी में इसे सफलतापूर्वक पूरा करना काफी मुश्किल हो रहा है.

झुग्गियों में मिल रहा अपेक्षाकृत बेहतर सहयोग

झुग्गियों में भी जनगणना के लिए शिक्षक जा रहे हैं. हालांकि झुग्गियों में लोग अपने और अपनी संपत्ति के बारे में थोड़ा-बहुत बता दे रहे हैं. झुग्गी में रहने वाले लोगों के पास ज्यादातर बहुत ज्यादा संपत्ति नहीं होती और उन्हें लगता है कि जनगणना के बाद शायद सरकारी योजनाओं का फायदा मिल सकेगा. इसीलिए पॉश इलाकों और गांवों के मुकाबले झुग्गियों में जनगणना प्रक्रिया करने में दिक्कत थोड़ी कम हो रही है.

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यह भी पढ़ें: सर्दियों में SIR ड्यूटी, गर्मियों में जनगणना... छुट्टियों में भी फील्ड में शिक्षक

लोगों के मन में टैक्स और जांच का डर

जिन लोगों को इस जनगणना से आपत्ति है, उन्होंने ऑफ रिकॉर्ड बताया कि परिवार की संख्या और जाति के बारे में जानकारी लेना समझ में आता है, लेकिन घर से लेकर लोगों की कमाई तक पहुंचने का क्या औचित्य है.

लोगों का कहना है कि सरकार के पास पहले से कई विभाग हैं, जिनके पास संपत्ति से जुड़ी जानकारी रहती है. सरकार को अगर जरूरत होगी तो वह वहां से जानकारी ले सकती है.

कई लोगों को इस बात का डर है कि जनगणना में चल और अचल संपत्ति का ब्योरा लेने के बाद कहीं इंकम टैक्स या दूसरी सरकारी परेशानियां न बढ़ जाएं. इसी कारण लोग इसमें पूरा सहयोग नहीं कर रहे हैं.

कुल मिलाकर राजधानी में जनगणना को जमीनी स्तर पर सफल कराना अभी काफी मुश्किल लग रहा है. प्रशासन को पहले इस जनगणना को लेकर जागरूकता फैलाने की जरूरत है. लोगों की शिकायतें सुनकर उन्हें संतुष्ट करने के बाद अगर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए, तो शायद लोग इसमें ज्यादा सहयोग करें.

दिल्ली से अमरदीप कुमार की रिपोर्ट
 

सर्दियों में SIR ड्यूटी, गर्मियों में जनगणना - कानपुर में शिक्षक परेशान
 

छुट्टियों में भी फील्ड में शिक्षक

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उत्तर प्रदेश का कानपुर में भीषण गर्मी के बीच चल रही जनगणना ड्यूटी को लेकर शिक्षकों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं. जनगणना कार्य में लगे शिक्षक सुधांशु ने बातचीत में बताया कि सुबह से दोपहर तक तेज धूप में घर-घर जाकर लोगों से जानकारी जुटाना आसान नहीं है, लेकिन सरकारी जिम्मेदारी होने के कारण शिक्षक लगातार फील्ड में काम कर रहे हैं.

निजी जानकारी साझा करने में लोगों की झिझक

शिक्षक के मुताबिक, सर्वे के दौरान कई लोग अपनी आय, संपत्ति और परिवार से जुड़ी जानकारी देने में शुरुआत में हिचकिचाते हैं. खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पहले यह जानना चाहते हैं कि यह सर्वे किसी सरकारी योजना से जुड़ा है या नहीं और कहीं जानकारी देने से उनके लाभ प्रभावित तो नहीं होंगे.

उन्होंने बताया कि जब लोगों को समझाया जाता है कि सरकार के लिए सही आंकड़े जरूरी हैं, ताकि योजनाएं बेहतर तरीके से बनाई जा सकें और आपात स्थिति में सूचना प्रसारण आसान हो सके, तब लोग सहयोग करने लगते हैं.

