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जज ने वकील को हिरासत में भेजने का दिया निर्देश तो मचा बवाल, SC ने लिया संज्ञान

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील को 24 घंटे की न्यायिक हिरासत में भेजने के मौखिक निर्देश पर उठा विवाद अब तूल पकड़ चुका है. जज और वकील के बीच तीखी बहस का वीडियो वायरल होने के बाद वकीलों के बीच नाराजगी बढ़ी है.

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भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत. (Photo: ITG/GFX)
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत. (Photo: ITG/GFX)

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान वकील को न्यायिक हिरासत में भेजने के मौखिक निर्देश को लेकर उठे विवाद ने अब सुप्रीम कोर्ट का ध्यान खींच लिया है. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इस पूरे मामले पर आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. यह मामला 4 मई को न्यायमूर्ति तरलादा राजशेखर राव की अदालत में लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी करने और पासपोर्ट जब्त करने को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया.

सुनवाई के दौरान जज और याचिकाकर्ता के वकील के बीच तीखी बहस हो गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. वीडियो में दिख रहा है कि जज ने वकील के आचरण पर नाराजगी जताते हुए कहा, 'क्या मैंने आपकी रिट याचिका को खारिज करने का फैसला किया है? क्या आप सोच रहे हैं कि आप एक महान वरिष्ठ वकील हैं?' इसी बहस के दौरान अदालत ने पुलिस को बुलाने और वकील को 24 घंटे की हिरासत में लेने का मौखिक निर्देश दिया.

हालांकि, वकील ने अदालत में बार-बार माफी मांगी और खुद को असहज स्थिति में पाया. अदालत ने अपने आदेश में वकील के व्यवहार को अशिष्ट बताया और उसे न्यायिक रजिस्ट्रार के सामने पेश होने को कहा. लेकिन यह निर्देश लागू नहीं हो सका. जानकारी के मुताबिक, हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ और वकील को हिरासत में नहीं लिया गया. इसके बाद सुनवाई स्थगित कर दी गई. इस घटना के बाद वकीलों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली. वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने जज के इस व्यवहार को अस्वीकार्य बताया.

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सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील करुणा नंदी ने सवाल उठाया कि क्या किसी वकील को इस तरह गिरफ्तार किया जा सकता है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वकील और भाजपा प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा कि न्यायाधीश होने का मतलब यह नहीं कि किसी के साथ दुर्व्यवहार किया जाए. विवाद बढ़ने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया है. सीजेआई सूर्यकांत ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट प्रशासन से बुधवार शाम तक पूरी घटना की रिपोर्ट मांगी है.

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