दिल्ली के प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब ने केंद्र सरकार के परिसर खाली करने के आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में कई गंभीर आरोप लगाए हैं. क्लब ने अपनी याचिका में कहा है कि केंद्र सरकार का आदेश मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और संविधान के खिलाफ है.
क्लब ने अदालत में कहा कि केंद्र सरकार ने परिसर अपने कब्जे में लेने के लिए 'रक्षा बुनियादी ढांचे', 'सार्वजनिक सुरक्षा' और 'गवर्नेंस इंफ्रास्ट्रक्चर' जैसे बेहद सामान्य और अस्पष्ट कारण बताए हैं. याचिका में कहा गया है कि सरकार ने इन दावों के समर्थन में कोई ठोस विवरण या दस्तावेज पेश नहीं किया. क्लब के मुताबिक यह कार्रवाई केवल दिखावटी और औपचारिक आधार पर की गई है.
'न तो शिफ्टिंग की बात न मुआवजा'
याचिका में यह भी कहा गया है कि सरकार ने संपत्ति, प्रीमियम राशि, भवनों और परिसर में मौजूद अन्य ढांचों के नुकसान के बदले किसी प्रकार के मुआवजे का प्रावधान नहीं किया है. क्लब का दावा है कि दशकों में इस परिसर के विकास और रखरखाव पर भारी निवेश किया गया है, लेकिन सरकार ने अधिग्रहण से पहले किसी मुआवजे या पुनर्वास की बात नहीं की.
क्लब ने अपनी याचिका में संविधान के आर्टिकल 300A का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति या संस्था को कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता. क्लब ने दावा किया कि केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने खुद 18 दिसंबर 2009 के एक पत्र में स्वीकार किया था कि क्लब के 'मालिकाना अधिकार और टाइटल बहाल' हैं. ऐसे में सरकार अब बिना अधिग्रहण प्रक्रिया और कानूनी सुरक्षा उपायों के क्लब के अधिकार समाप्त नहीं कर सकती.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण और 'कलरेबल एक्सरसाइज ऑफ पावर' है. क्लब के अनुसार पिछले कुछ वर्षों से सरकार संस्था पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रही थी और यह कदम उसी श्रृंखला का हिस्सा है. क्लब ने दावा किया कि इससे पहले भी संस्था के प्रबंधन पर कब्जा करने के प्रयास किए गए थे.
क्लब ने अदालत को यह भी बताया कि सरकार प्रशासनिक आदेश, पुलिस शक्ति और कार्यपालिका के दबाव के जरिए जबरन बेदखली की कोशिश कर रही है, जबकि कानून के तहत निर्धारित उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. याचिका में कहा गया कि यह कदम “फोर्स्ड एविक्शन” यानी जबरन निष्कासन की श्रेणी में आता है. क्लब ने हाईकोर्ट से केंद्र सरकार के आदेश पर रोक लगाने और मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में 26 मई को होनी है.
L&DO ने क्लब को दिया है नोटिस
केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने क्लब को नोटिस जारी कर परिसर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. सरकार ने कहा है कि रक्षा और सुरक्षा से जुड़े सार्वजनिक उद्देश्य के लिए इस जमीन की जरूरत है. क्लब प्रबंधन ने इस फैसले को अदालत में चुनौती देने की बात कही है.
क्लब के वरिष्ठ सदस्य मेजर अतुल देव का दावा है कि यह जमीन मूल रूप से क्लब ने खरीदी थी, लेकिन सरकार ने मालिकाना हस्तांतरण की जगह ‘परपेचुअल लीज’ दी थी. उनका कहना है कि क्लब नियमित रूप से लीज राशि देता रहा है और वह अदालत से स्टे की मांग करेंगे.
पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद ने इसे दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहर बताया. वहीं शहरी मामलों की विशेषज्ञ वंदिनी मेहता ने इस पूरे घटनाक्रम को विडंबना बताया. उनके मुताबिक, एक लोकतांत्रिक भारत आज उसी औपनिवेशिक लीज व्यवस्था का इस्तेमाल कर रहा है, जिसे अंग्रेजों ने जमीन पर अंतिम नियंत्रण बनाए रखने के लिए बनाया था.
केंद्र सरकार के लेटर में क्या-क्या लिखा है?
दिल्ली जिमखाना क्लब ने केंद्र सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि क्लब और उसकी गतिविधियों में किसी तरह का “विस्थापन” न हो. साथ ही क्लब ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि अगर उसे मौजूदा परिसर खाली करना पड़े, तो क्या उसे दूसरी जगह ट्रांसफर किया जाएगा या क्या कोई वैकल्पिक जमीन आवंटित की जाएगी.