जानकारी छिपाने के मामले कम

जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षक ने बताया कि अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया, जहां किसी परिवार ने जानबूझकर जानकारी छिपाने की कोशिश की हो. लोग सर्वे को लेकर सवाल जरूर पूछते हैं, लेकिन जब उन्हें प्रक्रिया स्पष्ट कर दी जाती है, तो वे पूरी जानकारी दे देते हैं.

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गांवों में बेहतर सहयोग, कॉलोनियों में गेट पर बातचीत

शिक्षक के अनुसार, शहरों की गेटेड कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स में ज्यादातर लोग गेट पर ही बातचीत करके प्रक्रिया पूरी कर लेते हैं. वहीं गांवों में लोगों का व्यवहार ज्यादा सहयोगात्मक देखने को मिला है.

उन्होंने बताया कि कई ग्रामीण परिवार शिक्षकों को घर के अंदर बुलाकर आराम से पूरी जानकारी देते हैं. सरकार द्वारा पहले से जनगणना को लेकर जागरूकता फैलाए जाने का भी फायदा मिल रहा है.

पहचान को लेकर नहीं आई बड़ी दिक्कत

शिक्षक ने बताया कि सरकार की ओर से उन्हें आईडी कार्ड और नियुक्ति पत्र दिए गए हैं. इन्हें दिखाने के बाद लोगों का भरोसा आसानी से बन जाता है और सर्वे के दौरान पहचान को लेकर ज्यादा परेशानी नहीं होती.

सुबह साढ़े छह बजे से दोपहर तक फील्ड में शिक्षक

भीषण गर्मी को लेकर शिक्षक ने बताया कि टीम रोज सुबह करीब साढ़े छह बजे फील्ड में निकलती है और दोपहर 12 से 1 बजे के बीच लौटती है. तेज धूप, गर्म हवाएं और लगातार सफर के बीच काम करना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है.

उन्होंने यह भी कहा कि पहले अन्य सरकारी ड्यूटी और अब गर्मियों की छुट्टियों में जनगणना कार्य दिए जाने से शिक्षकों को आराम का समय नहीं मिल पा रहा है.

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युवा वर्ग डिजिटल रजिस्ट्रेशन में सबसे आगे

डिजिटल सेल्फ रजिस्ट्रेशन को लेकर शिक्षक ने बताया कि जिन घरों में युवा सदस्य हैं और स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, वहां कई लोग पहले से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर चुके होते हैं.

कई युवाओं ने यूट्यूब और अन्य माध्यमों से प्रक्रिया समझकर पहले ही आईडी जनरेट कर ली है, जिससे जनगणना टीम का काम काफी आसान हो जाता है.

यूपी से सिमर चावला की रिपोर्ट
 

मुंबई: चिलचिलाती धूप में घर-घर पहुंच रहीं आशा वर्कर्स
 

महाराष्ट्र में जनगणना का महा-अभियान शुरू हो चुका है. इस विशाल कार्य को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी राज्य की हजारों आशा वर्कर्स संभाल रही हैं, जो भीषण गर्मी में भी अपने कर्तव्य को बखूबी निभा रही हैं.

कैमरे से दूरी, लेकिन काम में पूरी मुस्तैदी

इस अभियान के दौरान जब हमने जमीन पर काम कर रहीं कई आशा वर्कर्स से बात की, तो वे कैमरे के सामने आने से कतराईं, लेकिन उन्होंने अपने अनुभव खुलकर साझा किए.

वर्कर्स ने बताया कि वे हर दिन लगभग 10 से 12 घरों का सर्वे कर रही हैं. इस काम में रोजाना 3 से 4 घंटे का समय लग रहा है. चूंकि राज्य में इस वक्त धूप और गर्मी का प्रकोप है, इसलिए फील्ड पर काम करने में कई तरह की शारीरिक और व्यावहारिक परेशानियां आ रही हैं.

