देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को होने वाले चुनाव के लिए सबसे ज्यादा निगाहें महाराष्ट्र पर लगी हैं. महाराष्ट्र की 7 राज्यसभा सीट पर चुनाव है, जिसमें से छह सीटें आसानी से सत्ताधारी महायुति (एनडीए) जीत लेगी जबकि सातवीं सीट के लिए विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी के बीच दोस्ती का इम्तिहान होना. सवाल उठता है कि कांग्रेस, शरद पवार की एनसीपी और उद्वव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में कौन-कौन बड़ा दिल दिखाएगा?
महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव नतीजों ने कांग्रेस,शरद पवार और उद्धव ठाकरे की सियासी जमीन को तंग कर दिया है. विपक्ष के इन तीनों प्रमुख दलों में कोई भी एक दल अपने दम पर एक भी राज्यसभा सीट जीतने की हैसियत में नहीं है, लेकिन अगर तीनों मिलकर लड़ते हैं तो एक सीट जीत सकते हैं. ऐसे में महा विकास अघाड़ी में बातचीत और सियासी मोलभाव शुरू हो गया है.
एनसीपी (एसपी) अपने प्रमुख शरद पवार की उम्मीदवार पर जोर दे रही है तो शिवसेना (यूबीटी) महाविकास अघाड़ी में सबसे विधायक होने के आधार पर राज्यसभा सीट पर दावा कर रही है. ऐसे में कांग्रेस पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं, जिस पर सभी की निगाहें हैं?
महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव गणित
महाराष्ट्र में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. राज्य में फिलहाल कुल 284 विधायक हैं, जिसमें बीजेपी के पास 131, शिंदे की शिवसेना के पास 57 और अजित पवार की एनसीपी के पास 40 विधायक हैं. इस तरह एनडीए के 228 विधायक होते हैं, जिसके दम पर वह राज्य की 7 राज्यसभा सीटों में से 6 सीटें आसानी से जीत सकती है. बीजेपी को चार सीटें तो शिंदे और अजित पवार की पार्टी को 1-1 सीट मिल सकती हैं.
वहीं, शरद पवार की एनसीपी के 10, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के 20 और कांग्रेस के 16 विधायक हैं. इस तरह तीनों दल मिलकर अगर एक उम्मीदवार को जिता सकते हैं, लेकिन उन्हें 1 अतिरिक्त विधायक के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. वहीं अगर, एनडीए अपने 7वें उम्मीदवार को जिताना चाहता है तो उसे 31 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी. ऐसे में विपक्षी गठबंधन के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया है, लेकिन सवाल यही है कि क्या तीनों एक साथ आएंगे?
उद्धव ठाकरे की शिवसेना क्या चाहती है?
शिवसेना (यूटीबी) के नेता आदित्य ठाकरे ने राज्यसभा सीट पर दावा ठोक दिया है. उन्होंने कहा कि विधायकों की संख्या को देखते हुए,राज्यसभा की सीट पर शिवसेना का हक बनता है. 2020 में हमने एनसीपी को एक राज्यसभा सीट दी थी, जिसके चलते इस बार हमें मिलना चाहिए.
शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी का कार्यकाल खत्म हो रहा है, जिन्हें दोबारा से राज्यसभा भेजने के लिए आदित्य ठाकरे की मांग कर रहे हैं. शिवसेना (UBT) के कुछ नेताओं का मानना है कि उद्धव ठाकरे को राज्यसभा में जाने के लिए विचार करना चाहिए, क्योंकि एमएलसी के तौर पर उनका टर्म मई में खत्म होने वाला है.
हालांकि, शिवसेना की असल दिक्कत है कि शरद पवार का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है. शरद पवार राज्यसभा में अपनी वापसी के फिराक में हैं, लेकिन नंबर गेम में पिछड़ रहे हैं. शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने कहा कि पवार के राज्यसभा में लौटने के इरादे के संकेत पर गंभीरता से विचार करने की ज़रूरत है. ऐसे में अब शिवसेना (यूबीटी) कशकमश के फंसी हुई है
शरद पवार की राज्यसभा में वापसी की दावेदारी
शरद पवार का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है.एनसीपी (एसपी) शरद पवार को दोबारा से राज्यसभा भेजने की कवायद में है. ऐसे में शरद पवार की बेटी और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले ने बुधवार को कहा कि पार्टी और कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि पवार साहब राज्यसभा में जाएं. सुप्रिया सुले ने कहा कि हमारे नेता जयंत पाटिल शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और कांग्रेस लीडरशिप से बात करेंगे. अगर जरूरत पड़ी तो मैं भी दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व से बात करूंगी.
एनसीपी (एसपी) के नेताओं ने संकेत दिया कि शरद पवार को राज्यसभा भेजने के लिए पूरी कोशिश करेगी. इसके लिए सहयोगी दलों के साथ औपचारिक बातचीत करेगी.हालांकि, आदित्य ठाकरे के दावों ने महाविकास अघाडी को कशमकश में डाल दिया है, लेकिन शरद पवार की दावेदारी के बाद शिवसेना (यूबीटी) को सोचना पड़ सकता है. ऐसे में उद्धव ठाकरे और शरद पवार दोनों में से किसी एक को अपने कदम पीछे खींचने होंगे. .
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की सियासी मंशा
कांग्रेस राज्यसभा चुनाव में बहुत सावधानी के साथ कदम बढ़ा रही है और अभी अपने पत्ते नहीं खोलना चाहती है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा है कि महाविकास अघाड़ी गठबंधन के साथियों को मिलकर कोई फैसला लेने से पहले अपनी पॉलिटिकल स्थिति साफ करनी चाहिए.
कांग्रेस नेता NCP के दोनों गुटों के बीच संभावित मेल-मिलाप को लेकर चिंता में है. कांग्रेस को लगता है कि अगर NCP (SP) भविष्य में NCP के साथ फिर से जुड़ती है,तो कांग्रेस के सपोर्ट वाले राज्यसभा सांसद का पाला बदलना सियासी रूप से शर्मनाक साबित हो सकता है. इस संभावना ने पार्टी के वेट-एंड-वॉच अप्रोच में मदद की है.
माना जा रहा है कि कांग्रेस शरद पवार की उम्मीदवारी का समर्थन कर सकती है,लेकिन वह एक बड़े अरेंजमेंट के हिस्से के तौर पर MLC चुनावों में समझौता चाहती है. इस तरह राज्यसभा का चुनाव दूसरी खाली सीटों पर बातचीत से जुड़ा हुआ है, जिससे एक सीट एक बड़े राजनीतिक लेन-देन का हिस्सा बन जाती है. महाविकास अघाड़ी की मीटिंग के बाद ही फाइनल तस्वीर सामने आ सकेगी?