कई नेताओं ने मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद शीर्ष पद खोने पर अपनी पार्टी बदल ली और उनमें से केवल एक ही दोबारा मुख्यमंत्री बन सके. तमिलनाडु के तीन बार के मुख्यमंत्री रह चुके ओ पन्नीरसेल्वम शुक्रवार को ऐसे कम से कम 22 नेताओं की सूची में शामिल हो गए.
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ही ऐसे नेता रहे जिन्होंने पार्टी बदलने के बाद दोबारा मुख्यमंत्री पद हासिल किया, जबकि अन्य नेताओं ने अपनी मूल पार्टी छोड़ने के बाद केंद्रीय मंत्री, सांसद और पार्टी अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले. गोवा में चार पूर्व मुख्यमंत्री शीर्ष पद खोने के बाद दल बदल चुके हैं, जबकि कर्नाटक और उत्तराखंड से ऐसे दो-दो नेता हैं.
करियर के आखिरी दौर में छोड़ी पार्टी
अपने राजनीतिक करियर के अंतिम चरण में पार्टी बदलने वालों में एस एम कृष्णा शामिल थे, जिन्होंने 2017 में 85 वर्ष की उम्र में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन की. कृष्णा 1999 से 2004 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे और 2024 में 92 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया. एन डी तिवारी, जो पहले कांग्रेस में थे, दो राज्यों- उत्तर प्रदेश और बाद में उत्तराखंड- के मुख्यमंत्री रहे. उन्होंने 2018 में 92 वर्ष की उम्र में कांग्रेस छोड़ी और उसी वर्ष 93वां जन्मदिन मनाने के बाद उनका निधन हो गया.
बेटे और समर्थकों के साथ डीएमके में शामिल हुए पन्नीरसेल्वम
एआईएडीएमके सुप्रीमो रहीं जे जयललिता के करीबी सहयोगी रहे ओ पन्नीरसेल्वम, जिन्हें ओपीएस के नाम से जाना जाता है, शुक्रवार को अपने पुराने दल में लौटने के तीन साल से अधिक प्रयासों में असफल रहने के बाद विरोधी डीएमके में शामिल हो गए. उन्हें 2022 में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था.
एआईएडीएमके के पूर्व कोषाध्यक्ष और पार्टी कोऑर्डिनेटर रह चुके ओपीएस अपने बेटे पी रविंद्रनाथ कुमार और समर्थकों के साथ डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए. डीएमके सरकार बनने के बाद 2006 में कुछ समय के लिए तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे ओपीएस ने एआईएडीएमके प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी को 'तानाशाह' और 'अहंकारी' बताया.
सूची में शामिल जीतन राम मांझी का भी नाम
जीतन राम मांझी, जो 2024 से केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री हैं, कभी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाते थे. मांझी मई 2014 से फरवरी 2015 तक बिहार के 23वें मुख्यमंत्री रहे, जब लोकसभा चुनाव में जेडीयू के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए नीतीश कुमार ने इस्तीफा दिया था.
लगभग 10 महीने बाद जेडीयू ने मांझी से पद छोड़कर नीतीश कुमार के लिए कुर्सी खाली करने को कहा, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया और फरवरी 2015 में पार्टी से निष्कासित कर दिए गए. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) बनाई, जो फिलहाल एनडीए का हिस्सा है.
कद्दावर कांग्रेसियों ने भी छोड़ी पार्टी
गुलाम नबी आजाद, जो कांग्रेस में लंबे समय तक शीर्ष पदों पर रहे और 2005 से 2008 तक जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री भी रहे, उन्होंने नेतृत्व पर सवाल उठाने के बाद पार्टी छोड़कर अपनी डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी बनाई. पंजाब के पूर्व दो बार के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने 2022 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन की. उन्होंने पंजाब लोक कांग्रेस बनाई थी, जिसे बाद में बीजेपी में विलय कर दिया गया.
गोवा के जिन पूर्व मुख्यमंत्रियों ने पार्टी बदली, उनमें दिगंबर कामत (कांग्रेस से बीजेपी, 2022), लुइजिन्हो फलेरियो (कांग्रेस से तृणमूल कांग्रेस, 2021; 2023 में इस्तीफा), रवि नाइक (कांग्रेस से बीजेपी, 2021) और चर्चिल आलेमाओ (कांग्रेस से तृणमूल कांग्रेस, 2014) शामिल हैं. कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर ने 2023 में बीजेपी छोड़कर कांग्रेस जॉइन की, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में लौट आए और वर्तमान में सांसद हैं.
ज्यादातर नेताओं ने थामा बीजेपी का हाथ
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे और अशोक चव्हाण ने क्रमशः शिवसेना और कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन की. राणे केंद्रीय मंत्री हैं, जबकि चव्हाण राज्यसभा सांसद हैं. उत्तराखंड में विजय बहुगुणा ने शीर्ष पद खोने के बाद कांग्रेस छोड़कर 2016 में बीजेपी जॉइन की.
झारखंड में चंपाई सोरेन ने फरवरी से जुलाई 2024 तक मुख्यमंत्री रहने के बाद जेएमएम छोड़कर बीजेपी जॉइन की, जबकि बाबूलाल मरांडी ने 2006 में बीजेपी छोड़कर झारखंड विकास मोर्चा बनाया और 2020 में उसे बीजेपी में विलय कर वापस लौट आए.
इन पूर्व मुख्यमंत्रियों ने भी छोड़ी पार्टी
मेघालय के दो बार के मुख्यमंत्री मुकुल संगमा ने 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस जॉइन की, जबकि ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री गिरिधर गमांग 2015 में कांग्रेस से बीजेपी और 2023 में बीआरएस में शामिल हुए. एकीकृत आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने राज्य के विभाजन के विरोध में कांग्रेस छोड़ दी और 2023 में बीजेपी जॉइन की. छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने 2017 में कांग्रेस छोड़कर जनता छत्तीसगढ़ कांग्रेस (जोगी) बनाई. उनका 2020 में निधन हो गया.