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'क्या यह कोर्ट का काम है?' गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार किया. कोर्ट ने याचिका पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा - कि क्या ये तय करना कोर्ट का काम है? साथ ही कोर्ट ने पूछा कि इसमें किसके मूल अधिकारों का हनन हो रहा है, जो आर्टिकल 32 के तहत याचिका दाखिल की गई है?

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

देश के सर्वोच्च न्यायालय ने गाय से जुड़े एक मामले में याचिकाकर्ता को फटकार लगाई है. दरअसल कोर्ट में याचिका लगाई गई थी कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से ही इनकार कर दिया है. 

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि क्या ये तय करना कोर्ट का काम है? सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय किशन कौल ने याचिकाकर्ता से पूछा कि इसमें किसके मूल अधिकारों का हनन हो रहा है, जो यह याचिका आर्टिकल 32 के तहत दाखिल की गई है.

क्या है आर्टिकल 32?

सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली है. बता दें कि आर्टिकल 32 संवैधानिक उपचारों का अधिकार है. आर्टिकल 32 एक मौलिक अधिकार है, जो भारत के प्रत्येक नागरिक को संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त अन्य मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर करने का अधिकार देता है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने की थी ये टिप्पणी

उल्लेखनीय है कि पिछली साल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाय संरक्षण की बात करते हुए कहा था कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि गाय हमारी संस्कृति का आधार है. दरअसल, कोर्ट ने यह टिप्पणी एक मुकदमे से जुड़े मामले में कही थी. एक शख्स को गोकशी के आरोप में यूपी के संभल जिले से गिरफ्तार किया गया था. आरोपी की याचिका खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये बा कही थी.

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