पुणे के हिंजवाड़ी से एक बड़े आईटी भर्ती घोटाले का खुलासा हुआ है. आरोप है कि हिंजवाड़ी फेज-2 स्थित थिंक टेक्नोलॉजी इंडिया नाम की कंपनी ने सैकड़ों इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स, फ्रेशर्स और इंटर्न्स को नौकरी, स्टाइपेंड और स्थायी रोजगार का सपना दिखाकर आर्थिक नुकसान पहुंचाया. मामले में कंपनी के सीईओ हर्षल ठाकरे को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है. जानकारी के अनुसार हजारों सपने लेकर पुणे पहुंचे युवाओं को कंपनी ने कैंपस प्लेसमेंट के जरिए नौकरी का ऑफर दिया था. पीड़ितों का आरोप है कि कंपनी ने उन्हें बेहतर करियर और रोजगार का भरोसा दिलाया, लेकिन बाद में कंपनी अचानक बंद हो गई. इसके बाद न तो कर्मचारियों को वेतन मिला और न ही कंपनी की ओर से कोई स्पष्ट जवाब दिया गया.
पुलिस जांच में गिरफ्तार सीईओ हर्षल ठाकरे ने बताया कि कंपनी एक साथ 12 अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम करने का दावा करती थी. प्रत्येक प्रोजेक्ट में करीब 50 कर्मचारियों की टीम दिखाई जाती थी. अब तक लगभग 80 पीड़ितों ने पुलिस को लिखित शिकायत दी है. इन्हीं शिकायतों के आधार पर हिंजवाड़ी पुलिस ने हर्षल ठाकरे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2) और 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि शिकायतें सामने आने के बाद आरोपी नासिक भाग गया था और उसने अपना मोबाइल फोन भी बंद कर दिया था.
लैपटॉप देने के नाम पर छात्रों से वसूले गए हजारों रुपये
पुलिस के मुताबिक मीडिया में मामला सामने आने के बाद आरोपी ने फोरम फॉर आईटी एम्प्लॉइज यानी FITE के अध्यक्ष पवनजीत माने को फोन किया और कथित तौर पर लेबर कोर्ट में घसीटने की धमकी दी. इसके बाद पवनजीत माने ने वह नंबर पुलिस को उपलब्ध कराया. पुलिस ने नंबर की लोकेशन ट्रेस कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी की एचआर सौम्या सिंह और मैनेजर ध्रुविल पारेख फिलहाल फरार हैं. दोनों के मोबाइल फोन बंद बताए जा रहे हैं. हर्षल ठाकरे ने पुलिस को बताया है कि दोनों पहले ही कंपनी से इस्तीफा दे चुके थे.
पुलिस के अनुसार कंपनी का राज्य के कई बड़े इंजीनियरिंग और आईटी कॉलेजों से टाई-अप होने का दावा किया जाता था. भर्ती के दौरान छात्रों को ऑफर लेटर दिए जाते थे. उन्हें दो महीने की ट्रेनिंग और उसके बाद छह महीने की इंटर्नशिप के दौरान 15 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड देने का वादा किया जाता था. साथ ही एक साल बाद स्थायी नौकरी देने का भरोसा भी दिया जाता था. मुख्य शिकायतकर्ता सौरव नायर का कहना है कि दिसंबर 2025 में उनका कैंपस प्लेसमेंट इसी कंपनी में हुआ था. दो महीने तक ऑनलाइन ट्रेनिंग दी गई, लेकिन बाद में कंपनी लगातार बहाने बनाती रही. अप्रैल तक उन्हें समझ आ गया कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है.
पुलिस जांच में सामने आए नए खुलासे
जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. इंटर्न्स को लैपटॉप देने के नाम पर प्रत्येक छात्र से 15 हजार रुपये जमा कराए गए थे. पुलिस के अनुसार ये लैपटॉप कंपनी के नहीं थे, बल्कि अलग-अलग वेंडर्स से लिए गए थे. हर्षल ठाकरे ने करीब पांच वेंडर्स से लगभग 350 लैपटॉप हासिल किए थे. एक वेंडर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए दावा किया है कि उसके करीब साढ़े आठ लाख रुपये फंस गए हैं. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है.