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केस स्टडी: 900 लोगों की जिम्मेदारी

नाम न छापने की शर्त पर ‘पाटिल’ उपनाम की एक आशा वर्कर ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “मेरे हिस्से में करीब 900 लोगों के सर्वे की जिम्मेदारी है. अच्छी बात यह है कि स्थानीय होने के कारण लोग मुझे पहचानते हैं, इसलिए काफी सहयोग मिल रहा है. हालांकि, जब हम कुछ निजी जानकारियां मांगते हैं, तो लोग थोड़ा हिचकिचाते हैं. उन्हें समझाना पड़ता है कि यह डेटा सुरक्षित है, जिसके बाद वे जानकारी दे देते हैं.”

पाटिल ने बताया कि युवाओं से ज्यादा बुजुर्ग लोग इस प्रक्रिया में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. इस भीषण गर्मी में लोग मानवता भी दिखा रहे हैं और उन्हें पानी भी पूछ रहे हैं.

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और तकनीकी दिक्कतें

सर्वे के दौरान आशा वर्कर्स के सामने कुछ तकनीकी और सामाजिक चुनौतियां भी आ रही हैं. कई लोगों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन तो कराया है, लेकिन उसमें कुछ गलतियां रह गई हैं. ऐसे फॉर्म्स को दोबारा अपडेट करना पड़ रहा है. समाज का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है, जिसे यह तक नहीं पता कि राज्य में जनगणना चल रही है. ऐसे में वर्कर्स पहले उन्हें इसका महत्व समझाती हैं, फिर डेटा जुटाती हैं.

एक अन्य आशा वर्कर ने बताया कि कई बार किसी एक परिवार को समझाने और फॉर्म भरने में घंटों लग जाते हैं. ऊपर से कई बार सर्वर डाउन होने के कारण इंतजार करना पड़ता है और काम बीच में ही रुक जाता है. फिर भी राहत की बात यह है कि कुल मिलाकर लोग जानकारी दे रहे हैं और इस राष्ट्रीय कार्य में सहयोग कर रहे हैं.

महाराष्ट्र से एजाज खान की रिपोर्ट
 

 

गुरुग्राम: तपती धूप में फर्ज निभाते जनगणना वॉरियर्स
 

मई का महीना और आसमान से बरसती 45 डिग्री सेल्सियस की झुलसाने वाली धूप. ऐसे मौसम में जहां लोग घरों से बाहर निकलने से बचते हैं, वहीं गुरुग्राम की सड़कों, गलियों और बहुमंजिला इमारतों के बीच कुछ लोग लगातार जनगणना के काम में जुटे हुए हैं.

यह कहानी किसी बड़े सरकारी दफ्तर की नहीं, बल्कि जमीन पर काम कर रहे उन शिक्षकों और सुपरवाइजर्स की है, जो इस राष्ट्रीय कार्य को अपनी जिम्मेदारी मानकर निभा रहे हैं.

ग्रामीण इलाकों की चुनौती

सराय अलावर्दी इलाके में जिम्मेदारी संभाल रहे शिक्षक भगवान सिंह ने बताया कि शुरुआत में कम पढ़े-लिखे या किराएदार लोग उन्हें शक की नजर से देखते हैं.

उन्होंने कहा, 'आज के डिजिटल फ्रॉड के दौर में लोगों को अपनी निजी जानकारी देने में डर लगता है. शुरुआत में लोग हिचकिचाते हैं, लेकिन जब हम उन्हें समझाते हैं कि यह देश के विकास के लिए जरूरी है, तो लोग सहयोग करने लगते हैं.' उन्होंने बताया कि गर्मी में काम करना आसान नहीं है. कई बार छांव तक नहीं मिलती, लेकिन फिर भी काम जारी रखना पड़ता है.

पॉश इलाकों में अलग मुश्किलें

सेक्टर-11 जैसे पॉश इलाकों में काम कर रहीं शिक्षिका सपना ने बताया कि यहां लोग आसानी से दरवाजा नहीं खोलते. हालांकि, कई लोग गर्मी देखकर उन्हें अंदर बुला लेते हैं और पानी पिलाते हैं. सपना ने बताया कि कई पढ़े-लिखे लोगों ने ऑनलाइन सेल्फ रजिस्ट्रेशन भी किया हुआ है, जिससे उनका काम आसान हो जाता है.

