इंडिया गठबंधन की प्रस्तावित बैठक से पहले शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता संजय राउत ने विपक्षी राजनीति और गठबंधन की स्थिति को लेकर कई अहम बातें कही हैं. उन्होंने उन अटकलों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा है कि इंडिया गठबंधन बिखर रहा है.
आजतक संवाददाता साहिल जोशी ने संजय राउत से खास बातचीत की है.
सवाल: 25 तारीख को इंडिया गठबंधन की बैठक हो रही है. क्या शिवसेना उसमें जाएगी? ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि इंडिया गठबंधन बिखर रहा है. जिस तरह डीएमके अब उससे बाहर निकल चुका है.
संजय राउत: बात ऐसी है कि विधानसभा चुनाव 4-5 राज्यों में हुए हैं. पश्चिम बंगाल, केरलम, असम और पुदुचेरी में. जो नतीजे आए हैं, केरलम को छोड़कर बाकी जगह बीजेपी जीत गई. कैसी जीती, भगवान को मालूम, श्रीराम को मालूम.
पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद जिस तरह तृणमूल कांग्रेस को तोड़ने की कोशिश हो रही है, या वह टूट गई है, उसे देखिए. चुनाव जीतने के बाद भी पार्टियां तोड़ी जा रही हैं. यह हवस है, यह नशा है. और यह नशा देश के लिए खतरा बन चुका है. असम में भी ऐसा ही हुआ. इन सभी मुद्दों पर चर्चा होना जरूरी है कि इंडिया ब्लॉक की आगे की रणनीति क्या होगी.
सवाल: दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी और डीएमके के बीच भी मतभेद की खबरें हैं. टीवीके अब गठबंधन में शामिल हो गई है. क्या आपको लगता है कि टीवीके को शामिल कर लेना चाहिए?
संजय राउत: मेरी जानकारी के मुताबिक तमिलनाडु की जनता ने सत्ता परिवर्तन के पक्ष में जनादेश दिया है. टीवीके को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था, वह सीमा पर थी. कांग्रेस ने समर्थन दिया और सरकार बन गई.
उससे पहले राहुल गांधी ने डीएमके सुप्रीमो एम.के. स्टालिन से बात की थी कि अगर बीजेपी और एआईएडीएमके को रोकना है तो इस सरकार को बनने देना होगा. कांग्रेस ने जनादेश के हिसाब से समर्थन किया.
यह भी पढ़ें: 'जहां कांग्रेस होगी, वहां हम नहीं जाएंगे...' DMK ने INDIA गठबंधन की बैठक में आने से किया इनकार
मेरी राय है कि डीएमके को थोड़ा संयम बरतना चाहिए था. लेकिन उन्होंने तुरंत लोकसभा स्पीकर को अलग सीट व्यवस्था आदि के लिए पत्र दे दिया. मुझे लगता है कि धीरे-धीरे डीएमके का गुस्सा भी शांत हो जाएगा.
लेकिन अब हमें एक नया मित्र मिला है - टीवीके. कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन तमिलनाडु में चल रहा है और उसका स्वागत किया जाना चाहिए.
सवाल: क्या इंडिया गठबंधन खत्म हो गया है? कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी कह रहे थे कि अगर टीएमसी के लोग पार्टी से नाराज हैं तो कांग्रेस उनके लिए विकल्प हो सकती है. क्या कांग्रेस भी डबल गेम खेल रही है? क्या इंडिया गठबंधन खत्म हो गया है?
संजय राउत: मैं तो यह कहूंगा कि लोकसभा चुनाव के बाद बार-बार कहा जा रहा है कि इंडिया गठबंधन हार रहा है और बिखर रहा है. लेकिन हम चुनाव नहीं हार रहे हैं.
भारतीय जनता पार्टी ने एक ऐसी व्यवस्था बना ली है कि वह पूरा चुनाव और पूरा सिस्टम हाईजैक कर लेती है और फिर चुनाव जीतती है. यह कोई साधारण जीत नहीं है. अगर पश्चिम बंगाल में बैलेट पेपर से चुनाव करा लीजिए, तब आपको पता चलेगा कि क्या हो रहा है.
सवाल: पार्टियां टूट रही हैं या तोड़ी जा रही हैं?
संजय राउत: पार्टियां टूट नहीं रही हैं, पार्टियां तोड़ी जा रही हैं. भारतीय जनता पार्टी देश को उस दिशा में ले जा रही है जहां “वन नेशन, वन इलेक्शन” के बाद “वन पार्टी” की स्थिति बन जाए.
उनकी सोच यह है कि इस देश में सिर्फ बीजेपी रहे, कोई क्षेत्रीय दल न रहे और कोई विपक्षी पार्टी न बचे. सिर्फ हम ही हम रहें.
सवाल: क्या कांग्रेस क्षेत्रीय दलों के कमजोर होने से खुश है? क्या आपको लगता है कि कांग्रेस भी खुश होती है जब क्षेत्रीय पार्टियां कमजोर होती हैं?
संजय राउत: नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय से क्षेत्रीय पार्टियां रही हैं. पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय से भी क्षेत्रीय दल राजनीति का हिस्सा रहे हैं.
लेकिन मेरा मानना है कि तृणमूल कांग्रेस हो, महाराष्ट्र में एनसीपी हो, तेलंगाना की पार्टियां हों, बिहार की हों या अन्य दल इनमें से कई दल मूल रूप से कांग्रेस के राजनीतिक परिवार से निकले हुए हैं. अगर ये सभी दल एक साथ कांग्रेस के साथ जुड़ जाएं और एक बड़ी कांग्रेस का निर्माण हो जाए, तो इस देश में एक मजबूत विपक्ष खड़ा हो सकता है.