अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जांच अब ऐसे चरण में पहुंच गई है, जहां पुलिस का मानना है कि कई अहम तथ्यों का खुलासा केवल दस्तावेजों से नहीं, बल्कि आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने से हो सकता है. इसी उद्देश्य से अयोध्या पुलिस ने जेल में बंद अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय को रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ शुरू की है.
5 जून को खुल गई था चढ़ावा चोरी की बात
उधर, यह माना जा रहा था कि ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार होने के बाद विवाद धीरे-धीरे शांत हो जाएगा. कुछ समय के लिए माहौल सामान्य होता भी दिखा, लेकिन बैठक में हुई चर्चाओं ने एक बार फिर कई नए सवाल खड़े कर दिए. खास तौर पर इस बात पर चर्चा हुई कि कथित चोरी का पता पहले चलने के बावजूद तत्काल कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई.
आरोप है कि तत्कालीन महासचिव चंपत राय को 5 जून को ही चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जानकारी मिल गई थी. बताया जाता है कि पुलिस की मदद से कथित रूप से चोरी की गई रकम भी बरामद कर ली गई थी, लेकिन इसके बावजूद उस समय एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई. अब इसी पहलू को पूरे विवाद की सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है.
चोरी की रकम बरामद हुई फिर क्यों नहीं कराई FIR?
बाद में 7 जून को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा मामला सार्वजनिक किए जाने के बाद यह मुद्दा व्यापक चर्चा का विषय बन गया. ट्रस्ट की बैठक में भी इस बात का उल्लेख किया गया कि यदि शुरुआती स्तर पर ही मुकदमा दर्ज करा दिया जाता तो विवाद इतना नहीं बढ़ता और समय रहते कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सकती थी.
राम मंदिर निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद चंपत राय की राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावशाली छवि बनी थी, लेकिन हालिया घटनाक्रम के बाद उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं.
ट्रस्ट पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा
बैठक में ट्रस्ट पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई. सदस्यों ने कहा कि चढ़ावे की सुरक्षा और उसकी गणना की निगरानी ट्रस्ट की जिम्मेदारी थी. इसके साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि चंपत राय ने कथित तलाशी और बरामदगी किस अधिकार के तहत कराई और बरामदगी के बाद तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज क्यों नहीं कराई गई.
बैठक में यह भी कहा गया कि यदि जांच के दौरान यह सामने आता है कि ट्रस्ट के किसी पदाधिकारी ने अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं किया, तो उनके खिलाफ भी आपराधिक जिम्मेदारी तय किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.