
आदमपुर एयरबेस का पीएम नरेंद्र मोदी का दौरा और वहां पर S-400 के साथ उनकी तस्वीरें पाकिस्तान को दोहरी तकलीफ दे रही है. एक तो इस तस्वीर ने पाकिस्तान के झूठ का पर्दाफाश कर दिया है. ये झूठ है पाकिस्तान के उस दावे के ध्वस्त हो जाने का, जब पाकिस्तान ने कहा था कि उसने आदमपुर एयरबेस को जबर्दस्त नुकसान पहुंचाया है. पाकिस्तान ने यह भी दावा किया था कि उसने भारत के S-400 को ध्वस्त कर दिया है. लेकिन पीएम मोदी इस बेस पर अपनी तस्वीर वहीं खिंचवाई है. पाक आर्मी के लिए इससे ज्यादा अपमानजनक क्या हो सकता था.
पाकिस्तान के लिए दूसरी अपमानजनक बात है आदमपुर एयरबेस से जुड़ी वो यादें जो पाकिस्तान को सालती रहती हैं. 1965 की भारत-पाकिस्तान जंग में पाकिस्तान ने इस एयरबेस पर कब्जा करने की कोशिश की थी. उसने दुस्साहस और मिसएडवेंचर की एक मिसाल पेश करते हुए इस एयरबेस पर अपने कमाडों ही उतार दिए थे. लेकिन तब लोकल पंजाबियों और स्थानियों किसानों ने लाठी-डंडों और घरेलू हथियारों से पाकिस्तानी कमांडो को इतना पीटा कि ये ऑपरेशन पाकिस्तान की नाकामी का बेहतरीन उदहारण बन गया.
पाकिस्तान की सीमा से सिर्फ 100 किलोमीटर दूर आदमपुर एयर बेस पंजाब में भारतीय वायुसेना का दूसरा सबसे बड़ा बेस है. यह भारतीय वायुसेना की दिलेरी और जवांमर्दी की निशानी है. जालंधर और होशियारपुर के बीच स्थित इस एयरबेस के साथ बहादुरी का इतिहास जुड़ा है. यह एयरफोर्स के फॉर्वर्ड एयरबेस में से एक है. यहां से एयरफोर्स पाकिस्तान के किसी भी हिस्से में निशाना लगा सकती है. जालंधर और होशियारपुर के बीच स्थित यह पूरी तरह से ऑपरेशनल यह एयरबेस भारतीय वायुसेना के 47वें स्क्वाड्रन का घर है, जिसे ‘ब्लैक आर्चर’ के नाम से जाना जाता है.
1965 की जंग में दो और एयरबेस थे जहां से भारत की सेना ने तबाही मचा रखी थी. ये एयरबेस थे पठानकोट एयरबेस और हलवारा एयरफोर्स स्टेशन.
हलवारा, आदमपुर और पठानकोट एयरबेस ये तीन वायुसेना के ऐसे केंद्र थे जो पाकिस्तान की आंखों में खटक रहे थे. इन तीन स्टेशनों का लोकेशन और यहां की तैनाती इतनी सटीक है कि पाकिस्तान दर्जनों बार कोशिश करके भी यहां से आगे नहीं बढ़ा सका. ये तीनों एयरबेस उत्तर भारत को पाकिस्तानी वायु हमलों से बचाने के लिए दीवार की काम कर रहे थे. लिहाजा ये तीनों ही स्टेशन पाकिस्तान की आंखों में खटक रहे थे.
भारत के एयर स्पेस पर पाकिस्तान की बुरी नजर
1965 की भारत-पाकिस्तान जंग में जब भारत की वायुसेना कुछ देर के लिए कमजोर पड़ी तो पाकिस्तान की बुरी निगाह एक बार फिर से इन तीनों एयरस्टेशनों पर पड़ी. पाकिस्तान का नीच मंसूबा इन तीनों एयरस्टेशनों को हमेशा के लिए खत्म कर देने का था.
पाकिस्तान का नापाक मकसद इन हवाई अड्डों पर भारतीय वायुसेना के विमानों को नष्ट करना तथा इन हवाई अड्डों को पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तानी वायु सेना (पीएएफ) के विरुद्ध कोई भी आक्रामक या रक्षात्मक कार्य करने में असमर्थ बनाना था.

पाकिस्तान वायु सेना के एयर कमोडोर कैसर तुफैल (सेवानिवृत्त) द्वारा इस घटिया प्लानिंग ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी दी गई है. उनके अनुसार यह विचार जुलाई 1965 में PAF के तत्कालीन वायुसेनाध्यक्ष एयर मार्शल असगर खान के दिमाग में आया था. युद्ध शुरू होने से कुछ समय पहले असगर खान ने पद छोड़ दिया था, लेकिन उनके उत्तराधिकारी एयर मार्शल नूर खान ने योजना को जारी रखा.
