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बांग्लादेशी नागरिकों की निर्वासन प्रक्रिया पर सस्पेंस, MHA ने RTI को 'अस्पष्ट' बताया

देश में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई तेज है, लेकिन भारत से निर्वासन की प्रक्रिया क्या है, इस पर अब भी साफ तस्वीर सामने नहीं आई है. इंडिया टुडे की RTI पर गृह मंत्रालय ने SOP से जुड़े सवालों को अस्पष्ट बता दिया. इससे भारत-बांग्लादेश समन्वय को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं.

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बंगाल में बड़ी संख्या में घुसपैठिए वापस बांग्लादेश जाने के लिए सीमा पर तैयार बैठे हैं. (File Photo: ITG)
बंगाल में बड़ी संख्या में घुसपैठिए वापस बांग्लादेश जाने के लिए सीमा पर तैयार बैठे हैं. (File Photo: ITG)

अवैध बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई तेज होती जा रही है. कई राज्यों में पहचान अभियान चल रहे हैं, होल्डिंग सेंटर बनाए जा रहे हैं और राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार बढ़ रही है. लेकिन इसी बीच एक बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है कि भारत से बांग्लादेशी नागरिकों के निर्वासन की प्रक्रिया आखिर क्या है.

इसी सवाल को लेकर इंडिया टुडे की ओर से दायर RTI आवेदन के जवाब में गृह मंत्रालय ने कहा कि 'मानक संचालन प्रक्रिया' (SOP) से जुड़ी मांगी गई जानकारी अस्पष्ट प्रकृति की है, इसलिए जानकारी उपलब्ध कराना संभव नहीं है. RTI आवेदन में गृह मंत्रालय से कई अहम सवाल पूछे गए थे. इसमें ज्यादातर सवाल बांग्लादेशी नागरिकों पर थे.

इसमें पूछा गया था कि पिछले 25 वर्षों में देश से निकाले गए बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या, निर्वासन की प्रक्रिया, हिरासत में रखे गए लोगों का आंकड़ा और क्या भारत-बांग्लादेश के बीच निर्वासन को लेकर कोई औपचारिक व्यवस्था मौजूद है. लेकिन गृहमंत्रालय ने बांग्लादेश के साथ किसी औपचारिक मैकेनिज्म पर जानकारी देने से इनकार कर दिया.

देश से निकाले गए लोगों के डेटा, हिरासत में रखे गए लोगों की संख्या और प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर गृह मंत्रालय ने जवाब दिया कि यह जानकारी ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन (BOI) से संबंधित है. इसलिए आवेदन BOI को ट्रांसफर कर दिया गया है. मंत्रालय ने यह भी कहा कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) 'कार्यालय ज्ञापन' के तहत संबंधित राज्य सरकारों से भी जानकारी हासिल की जा सकती है.

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हालांकि, यहां बड़ा सवाल यह है कि ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन खुद RTI Act के दायरे से बाहर है. केवल भ्रष्टाचार या मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मामलों में ही BOI से जानकारी मांगी जा सकती है. RTI में खास तौर पर पूछा गया था कि क्या बांग्लादेशी नागरिकों को देश से निकालने के लिए कोई SOP या दिशानिर्देश मौजूद हैं. क्या बांग्लादेश अपने देश से निकाले गए नागरिकों को स्वीकार करता है.

क्या इसके लिए दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक समझौता है. इन सवालों के जवाब में गृह मंत्रालय ने कहा, ''आपके द्वारा मांगी गई जानकारी अस्पष्ट प्रकृति की है, इसलिए जानकारी देना संभव नहीं है.'' गृहमंत्रालय के इस जवाब ने निर्वासन प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. मंत्रालय के 'Foreigners I' डिविजन ने RTI जवाब में कई बातें स्पष्ट कर दी है.

इसके मुताबिक, अवैध विदेशी नागरिकों और प्रवासियों की पहचान, उनकी आवाजाही पर रोक लगाने और उन्हें देश से निकालने की शक्तियां पहले ही राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन को सौंपी जा चुकी हैं. मंत्रालय के मुताबिक, आप्रवास और विदेशियों से संबंधित विधेयक, 2025 की धारा 7, 13 और 29(2) के तहत यह अधिकार दिए गए हैं.

ये मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल सरकार ने जिलों को निर्देश दिया है कि हिरासत में लिए गए अवैध विदेशियों के लिए होल्डिंग सेंटर बनाए जाएं. वहीं पिछले साल गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे 30 दिनों के भीतर बांग्लादेश और म्यांमार से आए अवैध प्रवासियों की पहचान और सत्यापन करें.

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ऐसे माहौल में निर्वासन की प्रक्रिया, SOP और भारत-बांग्लादेश समन्वय पर स्पष्ट नीति की मांग और तेज हो गई है. RTI के जवाब के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत में निर्वासन को लेकर कोई सार्वजनिक SOP मौजूद है. यदि है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा. इसके अलावा देश से निकाले गए लोगों को स्वीकार करने की प्रक्रिया को लेकर भी तस्वीर साफ नहीं है.

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