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यौन उत्पीड़न या दुष्कर्म ...अब इन मामलों में 24 हफ्ते तक गर्भपात की होगी छूट, नियम लागू

नए नियमों में मानसिक रूप से बीमार महिलाओं और भ्रूण विकृति के मामलों को भी शामिल किया गया है. इतना ही नहीं सरकार की ओर से कहा गया है कि इस तरह के मामलों में महिलाओं के लिए जोखिम बहुत होता है. इतना ही नहीं अगर इस तरह के मामलों में बच्चा पैदा होता भी है, तो वह शारीरिक या मानसिक तौर पर असामान्यताओं से पीड़ित हो सकता है.

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सरकार ने नए नियम के लिए अधिसूचना की जारी
  • मार्च में संसद में पारित हुआ था मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (संशोधन) अधिनियम

सरकार के नए नियमों के मुताबिक, देश में कुछ खास मामलों में महिलाओं के लिए गर्भपात की सीमा 20 से बढ़ाकर 24 हफ्ते कर दी गई है. सरकार ने नए नियम के लिए अधिसूचना जारी कर दी है. मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (संशोधन) नियम, 2021 के तहत यौन उत्पीड़न या दुष्कर्म की शिकार महिलाओं, ऐसी नाबालिगों और महिलाओं जिनकी गर्भावस्था के दौरान वैवाहिक स्थिति (विधवा या तलाक) बदल गई हो या दिव्यांग महिलाओं के मामले में ये नियम लागू होंगे. 

नए नियमों में मानसिक रूप से बीमार महिलाओं और भ्रूण विकृति के मामलों को भी शामिल किया गया है. इतना ही नहीं सरकार की ओर से कहा गया है कि इस तरह के मामलों में महिलाओं के लिए जोखिम बहुत होता है. इतना ही नहीं अगर इस तरह के मामलों में बच्चा पैदा होता भी है, तो वह शारीरिक या मानसिक तौर पर असामान्यताओं से पीड़ित हो सकता है. 

मार्च में पारित हुआ था अधिनियम

गर्भपात से जुड़े ये नए नियम मार्च में संसद द्वारा पारित मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (संशोधन) अधिनियम, 2021 के तहत हैं. इससे पहले गर्भाधान के 12 सप्ताह के भीतर गर्भपात कराने के लिए एक डॉक्टर और 12 से 20 सप्ताह के भीतर गर्भपात के लिए दो डॉक्टरों की सिफारिश की आवश्यकता होती थी. लेकिन नए नियम के मुताबिक, राज्य-स्तरीय मेडिकल बोर्ड बनाए जाएंगे, जो यह तय करेंगे कि भ्रूण की विकृति के मामलों में जहां जीवन, शारीरिक या मानसिक असामान्यताओं या बाधाओं के साथ असंगति का पर्याप्त जोखिम है, 24 सप्ताह के बाद भी गर्भपात किया जा सकेगा. 

मेडिकल बोर्ड को महिला और उसकी रिपोर्ट की जांच करनी होगी और फिर अपील के तीन के अंदर फैसला लेना होगा कि महिला के गर्भपात की अपील को स्वीकार किया जाए या ठुकराया जाए. बोर्ड को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनकी सिफारिश पर गर्भपात प्रक्रिया सभी सावधानियों के साथ की जाए. बोर्ड को उसी के लिए अनुरोध प्राप्त होने के पांच दिनों के भीतर प्रक्रिया को पूरा करना होगा. ़


 

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