केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए एपस्टीन फाइल से जुड़े आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुरी ने कहा कि राहुल गांधी ने संसद में उनका नाम लेकर बेबुनियाद आरोप लगाए हैं और यह उनकी पुरानी आदत रही है.
पुरी ने कहा, “एक युवा नेता ने संसद में कुछ कहा है. उन्हें बिना आधार के आरोप लगाने की आदत है. राजनीति में दो तरह के नेता होते हैं. एक वे, जो जिम्मेदारी निभाते हुए समाज सेवा में जीवन समर्पित करते हैं और देश को बदलने का काम करते हैं. ऐसे नेताओं ने देश को दुनिया की दसवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तक पहुंचाया है. हम अभी चौथे स्थान पर हैं और जल्द तीसरे स्थान पर होंगे.”
उन्होंने बिना नाम लिए राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ नेता ऐसे भी हैं जो कभी-कभी देश आते हैं, विदेश यात्रा करते हैं और जब संसद में आते हैं तो दूसरों की बात सुनने के बजाय बाहर चले जाते हैं. पुरी ने कहा, “आज भी भाषण देने के बाद वे संसद से चले गए.”
2013 की घटना का जिक्र
हरदीप पुरी ने कहा कि यही नेता 2013 में तब सुर्खियों में आए थे, जब तत्कालीन अध्यादेश को सार्वजनिक रूप से फाड़ दिया था. कुछ महीने पहले इन्हीं नेता ने दावा किया था कि ब्राजील की एक मॉडल ने भारत में कई बार वोट डाला, लेकिन बाद में पता चला कि वह बयान गलत था.
पुरी ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि वे संविधान की कॉपी लेकर हवा में लहराते रहे और उनका कैडर भी ऐसा करता रहा. फिर किसी ने सेलोफीन का कवर निकाल कर पूछा कि यह कौन से संविधान की कॉपी है.
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि राहुल गांधी ने भारत को 'डेड इकॉनोमी' बताया था. उन्होंने कहा, “इस शब्द का इस्तेमाल करने से पहले डिक्शनरी या कॉमन सेंस से उसका मतलब समझ लेना चाहिए. उनके बयानों में मनोरंजन वैल्यू जरूर होती है, लेकिन यह बफूनरी (हास्यास्पद व्यवहार) का हिस्सा है.”
राहुल गांधी से संसद में मुलाकात का जिक्र
पुरी ने यह भी बताया कि 26 नवंबर 2025 को संविधान दिवस के कार्यक्रम के दौरान संसद के सेंट्रल हॉल में राहुल गांधी उनके पास आए थे और आंख मारते हुए बोले कि आपका नाम दिलचस्प जगह पर आया है. केंद्रीय मंत्री ने कहा, "मैंने उनसे पूछा कि क्या आप सच्चाई जानना चाहेंगे? और फिर मैंने उन्हें इस बारे में जानकारी भी भेजी."
पुरी ने कहा कि उन्होंने राहुल गांधी को पूरे मामले को समझाने के लिए नोट्स भेजे थे, लेकिन फिर भी संसद में उनका नाम एपस्टीन फाइल के संदर्भ में लिया गया.
एपस्टीन से मुलाकात पर सफाई
मंत्री पुरी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने जेफरी एपस्टीन से मुलाकात की थी, लेकिन यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय पीस इंस्टिट्यूट (IPI) के एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहते हुए हुई थी. यह घटनाक्रम 2009 का है, जब वह न्यूयॉर्क में भारत के राजदूत थे. उन्होंने कहा, “यह सारे तथ्य पब्लिक डोमेन में हैं. लगभग तीन मिलियन ईमेल सार्वजनिक हैं. आठ साल बाद मैं मंत्री बना. आठ साल के दौरान 3-4 मुलाकातों का जिक्र है."
उन्होंने आगे कहा कि मैंने राहुल गांधी को भेजे गए नोट्स में भी यह बताया था कि जब मैं संयुक्त राष्ट्र में भारतीय दूत के तौर पर रिटायर हुआ था तब मुझे अंतरराष्ट्रीय पीस इंस्टिट्यूट में आमंत्रित किया गया था. मैं इंडिपेंडेंट कमीशन का जनरल सेक्रेटरी था. तब ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री इस संस्थान के प्रमुख थे और वह एपस्टीन को जानते थे. तभी मेरी मुलाकातें केवल एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होने के नाते हुई थीं और इसका किसी आरोप या विवाद से कोई संबंध नहीं है.
ईमेल और लिंक्डइन कनेक्शन का जिक्र
पुरी ने कहा कि एपस्टीन से जुड़े केवल एक-दो ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था. उन्होंने बताया कि उनके एक संपर्क ने उन्हें लिंक्डइन के रीड हॉफमैन से मिलवाया था.
पुरी ने कहा, “मैंने उस ईमेल में लिखा था कि भारत इंटरनेट आधारित आर्थिक गतिविधियों के लिए शानदार अवसर प्रस्तुत करता है. मैंने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का भी जिक्र किया था. जब मैंने यह लिखा, तब मैं एक निजी नागरिक था, सरकारी अधिकारी नहीं.”
पुरी ने दोहराया कि एपस्टीन से उनकी मुलाकात केवल अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के तहत हुई थी और इसका किसी भी प्रकार के आरोपों से कोई संबंध नहीं है.
ट्रेड और अर्थव्यवस्था पर भी बयान
पुरी ने राहुल गांधी के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि अंतरराष्ट्रीय दबाव में भारत इंटरनेशनल डील कर रहा है. उन्होंने कहा, “भारत की 50 फीसदी जीडीपी एक्सटर्नल सेक्टर से जुड़ी है, कुछ पढ़-लिख लेना चाहिए. भारत ने कम समय में नौ ट्रेड एग्रीमेंट साइन किए हैं और वह खुद ट्रेड नेगोशिएटर रहे हैं. आप समझौते उन शर्तों पर करते हैं, जो सामने से आती हैं.”