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बेलडांगा हिंसा पर 'सुप्रीम' सुनवाई, NIA को अदालत ने दिया ये निर्देश

प्रवासी मजदूर अलाउद्दीन शेख की मौत के बाद 16 जनवरी को पश्चिम बंगाल के बेलडांगा में हिंसा भड़क उठी थी. गुस्साए लोगों ने दावा किया कि बांग्लाभाषी होने के कारण अलाउद्दीन को बांग्लादेशी समझकर हत्या की गई.

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सुप्रीम कोर्ट (File Photo)
सुप्रीम कोर्ट (File Photo)

पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा कस्बे में हुई हिंसा की NIA जांच के खिलाफ दाखिल पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने वापस कलकत्ता हाई कोर्ट भेज दिया है. उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि राज्य सरकार के सवालों पर हाई कोर्ट फिर से विचार करे.

सुप्रीम कोर्ट ने NIA से कहा कि वो अपनी जांच रिपोर्ट कलकत्ता हाई कोर्ट में सीलबंद कर दाखिल करे. अदालत ने निर्देश दिया है कि पश्चिम बंगाल की अर्जी पर हाई कोर्ट चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली खंडपीठ सुनवाई करेगी. उनके सामने ही पिछली अर्जी पर सुनवाई लंबित है.

केंद्र सरकार की तरफ से ASG एसवी राजू ने कहा कि बांग्लादेश के पास पोरस बॉर्डर (संवेदनशील इलाका) है, जहां हिंसा हुई. इस दौरान घातक हथियारों का इस्तेमाल किया गया. पूरी घटना की जांच NIA कर रही है. राज्य सरकार NIA को जांच के पेपर्स नहीं दे रही हैं. राज्य सरकार को अदालत आदेश दे कि वे कागजात मुहैया कराए.

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि राज्य सरकार ने उस आदेश को चुनौती दी है जो NIA को जांच करने का विकल्प देता है. NIA का इस्तेमाल करने का सही होना हाई कोर्ट पर निर्भर करता है.

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इस मामले में पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुवेंदु अधिकारी की याचिका पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि यदि केंद्र सरकार चाहे तो बेलडांगा हिंसा की जांच एनआईए को दी जा सकती है. इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी एनआईए को सौंप दी थी.

बता दें कि झारखंड में मुर्शिदाबाद के प्रवासी मजदूर अलाउद्दीन शेख की मौत के बाद 16 जनवरी को बेलडांगा में हिंसा भड़क उठी थी. शव के पहुंचते ही लोगों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया. गुस्साए लोगों ने दावा किया कि बांग्लाभाषी होने के कारण अलाउद्दीन को बांग्लादेशी समझकर हत्या की गई.

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