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मुंबई का बीच, रेत पर बिस्तर और नींद में लोग... रात होते ही समंदर किनारे बिछ जाती हैं सैकड़ों चादरें

रेत पर कतारों में बिछी चादरें, सिरहाने रखे बैग, मां की गोद में सोते बच्चे और समंदर की आवाज के बीच नींद तलाशते लोग... यह सीन खूबसूरत कम और बेचैन करने वाला ज्यादा है. सूरज ढलते ही मुंबई के वर्सोवा बीच का नजारा बदल जाता है. जहां दिन में लोग टहलते और सेल्फी लेते नजर आते हैं, वहीं रात में वही जगह सैकड़ों परिवारों का अस्थायी बेडरूम बन जाती है.

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मुंबई में वर्सोवा बीच पर दिखी शहर की सबसे कड़वी तस्वीर. (Photo: ITG/Ajaz Khan)
मुंबई में वर्सोवा बीच पर दिखी शहर की सबसे कड़वी तस्वीर. (Photo: ITG/Ajaz Khan)

रात के 11 बजे हैं. मुंबई का वर्सोवा बीच... सामने समंदर है, ठंडी हवा चल रही है. रेत पर सैकड़ों लोग लेटे हुए हैं. कोई चादर बिछा रहा है, कोई बच्चे को सुला रहा है, कोई तकिया ठीक कर रहा है. पहली नजर में यह किसी बीच फेस्टिवल या पिकनिक का नजारा लग सकता है. लेकिन असल कहानी कुछ और है.

ये लोग घूमने नहीं आए हैं. ये लोग अपने घर छोड़कर यहां सोने आए हैं. जी हां, मुंबई के वर्सोवा इलाके में इन दिनों हर रात सैकड़ों लोग समुद्र किनारे रात गुजार रहे हैं. वजह है ऐसी गर्मी और उमस, जिसने उनके घरों को रहने लायक नहीं छोड़ा. दरअसल, वर्सोवा के तटीय इलाकों में बड़ी संख्या में लोग टिन की छत वाली झुग्गियों में रहते हैं. दिनभर पड़ने वाली धूप टिन की छतों को इतना गर्म कर देती है कि रात में भी कमरे भट्टी की तरह तपते रहते हैं.

mumbai versova beach becomes night shelter for hundreds amid extreme heat

स्थानीय निवासी हरीश यादव कहते हैं कि घर के अंदर सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है. दीवारें और छत इतनी गर्म रहती हैं कि बच्चों और बुजुर्गों के साथ रात गुजारना किसी सजा जैसा महसूस होता है. ऊपर से अभी तक अच्छी बारिश भी नहीं हुई, जिससे गर्मी और बढ़ गई है.

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यही वजह है कि सूरज ढलते ही पूरा नजारा बदल जाता है. महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग चटाई, चादर और तकिए लेकर समुद्र किनारे पहुंचने लगते हैं. रेत पर अपना-अपना कोना ढूंढते हैं और खुले आसमान के नीचे सोने की तैयारी शुरू हो जाती है.

यहां AC नहीं है, कूलर नहीं है, लेकिन समंदर से आने वाली हवा है. वही हवा, जो इन लोगों के लिए रातभर राहत का एकमात्र जरिया बन जाती है. हालांकि यह राहत भी पूरी तरह सुकून भरी नहीं है.

mumbai versova beach becomes night shelter for hundreds amid extreme heat

खुले में सोने की वजह से मच्छरों, कीड़ों और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं बनी रहती हैं. लेकिन लोगों का कहना है कि तपते हुए कमरे में पूरी रात करवटें बदलने से बेहतर है कि समंदर किनारे कुछ घंटे चैन की नींद मिल जाए.

सुबह होते ही यह अस्थायी 'ओपन एयर बेडरूम' फिर गायब हो जाता है. लोग अपनी चादरें समेटते हैं और वापस उन्हीं घरों में लौट जाते हैं, जिनसे बचने के लिए रातभर बीच पर सोए थे.

वर्सोवा का यह सीन सिर्फ गर्मी की कहानी नहीं है. यह मुंबई की दो तस्वीरों की कहानी है. एक तरफ ऊंची-ऊंची इमारतें हैं, जहां एसी की ठंडी हवा में रात गुजरती है. दूसरी तरफ वे लोग हैं, जिनके लिए एक सामान्य नींद भी संघर्ष बन चुकी है. और शायद यही तस्वीर मायानगरी मुंबई की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक है.

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यह उस शहर की कहानी है, जहां एक तरफ अरबों रुपये के समुद्र किनारे बने अपार्टमेंट हैं, जिनकी खिड़कियों के पीछे एसी चल रहे हैं. और दूसरी तरफ उन्हीं इमारतों की छाया में रहने वाले लोग हैं, जिनके लिए रात की नींद भी एक लग्जरी बन चुकी है.

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