महाराष्ट्र के नवी मुंबई में 14 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है. पुलिस का कहना है कि एक महिला ने अपने अन्य तीन साथियों के साथ मिलकर करोड़ों की ठगी को अंजाम दिया है. इस मामले की शिकायत मिलने के बाद महिला व अन्य आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है. पुलिस टीम इस मामले की जांच में जुटी है.
पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने जनवरी से मई 2023 के बीच चिट फंड के माध्यम से अच्छे रिटर्न का वादा करके धोखाधड़ी की. जो पैसा आरोपियों ने लिया, उसे वापस नहीं किया. जब निवेशकों ने अपने पैसों की मांग की तो आरोपियों ने समय पर पैसा नहीं लौटाया. काफी समय तक आरोपी बहानेबाजी कर निवेशकों को घुमाते रहे.
मामले के संबंध में पुलिस ने बुधवार को कहा कि निवेशकों से कथित तौर पर 14.24 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में एक महिला समेत चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. निवेशकों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने उरण पुलिस थाने में इस कार्रवाई को अंजाम दिया. पुलिस महिला व उसके साथियों की तलाश कर रही है.
बीते दिनों मुंबई में पकड़ा गया था 12वीं पास ठग, एक दिन में कमाता था 10 करोड़
मुंबई पुलिस ने बीते दिनों ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया था, जो एक दिन में 5-10 करोड़ रुपये कमाता था. आरोपी केवल 12वीं तक पढ़ा था. उसने एक टीम बना रखी थी. इस टीम के सदस्य कई शहरों में फैले थे. टीम पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को अपना टारगेट बनाती थी. गलत मामलों में फंसाने की धमकी देकर उनसे ठगी की जाती थी. इस तरह से करोड़ों रुपयों का हर रोज ट्रांजेक्शन कराया करता था.
पुलिस ने पांच को किया था गिरफ्तार
पुलिस उपायुक्त (जोन -11) अजय कुमार बंसल ने बताया था कि इस मामले का मास्टरमाइंड 49 वर्षीय श्रीनिवास राव डाडी है, उसे बांगुर नगर पुलिस स्टेशन की टीम ने हैदराबाद के एक आलीशान होटल से हिरासत में लिया था. वह 12वीं कक्षा तक पढ़ा है, लेकिन टेक्नोलॉजी में माहिर है. श्रीनिवास के साथ-साथ उसके गिरोह के चार और सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया था. इनमें दो ठाणे से और दो कोलकाता से गिरफ्तार किए गए थे.
खुद को पुलिसकर्मी बताकर फोन करते थे ठग
गिरोह के सदस्य ठगी करने के लिए खुद को पुलिसकर्मी बताते थे. टीम लोगों को फोन करती थी, जिनमें ज्यादातर महिलाएं शामिल थीं. जिन्हें फोन किया जाता था, गिरोह जिस महिला या फिर पुरुष को फोन करता था, उससे बैंक खाते की डिटेल मंगाता था. ज्यादातर लोग फोन कॉल से डर जाते थे और अपने बैंक या फिर इनकम टैक्स की डिटेल गिरोह को देते थे. मुख्य जानकारी हासिल करने के बाद जालसाज पीड़ित के बैंक खाते से पैसे उड़ा लेते थे.
(एजेंसी)