सुपरवाइजर का संदेश

इस पूरे मिशन के पीछे सुपरवाइजर अपनी टीम का हौसला बढ़ाने में जुटे हैं. उन्होंने टीम को साफ निर्देश दिए हैं कि सरकारी अधिकारों का इस्तेमाल लोगों को डराने के लिए नहीं, बल्कि उनकी मदद करने के लिए किया जाए.

उन्होंने कहा, “अगर शिक्षक ही गर्मी से घबरा जाए, तो बच्चे क्या सीखेंगे. देश के सैनिक सीमा पर डटे रहते हैं, उसी तरह हम भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं.”

हरियाणा से नीरज वशिष्ठ की रिपोर्ट

गोरखपुर: लोग पूछ रहे - सरकार को इससे क्या फायदा
 

उत्तर प्रदेश गोरखपुर के मंगलपुर भरोहिया इलाके में जनगणना का कार्य कर रहे शिक्षक अजय कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि कई लोग पूछते हैं कि जनगणना क्यों हो रही है और सरकार को इससे क्या फायदा होगा. उन्होंने कहा कि शुरुआत में लोग सवाल उठा रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे अब लोग सहयोग कर रहे हैं और सवालों के जवाब दे रहे हैं.

उन्होंने बताया कि सुबह 6:30 बजे से काम शुरू होता है और दोपहर तक चलता है. धूप तेज होने पर शाम 3 बजे से फिर काम शुरू किया जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक गांव में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिला, जिसने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया हो.

ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी

अविनाश पांडे ने बताया कि कुछ लोग पूरी जानकारी देने से बचते हैं और कई लोग सवाल पूछते हैं. हालांकि समझाने के बाद लोग सहयोग करने लगते हैं. उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन बहुत कम देखने को मिला है.

यह भी पढ़ें: गोरखपुर जनगणना ग्राउंड रिपोर्ट: भीषण गर्मी और डिहाइड्रेशन के बीच फील्ड पर डटे शिक्षक, बयां किया जमीनी हकीकत का दर्द

डिहाइड्रेशन और लंबी दूरी सबसे बड़ी चुनौती

अरुण कुमार ने बताया कि गांवों में लंबी दूरी तय करना सबसे बड़ी चुनौती है. भीषण गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन और गले में खराश जैसी समस्याएं हो रही हैं. उन्होंने कहा कि लोग पूछते हैं कि उन्हें इससे क्या फायदा मिलेगा और उन्हें काफी समझाना पड़ता है.

गांवों में बेहतर सहयोग

रेनू त्रिपाठी ने बताया कि गांवों में लोग सहयोग कर रहे हैं, हालांकि चार पहिया वाहन की जानकारी देने में लोग हिचकिचाते हैं. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अध्यापक होने का फायदा मिल रहा है और लोग सम्मान के साथ सहयोग कर रहे हैं.

शहर में भी स्वगणना कम

संजीव पांडे ने बताया कि लोग निजी संपत्ति की जानकारी देने में थोड़ा संकोच करते हैं, लेकिन समझाने के बाद जानकारी दे देते हैं. उन्होंने कहा कि गोरखपुर शहर के बीचोबीच इलाके में काम करने के बावजूद उन्हें अभी तक कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिला, जिसने स्वगणना की हो.

यूपी से गजेंद्र त्रिपाठी की रिपोर्ट
 

चंदौली: गांवों में सहयोग, कॉलोनियों में संकोच
 

पूर्वी उत्तर प्रदेश के चंदौली में जनगणना कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि गांवों में लोग आसानी से जानकारी दे रहे हैं, जबकि नई कॉलोनियों में लोग जानकारी छिपाने की कोशिश कर रहे हैं.

