गाजियाबाद के लोनी इलाके में प्रदूषण का स्तर बेहद गंभीर हो गया है, जहां एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 के करीब है और PM2.5 का स्तर WHO के मानकों से 22 गुना अधिक है. अवैध उद्योग, धूल और दिल्ली से आने वाला प्रदूषण मिलकर हवा को जहरीला बना रहे हैं, जिससे स्थानीय लोग सांस की बीमारियों से जूझ रहे हैं. विधायक नंद किशोर गुर्जर ने अवैध उद्योगों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है. वहीं, स्थानीय लोग परेशान हैं और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
आईक्यूएयर की वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2025 के अनुसार, लोनी दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है. यहां का वार्षिक औसत PM2.5 स्तर 112.5 µg/m³ दर्ज किया गया जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशा-निर्देश (5 µg/m³) से 22 गुना ज्यादा है. ये स्तर पिछले साल की तुलना में करीब 23 प्रतिशत बढ़ा है.
रिपोर्ट की माने तो दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से पांच भारत के हैं, जिनमें लोनी के साथ दिल्ली चौथे और गाजियाबाद भी शामिल है. जलवायु परिवर्तन और जंगलों की आग ने भी इस साल वैश्विक हवा की गुणवत्ता को बिगाड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है.
लोनी की भौगोलिक स्थिति
लोनी की भौगोलिक स्थिति और जर्जर बुनियादी ढांचा प्रदूषण को और भयावह बना रहा है. यहां की सड़कें गहरे गड्ढों से भरी हैं, जिन पर वाहन चलते ही धूल का भारी गुबार उठता है. ये धूल हवा में PM10 और PM2.5 कणों की मात्रा को खतरनाक स्तर तक पहुंचा देती है.
अवैध उद्योगों पर कार्रवाई की तैयारी
प्रदूषण के इस संकट पर राजनीति भी तेज हो गई है. लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर ने आरोप लगाया कि दिल्ली से आने वाला प्रदूषण लोनी को प्रभावित करता है.
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली में बड़े पैमाने पर अवैध इंडस्ट्री संचालित हो रही थीं. हालांकि, वर्तमान में बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा इन पर कार्रवाई की जा रही है, जिससे कुछ हद तक सुधार देखने को मिला है.
उन्होंने बताया कि लोनी में प्रदूषण के हालातों को देखते हुए अधिकारियों की एक विशेष कमेटी गठित की जा रही है जो अवैध इंडस्ट्री और प्रदूषण फैलाने वाली यूनिटों पर सख्त से कार्रवाई करेगी.
विधायक ने भरोसा दिलाया कि आने वाले वक्त में प्रदूषण को रोकने के लिए जरूरी और ठोस कदम उठाए जाएंगे.
बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरनाक बना प्रदूषण
निवासियों का कहना है कि सर्दियों में हवा की धीमी गति के कारण ये जहरीली परत यहीं जमा हो जाती है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों का सांस लेना दूभर हो गया है.
स्थानीय लोगों के लिए प्रदूषण अब केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की पीड़ा बन गया है. अब हालात ऐसे हो गए हैं कि सांस लेना तक मुश्किल होता जा रहा है, लोगों को लगातार गले में इंफेक्शन, आंखों में जलन और सांस की तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है. खास कर बच्चों और बुजुर्गों के लिए ये स्थिति बेहद खतरनाक बन चुकी है.
लोगों प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग कर रहे हैं कि सड़कों की मरम्मत जल्द की जाए और अवैध रूप से चल रही प्लास्टिक रीसाइक्लिंग यूनिटों को तत्काल बंद किया जाए.
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक रियल-टाइम डेटा मॉनिटरिंग और उत्सर्जन पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक लोनी की हवा को साफ करना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा.