भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने असम, केरल, पुदुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों तथा छह राज्यों में उपचुनावों की घोषणा कर दी है. इन चुनावों को पूरी तरह हिंसा-मुक्त, प्रलोभन-मुक्त, स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भय बनाए रखने के लिए आयोग ने 25 लाख से अधिक चुनाव अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात किया है.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के दौरान स्पष्ट कहा कि हिंसा में लिप्त होने या हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने जोर दिया कि हर मतदाता बिना किसी डर या पक्षपात के अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सके.
आयोग ने बताया कि इन चुनावों में लगभग 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिसके लिए प्रति 70 मतदाताओं पर एक अधिकारी का अनुपात रखा गया है.
आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. तैनात किए गए कर्मियों में मतदान कर्मी, सुरक्षाबल और पर्यवेक्षक शामिल हैं जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत अपनी सेवाएं देंगे.
8.5 लाख सुरक्षकर्मी भी तैनात
आयोग ने चुनावी मशीनरी को मजबूत करने के लिए कर्मियों का विस्तृत वर्गीकरण किया है. तैनात किए गए 25 लाख कर्मियों में लगभग 15 लाख मतदान कर्मी और 8.5 लाख सुरक्षाकर्मी शामिल हैं. इसके अलावा 40 हजार मतगणना कर्मी, 49 हजार माइक्रो पर्यवेक्षक, 21 हजार सेक्टर अधिकारी और 15 हजार माइक्रो ऑब्जर्वर भी व्यवस्था संभालेंगे. जमीनी स्तर पर 2.18 लाख से अधिक बीएलओ (BLO) की टीम मौजूद है जो मतदाताओं की सहायता के लिए फोन कॉल और 'बुक-ए-कॉल' जैसी आधुनिक सुविधाएं प्रदान कर रही है.
ECINet पर कर सकते हैं शिकायत
वहीं, मतदाताओं की समस्याओं और शिकायतों के तुरंत समाधान के लिए निर्वाचन आयोग ने तकनीक का सहारा लिया है. ECINet ऐप कॉल सेंटर नंबर +91 (एसटीडी कोड) 1950 के लिए भी उपलब्ध है. मतदाता सीधे DEO या RO स्तर पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. आयोग ने ये सुनिश्चित किया है कि मतदाता बिना किसी डर या पक्षपात के अपना वोट डाल सकें. चुनावी ड्यूटी पर तैनात सभी कर्मियों को इस दौरान आयोग की प्रतिनियुक्ति पर माना जाएगा.
वहीं, चुनाव की शुचिता बनाए रखने के लिए 832 निर्वाचन क्षेत्रों में 1,111 केंद्रीय पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं. इनमें 557 सामान्य पर्यवेक्षक, 188 पुलिस पर्यवेक्षक और 366 व्यय पर्यवेक्षक शामिल हैं. ये पर्यवेक्षक आयोग के 'आंख और कान' के रूप में कार्य करेंगे और अधिकांश ने अपने निर्धारित क्षेत्रों में मोर्चा संभाल लिया है. वो प्रतिदिन एक निश्चित वक्त पर उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और जनता से मिलकर उनकी शिकायतें सुनेंगे. पर्यवेक्षकों के संपर्क विवरण भी जनता के साथ साझा किए जाएंगे, ताकि पारदर्शिता बनी रहे.