क्लब ने क्या दिया है जवाब
क्लब ने केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) को लिखे पत्र में कहा है कि अचानक की गई कार्रवाई से हजारों सदस्य, कर्मचारी और अन्य हितधारक प्रभावित हो सकते हैं. 23 मई को भेजे गए इस पत्र में क्लब ने अनुरोध किया कि जब तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्टता नहीं आ जाती, तब तक ऐसी कोई कार्रवाई न की जाए जिससे संस्था के संचालन पर असर पड़े. क्लब ने पूछा है कि क्या उसे दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा और क्या उसके लिए वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराई जाएगी.
यह पत्र केंद्र सरकार के उस आदेश के एक दिन बाद भेजा गया, जिसमें भूमि एवं विकास कार्यालय ने दिल्ली जिमखाना क्लब परिसर को वापस लेने और पुनः अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी. 22 मई के आदेश में सरकार ने कहा था कि यह जमीन मूल रूप से ‘इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड’ को सामाजिक और खेल गतिविधियों के संचालन के लिए लीज पर दी गई थी.
सरकार का क्या कहना है?
सरकार का कहना है कि यह परिसर राष्ट्रीय राजधानी के “अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र” में स्थित है और रक्षा ढांचे को मजबूत करने तथा सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े उद्देश्यों के लिए इसकी जरूरत है.
सरकार ने अपने आदेश में कहा कि यह जमीन “तत्काल संस्थागत जरूरतों, प्रशासनिक बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक हित परियोजनाओं” के लिए जरूरी है, जो आसपास की सरकारी जमीनों से जुड़ी हैं. परपेचुअल लीज डीड की धारा 4 का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि वह सार्वजनिक हित में इस संपत्ति पर दोबारा कब्जा लेने और लीज समाप्त करने का अधिकार इस्तेमाल कर रही है.
आदेश लागू होता है तो क्या असर होगा?
आदेश के मुताबिक 27.3 एकड़ का पूरा परिसर, जिसमें सभी भवन, लॉन, ढांचे और फिटिंग्स शामिल हैं, भूमि एवं विकास कार्यालय के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति के अधिकार में चला जाएगा.
क्लब को निर्देश दिया गया है कि वह 5 जून 2026 तक परिसर का शांतिपूर्ण कब्जा सरकार को सौंप दे, अन्यथा कानून के अनुसार कार्रवाई कर कब्जा लिया जाएगा. अपने जवाब में क्लब ने कहा कि भूमि एवं विकास कार्यालय के साथ लीज किराया बढ़ाने को लेकर पहले से बातचीत चल रही है और बढ़े हुए लीज रेंट को चुनौती देने वाली याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है.
क्लब को कितना मुनाफा-कितना घाटा
क्लब ने यह भी बताया कि वर्तमान में उसका संचालन राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के 2022 के आदेश के तहत कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा नियुक्त जनरल कमेटी कर रही है. यह व्यवस्था तब तक के लिए है जब तक निर्वाचित समिति कार्यभार नहीं संभाल लेती. क्लब ने अपनी वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उसके संचालन में काफी सुधार हुआ है. क्लब के मुताबिक 2023-24 में अनुमानित लाभ 925.10 लाख रुपये रहा, जबकि 2021-22 में उसे 1,239.26 लाख रुपये का घाटा हुआ था.
क्या क्लब को कहीं शिफ्ट किया जाएगा?
पत्र में कहा गया कि यह संस्था करीब 14 हजार सदस्यों और उपयोगकर्ताओं को सेवाएं देती है और यहां 500 से अधिक लोग कार्यरत हैं. क्लब ने यह भी कहा कि दशकों में खेल सुविधाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक व्यवस्था पर भारी निवेश किया गया है. जनरल कमेटी ने मंत्रालय से अनुरोध किया है कि यदि क्लब को स्थानांतरित करने की योजना है तो उसे वैकल्पिक जमीन आवंटित की जाए.
साथ ही अधिकारियों के साथ जल्द बैठक बुलाने की मांग की गई है ताकि सदस्यों, कर्मचारियों और अन्य हितधारकों की चिंताओं पर चर्चा की जा सके. क्लब ने दोहराया कि जब तक सभी मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता, तब तक उसकी गतिविधियों और संचालन में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आना चाहिए.