ऑनलाइन स्वगणना का हवाला

सुनीता यादव ने बताया कि कई लोग कहते हैं कि उन्होंने ऑनलाइन स्वगणना कर ली है, लेकिन जब उनसे उसका डेटा मांगा जाता है, तो वे साझा नहीं करते. उन्होंने कहा कि गांवों के लोग सहयोग कर रहे हैं, जबकि कॉलोनियों में रहने वाले लोग जानकारी देने से बच रहे हैं.

गांवों में ज्यादा सहयोग

आशा देवी ने बताया कि गांवों के लोग अपने घर और गाड़ी की जानकारी आसानी से दे रहे हैं, जबकि कॉलोनियों में लोग निजी जानकारी साझा करने से बच रहे हैं.

पहचान पत्र देखने के बाद भरोसा

सुपरवाइजर विक्रम श्रीवास्तव ने बताया कि शुरुआत में लोग पूछते हैं कि आप कौन हैं और कहां से आए हैं. आईडी कार्ड दिखाने के बाद लोग जानकारी देने लगते हैं. उन्होंने बताया कि उनके आई कार्ड में स्कैनर भी लगा हुआ है, जिसे स्कैन करके लोग उनकी जानकारी देख सकते हैं.

यूपी से उदय गुप्ता की रिपोर्ट
 

फिरोजपुर: आय और संपत्ति छिपाने की कोशिश
 

पंजाब के फिरोजपुर जिले में भीषण गर्मी के बीच जनगणना ड्यूटी कर रहे शिक्षकों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. कैंटोनमेंट एरिया में ड्यूटी कर रहे गुरभेज सिंह ने बताया कि करीब 80 प्रतिशत लोग सहयोग कर रहे हैं, जबकि लगभग 20 प्रतिशत लोग जानकारी देने में हिचकिचाते हैं. उन्होंने कहा कि कई परिवार अधूरी जानकारी देते हैं और कुछ लोग घर में रहने वाले सदस्यों की संख्या तक छिपाते हैं.

पहचान पर उठे सवाल

पुलिस लाइन में ड्यूटी कर रहीं अध्यापिका सीमू ने बताया कि शुरुआत में कुछ लोगों ने उनकी पहचान पर भी सवाल उठाए, लेकिन आईडी कार्ड दिखाने के बाद स्थिति सामान्य हो गई. उन्होंने बताया कि कुछ परिवारों को डर रहता है कि जानकारी देने से उनके क्वार्टर या सुविधाओं पर असर पड़ सकता है.

निजी जानकारी साझा करने में संकोच

गुरविंदर कौर ने बताया कि कई लोग संपत्ति, गाड़ी और निजी चीजों की जानकारी देने से बचते हैं. लोगों का कहना होता है कि जनगणना में केवल परिवार के सदस्यों की संख्या पूछी जानी चाहिए, निजी संपत्ति की जानकारी क्यों ली जा रही है. उन्होंने बताया कि कुछ लोग गलत मोबाइल नंबर तक दे देते हैं ताकि उनसे दोबारा संपर्क न किया जा सके.

शाम को करना पड़ रहा सर्वे

गीता गल्होत्रा ने बताया कि दिन में गर्मी ज्यादा होने के कारण स्कूल ड्यूटी के बाद शाम को सर्वे करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी और युवा वर्ग सेल्फ रजिस्ट्रेशन में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं.

समझाने के बाद लोग सहयोग कर रहे

दीप सिखा ने बताया कि कई लोगों को जनगणना की प्रक्रिया और उद्देश्य समझाना पड़ता है. समझाने के बाद लोग सहयोग करने लगते हैं. उन्होंने बताया कि बढ़ते अपराधों के कारण कई लोग बाहरी लोगों को शक की नजर से देखते हैं.

पंजाब से अक्षय कुमार की रिपोर्ट
 

भोपाल: डिहाइड्रेशन और बुखार के बीच जनगणना
 

देशभर में जनगणना चल रही है और शिक्षक डोर-टू-डोर सर्वे कर रहे हैं. भीषण गर्मी के बीच जनगणना ड्यूटी में लगे कर्मचारियों ने बताया कि वे बड़ी जिम्मेदारी के साथ यह काम कर रहे हैं. कर्मचारियों ने बताया कि लोग खुलकर जानकारी दे रहे हैं और उन्हें किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा.