चोरी-चोरी चुपके-चुपके ऑपरेशन
अगर आप करगिल ऑपरेशन से अवगत हैं तो आपको बता दें कि भारत से दुश्मनी रखने वाला पाकिस्तान पिछले 75-80 सालों में हमेशा से भारत को नुकसान पहुंचाने की योजनाएं बनाता रहा है. ये ऑपरेशन भी करगिल की तरह ही चोरी-चोरी चुपके-चुपके अंजाम दिया गया था.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार योजना बनाई गई कि तीन एयरबेस पर तीन टीमें एयरड्रॉप की जाएंगी. प्रत्येक टीम में तीन अधिकारी सहित 60 कमांडो होंगे. इन्हें तीन सी-130 विमानों द्वारा हवाई मार्ग से उतारा जाना था. तय किया गया कि प्रत्येक टीम के पास एक वायरलेस सेट होगा ताकि सी-130 को उसकी प्रगति के बारे में सूचित किया जा सके. हरएक कमांडो को दो दिन का राशन (प्रत्येक को पांच मीठी रोटियां) और 400 रुपये भारतीय मुद्रा के अलावा हथियार, विस्फोटक, ग्रेनेड आदि दिए गए.
आखिरकार 7 सितंबर 1965 को पाकिस्तान ने सुबह सुबह इन तीनों स्टेशनों पर हमला कर दिया. पठानकोट एयरबेस के बगल में 64 एसएसजी (स्पेशल सर्विसेज ग्रुप) पाकिस्तानी कमांडो सी-130 एयरक्राफ्ट से उतरे. आदमपुर एयरबेस के नजदीक 55 पाकिस्तानी कमांडो को एयरड्राप किया गया और हलवारा के पास 63 कमांडो उतरे.
अब शुरू होती है वो कहानी जिसने भारतीय नागरिकों और सेनाओं के शौर्य को सदा के लिए अमर कर दिया.
12 पाकिस्तानी कमांडोज को गोली मार दी गई
पाकिस्तानी कमांडो आदमपुर में एक गांव के बीचोबीच उतर गए. यहां कुछ स्थानीय लोगों की नजर इन कमांडो पर पड़ गई. फिर क्या स्थानीय लोग घर से लाठी और पारंपारिक हथियार लेकर निकल गए और पाकिस्तानी कमांडोज को दौड़ा दौड़ाकर पीटने लगे. कुछ पाकिस्तानी गन्ने के खेत में जाकर छिपे लेकिन यहां भी उनके लिए सुरक्षित स्थान नहीं था. स्थानीय लोग गन्ने के खेत में पहुंचकर इन्हें पीटा. इस बीच अलार्म बजने पर पंजाब पुलिस की टीमें मौके पर पहुंची और कमांडो को घेर लिया. यहां 42 कमांडो पकड़े गए. 12 को गोलीमार कर जहन्नुम पहुंचा दिया गया जबकि एक कमांडो भाग निकला.
गन्ने के खेत में दौड़ा-दौड़ाकर पाकिस्तानियों को पीटा
पाकिस्तान सेना के पठानकोट एयर बेस का जिक्र करें तो पठानकोट पर हमला करने वाला पाकिस्तानी जत्था हवाई अड्डे से कई किलोमीटर दूर उतरा और जब तक वे फिर से संगठित होकर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना शुरू करते, तब तक एयरबेस के आस-पास के खेतों में किसानों की हलचल बढ़ गई थी, इन लोगों ने पाकिस्तानी कमांडो के देखा शोर मचा दिया. यहां भी लोगों ने पाकिस्तानी कमांडोज को जमकर पीटा. 45 कमांडो बंदी बना लिए गए जबकि 4 कमांडो की मौत हो गई. कुछ कमांडो कांगड़ा की पहाड़ियों की ओर भाग गए और फिर वहां की से वे भागने में सफल रहे.
53 पाकिस्तानी कमांडोज पकड़े गए
हलवारा की कहानी भी इससे अलग नहीं थी. यहां भी पाकिस्तान के स्पेशल सर्विसेज ग्रुप के कमांडोज को एक गांव में एयर ड्राप किया गया. युद्ध का माहौल तो था ही, लोग सशंकित थे. ग्रामीणों ने तुरंत ही इन पाकिस्तानियों को पहचान लिया. फिर शुरू हुई इन कमांडोज की पिटाई. इन्हें स्थानीय लोगों और पुलिस ने जमकर पीटा. पंजाब पुलिस कर्मियों के साथ इनकी गोलीबारी भी हुई. इस दौरान 4 पाकिस्तानी कमांडो मारे गए. 53 पकड़े गए और 6 भागने में सफल रहे.
कुल 182 पाकिस्तानी सेना के एलीट कमांडोज के साथ शुरू हुआ पाकिस्तान का ये ऑपरेशन दक्षिण एशिया में स्पेशल सर्विसेज ग्रुप का पहला ऑपरेशन था और इसमें पाकिस्तान बुरी तरह से पीटा और फेल रहा. इस ऑपरेशन में पाकिस्तान के 140 कमांडो पकड़े गए, 20 मारे गए और 22 भाग गए.