पूर्वी लद्दाख के देपसांग और डेमचोक इलाकों में भारतीय और चीनी सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है. लेकिन दोनों देश का अगला कदम क्या होगा इसको लेकर काफी चर्चा हो रही है. इसका जवाब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दिया है. उन्होंने सीमा पर भारत-चीन संबंधों को सुधारने के लिए तीन प्लान बताए हैं.
क्या बोले एस जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के संदर्भ में हमने कुछ प्रगति की है. आप जानते हैं कि हमारे संबंध कुछ कारणों से बहुत ही खराब थे. हमने (सैनिकों के) पीछे हटने की दिशा में कुछ प्रगति की है. एस जयशंकर ने कहा कि सैनिकों के पीछे हटने के बाद हम टकराव की स्थिति को और कम करने की कोशिश करेंगे. जयशंकर ने कहा कि सेनाओं के पीछे हटने और टकराव की स्थिति को कम करने के बाद तीसरा कदम सीमा प्रबंधन का होगा. हम चीन के साथ बॉर्डर के विवादों पर बातचीत करेंगे.
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हाल ही में भारत ने घोषणा की थी कि उसने पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर गश्त करने के लिए चीन के साथ समझौता कर लिया है, जो इस क्षेत्र में चार साल से चल रहे सैन्य गतिरोध को समाप्त करने में एक बड़ी सफलता है. मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए जयशंकर ने कहा था कि देपसांग और डेमचोक में गश्त और पीछे हटने पर सहमति बन गई है.
उन्होंने कहा था, "यह स्पष्ट है कि इसे लागू करने में समय लगेगा. यह पीछे हटने और गश्त करने का मुद्दा है जिसका मतलब था कि हमारी सेनाएँ एक-दूसरे के बहुत करीब आ गई थीं और अब वे अपने ठिकानों पर वापस चली गई हैं. हमें उम्मीद है कि 2020 की स्थिति बहाल हो जाएगी." हालांकि, बाद में विदेश मंत्री ने कहा कि एलएसी पर गश्त करने पर चीन के साथ सफल समझौते का मतलब यह नहीं है कि दोनों देशों के बीच मुद्दे सुलझ गए हैं.