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हाथों में दस्ताने, कंधों पर कचरे के बोरे... दिल्ली की मुनक नहर चमकाने निकले युवा

दिल्ली की मुनक नहर को साफ करने के लिए युवाओं की एक टीम मैदान में उतर चुकी है. हाथों में दस्ताने, कंधों पर कचरे से भरे बोरे लिए युवा नहर को कचरा मुक्त बनाने में लगे हैं.

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करीब 3 किलोमीटर के हिस्से में टीम सफाई अभियान चला चुकी है. (Photo: ITG)
करीब 3 किलोमीटर के हिस्से में टीम सफाई अभियान चला चुकी है. (Photo: ITG)

दिल्ली की मुनक नहर एक ऐसी नहर है, जो लंबे वक्त से कचरे और गंदगी की वजह से चर्चा में रही है. इसी नहर को साफ करने की जिम्मेदारी एक युवक ने अपने हाथों में ली है. नाम है विनय दास, जो पिछले कई सालों से बच्चों और युवाओं की टीम के साथ मुनक नहर की सफाई में जुटे हैं.

मुनक नहर में कहीं प्लास्टिक का कचरा, कहीं पूजा सामग्री, तो कहीं नहर के किनारे मलबा जमा है. इसी गंदगी के बीच विनय दास की टीम पहुंचती है. जिनके हाथों में दस्ताने, कंधों पर कचरे से भरे बोरे और मकसद सिर्फ मुनक नहर को साफ करना है. इस मुहिम की शुरुआत तब हुई, जब विनय ने यहां बड़ी संख्या में देवी-देवताओं की मूर्तियों का विसर्जन होते देखा. विनय कहते हैं कि यह देखकर उनका मन बहुत परेशान हुआ और वहीं से इस मिशन की शुरुआत हुई.

सफाई का ये काम सिर्फ किनारे से कचरा उठाने तक सीमित नहीं है. टीम नहर के आसपास जमा प्लास्टिक, पूजा सामग्री, मलबे और दूसरे कचरे को निकालती है. करीब 3 किलोमीटर के हिस्से में टीम सफाई अभियान चला चुकी है.

विनय दास की इस मुहिम की शुरुआत एक साल पहले हुई थी. शुरुआत में करीब 150 बच्चे उनके साथ जुड़े थे. आज इस अभियान से 1600 से ज्यादा बच्चे और युवा जुड़ चुके हैं, जिनमें करीब 350 एक्टिव वॉलंटियर्स हैं. ये वॉलंटियर्स अलग-अलग ग्रुप में काम करते हैं और मुनक नहर के किनारे सफाई अभियान चलाते हैं.

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विनय अब तक 2500 से ज्यादा मूर्तियां मुनक नहर से निकाल चुके हैं. हाल ही में गणेश विसर्जन के बाद भी विनय और उनकी टीम ने कई मूर्तियां मुनक नहर से निकालीं.

मुनक नहर की सफाई के दौरान टीम को कई बार ऐसी चीजें भी मिलीं, जिन्हें देखकर लोग हैरान रह गए. हाल ही के एक अभियान में कचरे के बीच करीब 30 से 35 किलो का शिवलिंग मिला. इसके अलावा, सैकड़ों धार्मिक मूर्तियां और पूजा सामग्री भी नहर से निकाली गई.

विनय खुद भी एक बेहद साधारण परिवार से आते हैं. उनके पिता एक प्यून थे. विनय का बचपन जेजे कॉलोनी में बीता है. विनय बताते हैं कि पढ़ाई करने के लिए उन्होंने 7 साल की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था.

वहीं, इस सफाई अभियान में जोखिम भी कम नहीं है. कचरे के बीच कांच, सुई और दूसरे खतरनाक सामान तक मिल जाते हैं. कई बार सफाई के दौरान विनय और उनकी टीम को चोटें भी लगीं.

एक बार कचरे से भरे बोरे से निकले केमिकल की वजह से विनय के हाथों में छाले तक पड़ गए. बावजूद इसके, विनय की ये मुहिम रुकी नहीं.

विनय की मुहिम के बाद अब एक तरफ मुनक नहर की सफाई के लिए सरकारी स्तर पर भी काम चल रहा है. विनय कहते हैं कि उम्मीद है कि इस बार लोग साफ-सुथरी मुनक नहर में छठ पूजा मनाएंगे.

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