पहचान पूछते हैं लोग

कर्मचारियों ने बताया कि कई घरों में लोग पहले पूछते हैं कि आप कौन हैं और कहां से आए हैं. इसके बाद वे अपना पहचान पत्र दिखाते हैं और लोगों को भरोसा दिलाते हैं.

गर्मी सबसे बड़ी चुनौती

उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में काम करना बेहद मुश्किल है. कई बार डिहाइड्रेशन हो जाता है. बुखार और कमजोरी के बावजूद भी काम करना पड़ रहा है.

रोज 80 से 100 घरों तक पहुंच

कर्मचारियों ने बताया कि वे रोजाना औसतन 80 से 100 घरों तक पहुंच रहे हैं. मोबाइल के जरिए रजिस्ट्रेशन भी किया जा रहा है और लोग सहयोग कर रहे हैं.

मध्य प्रदेश से धर्मेंद्र साहू की रिपोर्ट
 

सोनीपत: बीपीएल कार्ड कटने के डर से लोग छिपा रहे जानकारी
 

हरियाणा के सोनीपत में चल रही जनगणना के दौरान सरकारी स्कूलों के अध्यापकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जनगणना ड्यूटी में लगे अध्यापक घर-घर जाकर लोगों की जानकारी जुटा रहे हैं, लेकिन कई लोग सही जानकारी देने से बच रहे हैं.

खासतौर पर आय और फोर व्हीलर से जुड़ी जानकारी को लेकर लोग खुलकर जवाब नहीं दे रहे. कई लोग अपने पास कार होने के बावजूद केवल टू व्हीलर होने की जानकारी दे रहे हैं.

सरकारी सुविधाएं बंद होने का डर

कई परिवारों को डर है कि कहीं उनकी बुजुर्ग पेंशन या बीपीएल कार्ड की सुविधा बंद न हो जाए. इसी कारण वे अपनी सही आय और संपत्ति की जानकारी साझा नहीं कर रहे.

लोगों को समझाने में हो रही दिक्कत

अध्यापकों ने बताया कि कई लोग दरवाजा तक नहीं खोलते और शक की नजर से देखते हैं. कई लोगों को बार-बार समझाना पड़ता है कि जनगणना उनके ही फायदे के लिए है, लेकिन फिर भी लोग खुलकर जानकारी नहीं दे रहे.

गर्मी के कारण सीमित काम

हीट वेव के कारण अध्यापक दिन में केवल चार घंटे ही काम कर पा रहे हैं. औसतन 20 से 25 घरों तक ही पहुंच बन पा रही है.

हरियाणा से पवन कुमार की रिपोर्ट
 

पठानकोट: सहयोग भी, संकोच भी
 

देशभर के साथ-साथ पठानकोट जिले में भी जनगणना की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है. चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बावजूद सरकारी शिक्षक घर-घर जाकर आंकड़े जुटाने के काम में लगे हुए हैं.

लोग कर रहे सहयोग

शिक्षकों ने बताया कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में लोग सहयोग कर रहे हैं और परिवार और संपत्ति से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं. हालांकि कुछ परिवार अभी भी निजी जानकारी देने में हिचकिचाते हैं.

यह देखें: घर बैठे खुद भरें जनगणना 2027 फॉर्म, जानें किराएदारों के लिए जरूरी नियम

पांच घंटे तक फील्ड में काम

शिक्षकों ने बताया कि वे चार से पांच घंटे तक फील्ड में रहकर लोगों से जानकारी जुटा रहे हैं. उन्होंने कहा कि फिलहाल बहुत कम लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किया है, इसलिए ज्यादातर जानकारी घर-घर जाकर ही जुटानी पड़ रही है.

पंजाब से पवन सिंह की रिपोर्ट

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