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32 करोड़ के लिए मर्डर प्लान... महाराष्ट्र के उद्योगपति की कहानी, कंपनी पर कब्जा करना चाहता था बिजनेस पार्टनर

ये कहानी महाराष्ट्र के वसई की है. यहां 32 करोड़ रुपये के लिए बिजनेस पार्टनर ने एक उद्योगपति की हत्या की साजिश रच डाली. आरोप है कि वह कंपनी पर भी कब्जा करना चाहता था. इसी प्लानिंग को लेकर जब उसने सुपारी देकर कंपनी के बाहर गोली चलवाई तो सनसनी फैल गई. वहीं पुलिस ने इस पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश करते हुए सात आरोपियों को पकड़ा है.

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कंपनी के बाहर चली थी गोली. (Photo: Screengrab)
कंपनी के बाहर चली थी गोली. (Photo: Screengrab)

कहते हैं, कारोबार भरोसे पर चलता है. लेकिन महाराष्ट्र के वसई में एक कारोबारी रिश्ते की कहानी ऐसी निकली, जहां भरोसे की जगह करोड़ों रुपये आ गए. आरोप है कि 32 करोड़ रुपये का हिसाब चुकाने से बचने के लिए एक उद्योगपति ने अपने ही बिजनेस पार्टनर की हत्या की साजिश रच डाली. लेकिन जिस प्लान को 'परफेक्ट' माना जा रहा था, वह एक मिसफायर के साथ बिखर गया और पुलिस पूरी कहानी तक पहुंच गई.

मामला महाराष्ट्र के वसई स्थित डायमंड इंडस्ट्रियल एस्टेट में मौजूद जीएसएम फॉइल्स लिमिटेड का है. 24 जुलाई को कंपनी के पार्टनर मोहनसिंह लक्ष्मणसिंह परमार रोज की तरह कंपनी के बाहर निकले ही थे कि बाइक पर आए दो हमलावरों ने उन पर फायरिंग कर दी.

पहली गोली मोहनसिंह परमार को लगी और वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े. लेकिन इसके बाद कहानी ने मोड़ ले लिया. पुलिस के मुताबिक, दूसरी गोली नहीं चली. इसके बाद हमलावर ने पिस्टल की बट से उन पर हमला किया और अपने साथी के साथ मौके से फरार हो गया.

Murder plot over 32 crore Maharashtra industrialist business partner conspiracy

घायल उद्योगपति को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी सर्जरी हुई. फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है. शुरुआत में यह मामला कारोबारी रंजिश का लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, एक चौंकाने वाला आरोप सामने आया.

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वालीव पुलिस के मुताबिक, इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड कोई बाहरी दुश्मन नहीं, बल्कि कंपनी का ही एक पार्टनर सागर गिरीश भानुशाली निकला. जांच में सामने आया कि शेयर बाजार में भारी नुकसान और कर्ज में डूबने के बाद उसने मोहनसिंह परमार से करीब 32 करोड़ रुपये लिए थे. पुलिस का आरोप है कि अगर मोहनसिंह परमार की हत्या हो जाती, तो इतनी बड़ी रकम लौटाने की जिम्मेदारी खत्म हो जाती और कंपनी पर उसका कंट्रोल भी मजबूत हो जाता.

इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच का सहारा लिया. सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच हुई, डिजिटल और फॉरेंसिक सबूत जुटाए गए और मुखबिरों से भी जानकारी ली गई. इन सुरागों ने पुलिस को महाराष्ट्र से सीधे उत्तर प्रदेश तक पहुंचा दिया.

वहां से पुलिस ने कथित मुख्य शूटर सुजीत देवेंद्रभाई पांडे, उसके साथी अनूप वीरेंद्र प्रजापति, हथियार सप्लायर मनोज ठठेरा समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. इस मामले में कथित साजिशकर्ता सागर गिरीश भानुशाली सहित अब तक कुल सात लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है. वैज्ञानिक, डिजिटल, आर्थिक और फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस हत्या की साजिश के तार किसी बड़े आर्थिक या संगठित आपराधिक नेटवर्क से जुड़े हैं.

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(रिपोर्ट: प्रवीण सीताराम नलावडे)
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