लद्दाख के सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने विस्तार से अपना पक्ष रखा. याचिका सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने दाखिल की है, जिसमें उन्होंने अपने पति के स्वास्थ्य का हवाला देकर उनकी जमानत की मांग की थी. सरकार ने अदालत को बताया कि स्वास्थ्य कारणों के आधार पर सोनम वांगचुक को रिहा करना संभव नहीं है.
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कहा कि सोनम वांगचुक की अब तक समय-समय पर कुल 24 बार मेडिकल जांच कराई गई है और वह पूरी तरह फिट व तंदुरुस्त हैं. उन्होंने बताया कि वांगचुक को पाचन संबंधी कुछ समस्या जरूर थी, जिसका इलाज चल रहा है और फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है. एसजी ने स्पष्ट किया कि केवल स्वास्थ्य के आधार पर रिहाई की अनुमति नहीं दी जा सकती और सरकार ने इस पहलू पर गंभीरता से विचार किया है.
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सोनम वांगचुक की बढ़ती उम्र और कथित खराब सेहत को देखते हुए हिरासत के फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था. इस मामले में वांगचुक की रिहाई की मांग वाली याचिका पर सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी. लद्दाख प्रशासन की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एम. नटराजन ने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक ने यह बयान दिया था कि वह सेना के साथ सहयोग नहीं करेंगे, जो किसी भी नागरिक के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता.
वांगचुक ने भाषण देकर लोगों को उकसाया
उन्होंने कहा कि वांगचुक ने अपने भाषणों में जनमत संग्रह का जिक्र किया और 8 जून 2025 को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल या आत्मदाह की बात कही, जो लोगों को हिंसक गतिविधियों के लिए उकसाने जैसा है. एएसजी ने यह भी दलील दी कि लद्दाख एक सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्र है, जहां सोनम वांगचुक ने हालात की तुलना पाकिस्तान और चीन से की. उन्होंने कथित तौर पर अपने विदेशी संपर्कों और प्रभाव का इस्तेमाल करने की चेतावनी दी.
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वांगचुक के बयानों से लद्दाख में हालात बिगड़े
लद्दाख प्रशासन के अनुसार, उनके वीडियो, बयानों और भूख हड़ताल के आह्वान से हालात बिगड़े, जिसमें चार लोगों की मौत हुई और 160 लोग घायल हुए, जबकि कई इमारतों में आगजनी हुई. नटराजन ने कहा कि जैसे ही सोनम वांगचुक को प्रिवेंटिव कस्टडी में लिया गया, स्थिति नियंत्रण में आ गई. सरकार ने दलील दी कि इस मामले में कानून का पूरी तरह पालन किया गया है और सोनम वांगचुक की संवैधानिक गारंटियों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है और इसलिए उनके मामले में न्यायिक समीक्षा का दायरा सीमित है.