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बीते वर्षों में 30% तक बढ़ गया दिल्ली वालों का बिजली बिल, समझिए कैसे

दिल्ली में 1 जुलाई से बिजली 10 फीसदी महंगी हो जाएगी. दिल्ली में ये बढ़ोतरी पिछले 3 सालों से लगातार हो रही है, जो कि अलग-अलग डिस्कॉम के लिए अलग-अलग है बिजली की बेसिक दर आम तौर पर डीईआरसी जैसे विनिमायक आयोग सालाना तय करते हैं. इस 10 फीसदी के रेट बढ़ने से आप पर कितना और क्या असर पड़ेगा, जानिए यहां.

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दिल्ली में बीते तीन सालों होती गई बिजली बिल में बढ़ोतरी (फाइल फोटो)
दिल्ली में बीते तीन सालों होती गई बिजली बिल में बढ़ोतरी (फाइल फोटो)

दिल्ली में अलग-अलग पावर डिस्कॉम के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी की घोषणा की गई है. इस आदेश के बाद 1 जुलाई से बिजली 10 फीसदी तक महंगी हो जाएगी. पिछले कुछ सालों से दिल्ली में पावर पर्चेज एग्रीमेंट कॉस्ट (पीपीएसी) के बहाने लगातार बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है. यानि दिल्ली में जो बिजली की तय दर है उसके ऊपर सरचार्ज लगाकर दिल्ली वालों से 31 फीसदी तक ज्यादा कीमत वसूली जा रही है. 

पिछले 3 सालों से जारी है बढ़ोतरी
दरअसल ये बढ़ोतरी पिछले 3 सालों से लगातार हो रही है, जो कि अलग-अलग डिस्कॉम के लिए अलग-अलग है. सबसे ज्यादा कीमत बीएसईएस यमुना इलाके में उपभोक्ता दे रहें हैं जो पूर्वी दिल्ली और पुरानी दिल्ली में बिजली की सप्लाई करता है. दूसरे नंबर पर सरकारी एनडीएमसी यानि नई दिल्ली इलाका है, जहां तय दर के ऊपर 30 फीसदी पीपीएसी सरचार्ज तीन साल में बढ़ा दिया गया है. तीसरे नंबर पर टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) है, जहां 29.13 फीसदी पीपीएसी सरचार्ज उपभोक्ताओं से लिया जा रहा है. बीएसईएस राजधानी जो कि दक्षिण दिल्ली और पश्चिम दिल्ली में बिजली की आपूर्ति करती है वहां सरचार्ज सबसे कम 27.08 फीसदी है.

क्या है पावर पर्चेज एग्रीमेंट कॉस्ट 
दरअसल प्राइवेट डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां बिजली जेनेरेशन कंपनियों से खरीदती हैं और फिर उसकी सप्लाई उपभोक्ताओं को करती हैं. ये खरीददारी एक सतत प्रक्रिया है और कई सारे फैक्टर पर निर्भर करती है. इसमें कोयला और गैस जैसे ईंधनों की कीमत शामिल हैं. बीएसईएस और टीपीडीडीएल जैसे डिस्कॉम का दावा है कि उसके खर्च का कुल 80 फीसदी सिर्फ एनटीपीसी जैसी जेनेरेशन कंपनियों से बिजली खरीदने में जाता है. बिजली की बेसिक दर आम तौर पर डीईआरसी जैसे विनिमायक आयोग सालाना तय करते हैं, लेकिन जब बिजली कंपनियों ने ये कहा कि महंगी बिजली खरीद कर साल भर इंतजार करने से उनकी देनदारी काफी बढ़ जाती है तब साल 2017 में डीईआरसी ने तय किया कि कंपनियों को हर तीन महीने में खरीदी गई बिजली की कीमत के आधार पर पीपीएसी दिया जाएगा. यानि बिजली खरीद की कीमत बढ़ती है तो पीपीएसी बढ़ेगा और अगर घटती है तो पीपीएसी घटा दिया जाएगा.

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आखिरकार कितना बढ़ जाएगा हर महीने का बिजली बिल
दिल्ली में पहले दो सौ यूनिट पर प्रति यूनिट 3 रुपये की दर से बिजली मिलती है, लेकिन उस पर दिल्ली सरकार पूरी सब्सिडी देती है. इसलिए वैसे उपभोक्ता जो 200 यूनिट के अंदर बिजली खर्च कर रहे हैं उनपर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन 201 से लेकर 400 यूनिट तक खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को 50 फीसदी बिल चुकाना पड़ता है, जिसमें बिजली की दर 4.50 रुपये है, इसलिए अगर कोई 400 यूनिट बिजली एक महीने में खर्च करता है तो उसे 10 फीसदी बढ़ोतरी के हिसाब से लगभग 75 रुपए ज्यादा देना होगा. पिछले तीन सालों में लगभग 30% के हिसाब से बिजली बिल में पीपीएसी के नाम पर 400 यूनिट वालों को लगभग सवा दो सौ रुपये ज्यादा ढीले करने होंगे. जैसे ही बिजली का खर्च 400 यूनिट से ऊपर बढ़ेगा तो उपभोक्ता को सब्सिडी का कोई फायदा नहीं मिलेगा. 

ये है यूनिट के हिसाब से बिजली दर
400 से 800 यूनिट के लिए तय बिजली दर 6.50 रुपये है. इसलिए अगर किसी के घर में 800 यूनिट बिजली की खपत होगी तो उन्हें 10% बढ़ोतरी के हिसाब से 1 जुलाई से प्रति महीने 410 रुपये ज्यादा देने होंगे जबकि पिछले तीन सालों में लगभग 30% के हिसाब से अतिरिक्त बोझ तकरीबन 1230 रुपए प्रति महीने बढ़ गया है. इसी तरीके से दिल्ली में बिजली की घरेलू कीमत 8 रुपए प्रति यूनिट तक जाती है. इस हिसाब से ज्यादा बिजली खर्च करने वालों के लिए इस बढ़ोतरी का दर्द उतना ही ज्यादा होगा.

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