दिल्ली दंगों के दौरान आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-03, उत्तर-पूर्व जिला की अदालत ने 320 पन्नों के फैसले में पूर्व पार्षद मोहम्मद ताहिर हुसैन समेत कई आरोपियों को हत्या, दंगा और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर मामलों में दोषी ठहराया है. सजा पर फैसला अलग से सुनाया जाएगा.
क्या है पूरा मामला?
25 फरवरी 2020 को दिल्ली दंगों के दौरान आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा अपने घर से कुछ सामान लेने निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे. अगले दिन उनका शव चांद बाग नाले से बरामद हुआ. पोस्टमॉर्टम में शरीर पर धारदार हथियारों से किए गए कई घाव मिले. इसके बाद दयालपुर थाने में एफआईआर दर्ज कर विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले की जांच शुरू की.
जांच में क्या मिला?
एसआईटी के मुताबिक, ताहिर हुसैन की इमारत से बड़ी मात्रा में पत्थर, ईंटें, पेट्रोल बम, एसिड से भरी बोतलें, गुलेल और अन्य सामान बरामद किया गया. जांच एजेंसी ने घटनास्थल और नाले से फोरेंसिक साक्ष्य जुटाए. मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, वीडियो फुटेज और एफएसएल रिपोर्ट का भी विश्लेषण किया गया. एक वीडियो को भी साक्ष्य बनाया गया, जिसमें कथित तौर पर कुछ लोग शव को नाले में फेंकते दिखाई देते हैं. मामले में अभियोजन ने कुल 91 गवाहों के बयान अदालत में पेश किए.
अभियोजन ने क्या कहा?
सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि 25 फरवरी 2020 को चांद बाग पुलिया पर हिंसक भीड़ एक साझा उद्देश्य के साथ जुटी थी. अभियोजन के अनुसार, ताहिर हुसैन भीड़ को उकसा रहे थे और बार-बार अपनी इमारत तथा घटनास्थल के बीच आते-जाते देखे गए. कई प्रत्यक्षदर्शियों ने अलग-अलग आरोपियों की पहचान अंकित शर्मा पर हमला करने वालों के रूप में की. दो आरोपियों से बरामद चाकुओं को मेडिकल साक्ष्यों से जोड़ा गया. इसके अलावा फोन कॉल, वॉयस सैंपल और एफएसएल रिपोर्ट को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया गया.
बचाव पक्ष की क्या रही दलील?
बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि एफआईआर में देरी हुई और बाद में तैयार कर ताहिर हुसैन को झूठा फंसाया गया. जांच को पक्षपातपूर्ण बताया गया और कहा गया कि कई महत्वपूर्ण पुलिस गवाहों को अदालत में पेश नहीं किया गया. यह भी दलील दी गई कि कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने अदालत में ताहिर हुसैन की पहचान नहीं की या अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया.
कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने गवाहों, फोरेंसिक रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों का विस्तृत विश्लेषण करने के बाद कहा कि अभियोजन कई आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल रहा.
फैसले में अदालत ने माना कि बचाव पक्ष का एफआईआर में हेरफेर और झूठा फंसाने का दावा स्वीकार करने योग्य नहीं है. अदालत ने यह भी कहा कि दो पुलिस गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाए जाने के कारण उन पर भरोसा नहीं किया गया, लेकिन एक स्थानीय गवाह के मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज धारा 164 सीआरपीसी के बयान को विश्वसनीय माना गया.
हालांकि वह बाद में अदालत में आंशिक रूप से अपने बयान से मुकर गया था, लेकिन उसने स्वीकार किया कि मजिस्ट्रेट के सामने दिया गया उसका बयान सही था.
अब आगे क्या होगा
कोर्ट ने मोहम्मद ताहिर हुसैन को अंकित शर्मा की हत्या, हत्या की साजिश और उससे जुड़े अन्य अपराधों में दोषी ठहराया. इसके अलावा कई अन्य सह-आरोपियों को भी हत्या, दंगा और आपराधिक साजिश सहित विभिन्न धाराओं में दोषी करार दिया गया. अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी दोषियों की सजा पर अलग से सुनवाई होगी, जिसके बाद सजा का आदेश पारित किया जाएगा.