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समुद्र का बढ़ेगा पारा! मार्च से मई के बीच आयेंगे ये बदलाव... WMO की रिपोर्ट

मार्च से मई 2026 के बीच भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मौसम का बदलाव देखने को मिल सकता है. पश्चिमी प्रशांत में समुद्र का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म रहने की संभावना है. इसकी वजह से पूर्व और पश्चिमी हिस्सों के बीच तापमान का अंतर बना रह सकता है.

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समुद्र के कुछ हिस्सों में तापमान के बढ़ने का अनुमान है. (Photo: Pixabay)
समुद्र के कुछ हिस्सों में तापमान के बढ़ने का अनुमान है. (Photo: Pixabay)

नवंबर 2025 से जनवरी 2026 तक ग्लोबल सी-सर्फेस टेम्परेचर यानी समुद्री सतह का तापमान औसत से काफी ऊपर बना रहा. वर्ल्ड मेटियोरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) के मुताबिक, दोनों गोलार्धों के उपोष्णकटिबंधीय महासागरों में उल्लेखनीय गर्माहट दर्ज की गई. प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में, अंतरराष्ट्रीय डेट लाइन के पूर्व में समुद्र का तापमान सामान्य से थोड़ा कम रहा.

इसी वजह से ला नीना (La Niña) की हल्की स्थिति बनी रही. भले ही मध्य और पूर्वी प्रशांत में तापमान ज्यादा अलग नहीं था, लेकिन पूर्व और पश्चिम के बीच तापमान का अंतर बना रहा. इससे मौसम पर ला नीना जैसा असर दिखा.

हिंद महासागर में भारतीय महासागर द्विध्रुव (IOD) नेगेटिव चरण में रहा. इंडोनेशिया के पास समुद्र का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म था. हालांकि अब इस गर्मी की तीव्रता धीरे-धीरे कम हो रही है.

यह भी पढ़ें: उत्तर भारत में गर्मी की एंट्री... 30 डिग्री क्रॉस करेगा तापमान! दक्षिण में भारी बारिश का अलर्ट, देशभर में बदल रहा मौसम

मार्च से मई के बीच बदलेगा तापमान
मार्च से मई 2026 के दौरान भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बदलाव का दौर देखने को मिल सकता है. अनुमान है कि मध्य और पूर्वी प्रशांत में जो समुद्री सतह तापमान (SST) सामान्य से कम है, मौजूदा कमजोर ला नीना (La Niña) खत्म होते हुए स्थिति ENSO-न्यूट्रल की ओर बढ़ सकती है.

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हालांकि समुद्र के कुछ हिस्सों में तापमान बढ़ेगा. पश्चिमी प्रशांत महासागर में सामान्य से ज्यादा तापमान बने रहने की संभावना है. इससे पूर्व और पश्चिम के बीच तापमान का अंतर बना रहेगा. यह अंतर वायुमंडलीय हालात को अब भी ला नीना जैसे प्रभाव देने में भूमिका निभा सकता है.

हिंद महासागर में भारतीय महासागर द्विध्रुव (IOD) इंडेक्स के अपने हालिया नेगेटिव चरण से कमजोर होकर सामान्य स्तर के करीब आने की संभावना है.

वहीं, अटलांटिक महासागर में कुल मिलाकर गर्म स्थिति बने रहने का अनुमान है. उत्तर और दक्षिण उष्णकटिबंधीय अटलांटिक में समुद्री तापमान सामान्य से थोड़ा ऊपर रहने की संभावना है, जिससे पिछले कुछ मौसमों से चली आ रही सामान्य से अधिक गर्मी का रुझान जारी रह सकता है

जानें बारिश का पैर्टन

WMO के अनुसार, मार्च–मई 2026 के दौरान, भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में बारिश का पैटर्न अभी भी ला नीना (La Niña) जैसा प्रभाव दिखा सकता है, भले ही समुद्री सतह तापमान (SST) धीरे-धीरे ENSO-न्यूट्रल स्थिति की ओर बढ़ रहा हो. 

भूमध्य रेखा के ठीक दक्षिण में 170°E से लगभग 120°W तक सामान्य से कम बारिश की संभावना ज्यादा है. यह क्षेत्र दक्षिण-पूर्व दिशा में मुड़ते हुए लगभग 90°W तक फैला हुआ है. इसी तरह, Maritime Continent के पूर्वी हिस्से में भी सामान्य से कम बारिश की संभावना अधिक है.

हालांकि 160°W से लेकर दक्षिण अमेरिका के तट तक भूमध्यरेखीय क्षेत्र में बारिश सामान्य के आसपास रहने की संभावना है. उत्तरी गोलार्ध में, Philippine Sea के पास से शुरू होकर 15°N अक्षांश के साथ 150°W तक सामान्य से ज्यादा बारिश का एक क्षेत्र बनने की संभावना है.

प्रशांत के बाहर, भूमध्यरेखीय अटलांटिक में सामान्य से कम बारिश की संभावना थोड़ी बढ़ी हुई है. वहीं उत्तर-पश्चिमी उत्तरी अमेरिका, भारतीय उपमहाद्वीप और उत्तरी एशिया में सामान्य से अधिक बारिश की हल्की संभावना जताई गई है. इसके विपरीत, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और यूरोप के लिए वर्षा के संकेत अभी स्पष्ट नहीं हैं. अलग-अलग मॉडलों में एक जैसी भविष्यवाणी नहीं मिल रही है.

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