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शादी और प्रेम पर कहीं पहरा, कहीं प्रोटेक्शन... दो राज्य, दो कानूनों की कहानी

गुजरात में यूसीसी पारित हुआ है. वहीं, कर्नाटक ने 'ईवा नम्मावा' बिल पारित किया है. पश्चिमी भारत और दक्षिणी भारत के इन दो राज्यों में पारित हुए इन दो बिल में कहीं प्यार पर पहरा है, तो कहीं प्रोटेक्शन.

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कर्नाटक विधानसभा से पारित हुआ है ईवा नम्मावा बिल (Photo: ITG)
कर्नाटक विधानसभा से पारित हुआ है ईवा नम्मावा बिल (Photo: ITG)

एक देश, दो राज्य और दो नए कानून. एक तरफ पश्चिमी भारत के गुजरात की विधानसभा ने दो दिन पहले समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी पारित किया. वहीं, कमोबेश इसी के आसपास दक्षिण भारत के कर्नाटक की विधानसभा और विधान परिषद से भी एक बिल पारित हुआ- ईवा नम्मावा. गुजरात में जहां लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार है. वहीं, कर्नाटक भी दक्षिण में बीजेपी का प्रवेशद्वार माना जाता है. सूबे में बीजेपी की भी सरकार रही है.

हालांकि, इस समय तस्वीर दूसरी है. कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है. कहने के लिए दो राज्यों के विधानमंडल से पारित हुए इन दो बिल की प्रकृति अलग है, प्रवृति अलग है. ठीक वैसे ही, जैसे भारतीय राजनीति के दो ध्रुव मानी जाने वाली बीजेपी और कांग्रेस की वैचारिकी में. इन दोनों राज्यों के दो कानूनों में कुछ खास बिंदुओं, जैसे शादी और रिलेशनशिप को लेकर प्रावधान एकदम उलट हैं. कहीं प्रेम और शादी पर पहरा है, तो कहीं प्रोटेक्शन... आइए, बात करते हैं ऐसे ही कुछ बिंदुओं पर.

शादी

गुजरात विधानसभा से पारित यूसीसी के मुताबिक शादियों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा. जबरदस्ती या दबाव डालकर की गई शादियों के लिए सात साल तक की जेल का भी प्रावधान है. वहीं, कर्नाटक के ईवा नम्मावा कानून में विवाह के लिए स्वतंत्रता की बात की गई है. इस कानून में यह कहा गया है कि सभी वयस्कों को परिवार, जाति, समूह या सामुदायिक निकायों के हस्तक्षेप के बिना अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने के लिए स्वतंत्र हैं.

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लिव-इन रिलेशनशिप

गुजरात यूसीसी में लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है. लिव-इन का रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर तीन महीने की सजा का प्रावधान किया गया है. इसमें यह प्रावधान भी किया गया है कि अगर किसी महिला को उसका लिव इन पार्टनर छोड़ देता है, तो वह गुजारा भत्ता मांगने की हकदार होगी. वहीं, कर्नाटक के ईवा नम्मावा कानून में लिवृ-इन रिलेशनशिप को मान्यता देने के लिए कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं है.

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अंतरजातीय रिश्ते

गुजरात के कानून में अंतरजातीय रिश्तों को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. सभी जातियों के शादी के नियम समान होंगे, इससे अंतरजातीय विवाह को कानूनी मान्यता आसान बन सकती है. वहीं, कर्नाटक के ईवा नम्मावा कानून में यह प्रावधान किया गया है कि शादी का वादा कर रिलेशन बनाने के बाद जाति के आधार पर इनकार की स्थिति में इसे रेप माना जाएगा. अंतरजातीय रिश्ते को सुरक्षा देने का प्रावधान भी कर्नाटक के कानून में है.

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धमकियां मिलने की स्थिति में कपल को छह घंटे के भीतर पुलिस सुरक्षा देनी होगी. राज्य को ऐसे जोड़ों के लिए रहने के इंतजाम के साथ ही इन पर निर्भर परिजनों और गवाहों को भी सुरक्षा उपलब्ध करानी होगी.

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अंतरधार्मिक रिश्ते

गुजरात में पारित यूसीसी में अंतरधार्मिक रिश्ते या अंतरधार्मिक विवाह को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं है. शादियों में रस्में धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार ही होंगी और 60 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा. अंतरधार्मिक विवाह की स्थिति में ऐसा माना जा रहा है कि माता-पिता को जानकारी देने के साथ ही एक एफिडेविट देना अनिवार्य किया जा सकता है. वहीं, कर्नाटक का इवा नम्मावा कानून अंतर धार्मिक विवाह करने वाले जोड़ों को भी कानूनी सुरक्षा देने का प्रावधान करता है. इसके लिए 24 घंटे चालू रहने वाली हेल्पलाइन के साथ ही सुरक्षित आश्रय के इंतजाम का भी प्रावधान है. 

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