शिवसेना (यूबीटी) के सांसद ओमराजे निंबालकर ने खुद पर लगे आरोपों को खारिज कर दिया है. कहा जा रहा है कि उन्होंने अपने पिता पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में अनुकूल फैसला पाने के लिए राजनीतिक रुख बदला है. आजतक से हुई खास बातचीत में ओमराजे ने कहा कि वह अपने राजनीतिक भविष्य और मौजूदा स्थिति पर फैसला आने के बाद ही खुलकर बोलेंगे.
मेरा ध्यान अभी पिता के हत्याकांड पर आने वाले फैसले पर- ओमराजे
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए उस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके जरिए उनकी राजनीतिक स्थिति को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, तो उन्होंने सीधा जवाब देने से परहेज किया. ओमराजे ने कहा, “मुझे जो कहना है, वह मैं अपनी लोकसभा क्षेत्र धाराशिव में जाकर कहूंगा. फिलहाल मेरा पूरा ध्यान मेरे पिता पवनराजे निंबालकर हत्याकांड के फैसले पर है, जो कल विशेष सीबीआई अदालत में आने वाला है. इस मामले में पूर्व एनसीपी मंत्री पद्मसिंह पाटिल आरोपी हैं. मैं भी अदालत में मौजूद रहूंगा.”
यूबीटी नेताओं द्वारा लगाए जा रहे इस आरोप पर कि उन्हें सत्ता पक्ष से मामले में राहत का आश्वासन मिला है, ओमराजे ने कहा, “कुछ लोग कह रहे हैं कि मैं अनुकूल फैसले के लिए गया हूं, लेकिन यह पूरी तरह गलत है. मैं पिछले 20 साल से राजनीति में हूं और उतने ही समय से न्याय की लड़ाई लड़ रहा हूं. मामला अदालत में विचाराधीन है, ऐसे में कोई पहले से फैसला कैसे तय कर सकता है?”
'धाराशिव में दूंगा सभी सवालों के जवाब'
दिल्ली जाने के सवाल पर भी उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा, 'पिछले चार दिनों में क्या हुआ, मैं दिल्ली गया या नहीं गया, मेरा रुख क्या है और उसके पीछे क्या कारण हैं, इन सभी सवालों का जवाब मैं धाराशिव में एक खुली सभा में दूंगा. तब तक मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता.' हालांकि बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी नहीं कहा कि वह अब भी शिवसेना (यूबीटी) के साथ हैं. इससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं.
साल 2006 में हुई थी पवनराजे निंबालकर की हत्या
पवनराजे निंबालकर, ओमराजे के पिता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे. जून 2006 में नवी मुंबई के कलंबोली इलाके में अज्ञात हमलावरों ने उनकी और उनके ड्राइवर समद काजी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. पवनराजे कभी पद्मसिंह पाटिल के करीबी रिश्तेदार और सहयोगी थे, लेकिन बाद में दोनों के बीच राजनीतिक मतभेद बढ़ गए. पवनराजे ने कांग्रेस का दामन थाम लिया और 2004 के विधानसभा चुनाव में धाराशिव से पद्मसिंह पाटिल को कड़ी टक्कर दी. उस चुनाव में पद्मसिंह केवल 484 वोटों से जीत पाए थे.
हत्या के बाद ओमराजे को धाराशिव में व्यापक सहानुभूति मिली. 2009 में जब कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के कारण उन्हें राजनीतिक मंच की जरूरत थी, तब शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने उनका साथ दिया और विधानसभा चुनाव का टिकट दिया. उस चुनाव में ओमराजे ने पद्मसिंह पाटिल के बेटे और तत्कालीन राज्य मंत्री राणा जगजीतसिंह पाटिल को हराकर बड़ी राजनीतिक जीत दर्ज की थी.
अब, पिता के हत्याकांड के अहम फैसले और अपनी राजनीतिक स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच, ओमराजे निंबालकर की अगली घोषणा पर पूरे महाराष्ट्र की नजरें टिकी हुई हैं.