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'FIR में जबरन धर्म परिवर्तन का जिक्र नहीं', TCS मामले में निदा खान के वकील का दावा

नासिक TCS BPO मामले में निदा खान के वकील ने दावा किया है कि FIR में जबरन धर्म परिवर्तन का जिक्र नहीं है. परिवार ने भी सभी आरोपों को फर्जी बताया है. वहीं दूसरी तरफ केस में कई गंभीर आरोप लगे हैं और अब तक आठ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, तभी से यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है.

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 FIR में जबरन धर्म परिवर्तन का जिक्र नहीं. (Photo: Screengrab)
FIR में जबरन धर्म परिवर्तन का जिक्र नहीं. (Photo: Screengrab)

महाराष्ट्र के नासिक स्थित TCS से जुड़े BPO यूनिट मामले ने नया मोड़ ले लिया है. इस केस में आरोपी निदा खान की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता बाबा सैय्यद ने कहा कि FIR में कहीं भी जबरन धर्म परिवर्तन का जिक्र नहीं है. बावजूद इसके निदा को मास्टरमाइंड के तौर पर पेश किया जा रहा है, जबकि उनकी भूमिका सिर्फ एक CR में ही बताई गई है.

वकील बाबा सैय्यद ने कहा कि निदा खान के खिलाफ सिर्फ धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप है. उन्होंने साफ किया कि निदा खान कंपनी में HR हेड नहीं थीं, बल्कि एक प्रोसेस एसोसिएट के तौर पर काम करती थीं. कंपनी द्वारा भेजे गए सस्पेंशन लेटर में भी यही पद दर्ज है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर निदा सामने आती हैं तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

निदा खान पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप

वहीं, इस मामले में निदा खान के परिवार ने भी सभी आरोपों को खारिज किया है. उनके पिता ने कहा कि यह सब फर्जी है और किसी अन्य मामले को दबाने के लिए उनकी बेटी को फंसाया जा रहा है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि निदा ने कभी किसी से धर्म परिवर्तन के लिए नहीं कहा और न ही किसी अन्य धर्म के देवी-देवताओं के बारे में कुछ गलत कहा. परिवार का कहना है कि वो सभी धर्मों का सम्मान करते हैं. 

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इसके अलावा परिवार ने बताया कि निदा खान फिलहाल भिवंडी में अपने ससुराल में हैं और वह गर्भवती हैं. आरोपों के कारण पूरा परिवार परेशान है. उनके माता-पिता और चाचा ने यह भी कहा कि निदा की शिकायतकर्ता से कभी बात तक नहीं हुई. उन्होंने इस पूरे मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया.

दूसरी तरफ यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है. आरोप है कि इस यूनिट में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन का एक बड़ा रैकेट चल रहा था. अब तक इस मामले में नौ FIR दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें एक पुरुष कर्मचारी की शिकायत भी शामिल है. शिकायतों में धार्मिक उत्पीड़न, जबरन नॉन-वेज खाने का दबाव, और विशेष धार्मिक प्रथाओं को अपनाने का आरोप लगाया गया है.

निदा के परिवार ने केस को बताया केस को बताया फर्जी

नासिक पुलिस ने उनके पति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. पति ने दावा किया है कि उन्हें निदा की गतिविधियों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. बता दें, पुलिस अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें सात पुरुष और एक महिला हैं. पुलिस के अनुसार कुछ आरोपी कंपनी में ऊंचे पदों पर थे और उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया. एक अधिकारी के मुताबिक निदा खान पर एक महिला कर्मचारी को शिकायत न करने के लिए हतोत्साहित करने का आरोप भी है. 

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इस बीच यूनिट के संचालन को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी रही. पहले कहा गया कि ऑफिस बंद कर दिया गया है, लेकिन बाद में जानकारी सामने आई कि करीब 60 कर्मचारी ऑफिस पहुंचे और काम जारी रहा. कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम या ऑफिस से काम करने की छूट दी गई है. सूत्रों का कहना है कि हाल के वर्षों में कंपनी में यौन उत्पीड़न की शिकायतों में बढ़ोतरी बेहतर सिस्टम और जागरूकता के कारण हुई है. POSH फ्रेमवर्क के तहत कर्मचारियों को शिकायत करने में अब अधिक सुविधा और भरोसा मिला है. 

एनएचआरसी ने पुलिस से पूरी रिपोर्ट मांगी

वहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने टीसीएस में धर्म परिवर्तन और यौन शोषण के गंभीर आरोपों को लेकर सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने पुलिस कमिश्नर, लेबर कमिश्नर, टीसीएस प्रबंधन और महाराष्ट्र के डीजीपी को नोटिस जारी करते हुए निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट और एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही आयोग ने कंपनी के कम्प्लायंस सिस्टम की समीक्षा करने और शिकायत में उठाए गए संभावित मानवाधिकार उल्लंघनों की गहन जांच करने को भी कहा है.

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इनपुट- प्रवीण ठाकरे
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