महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और एनसीपी नेता धनंजय मुंडे को राज्य लोकायुक्त ने बड़ी राहत दी है. सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया के लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को लोकायुक्त ने खारिज कर दिया है. इसमें खेती के सामान की खरीद में धांधली और 'लाभ के पद' पर होने जैसे आरोप शामिल थे.
ये मामला धनंजय मुंडे के कृषि मंत्री रहने के दौरान का है. कपास, सोयाबीन और तिलहन की उत्पादकता बढ़ाने की एक योजना के तहत नैनो फर्टिलाइजर, कॉटन बैग और बैटरी से चलने वाले स्प्रे पंप खरीदे गए थे. अंजलि दमानिया ने आरोप लगाया था कि इन सामानों की खरीद में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है.
लोकायुक्त से पहले बॉम्बे हाईकोर्ट भी इस मामले में धनंजय मुंडे के पक्ष में फैसला सुना चुका था. कोर्ट ने कहा था कि ये आरोप बिना किसी ठोस सबूत के लगाए गए हैं. हाईकोर्ट ने न सिर्फ याचिकाओं को खारिज किया था, बल्कि याचिकाकर्ताओं पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था. हालांकि, कोई अपील दायर नहीं की गई और लगाया गया जुर्माना अदा कर दिया गया. लोकायुक्त ने कहा कि वो हाईकोर्ट के इस फैसले का सम्मान करते हैं.
'लाभ के पद' का आरोप भी खारिज
मुंडे पर 'लाभ के पद' को लेकर भी शिकायत की गई थी. मुंडे के वकील शार्दुल सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए दलील दी कि ये शिकायत गलत जानकारी पर आधारित है. लोकायुक्त ने सभी संवैधानिक प्रावधानों की जांच के बाद इस आरोप को भी गलत पाया और मामले में कोई नया सबूत पेश नहीं किया गया है. ऐसे में मुंडे को क्लीन चिट दे दी गई.
दमानिया ने दी प्रतिक्रिया
लोकायुक्त ने ये भी कहा कि अगर याचिकाकर्ता हाईकोर्ट के फैसले से खुश नहीं थे, तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए था. दूसरी ओर, अंजलि दमानिया ने कहा कि ये मामला जनहित से जुड़ा है और वे आगे के कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही हैं. उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कही है.
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इससे पहले, पार्थ पवार को भी मुंधवा भूमि मामले में क्लीन चिट दी गई थी, जबकि सुनेत्रा पवार को 25,000 करोड़ रुपये के महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले से संबंधित आरोपों के संबंध में राहत मिली थी.