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भारी रिटर्न का लोभ देकर धोखाधड़ी, चीनी नागरिक के साथ डेटा की सौदेबाजी, नेपाली नागरिक सहित 2 गिरफ्तार

पुलिस ने कहा कि उत्तर प्रदेश के चंद्र शेखर और नेपाल के दिलीपकुमार चाय ने पिछले दो वर्षों में कई भारतीयों को धोखा देकर 4.50 करोड़ रुपये जमा किए.

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धोखाधड़ी के आरोप में नेताली नागरिक सहित दो गिरफ्तार
धोखाधड़ी के आरोप में नेताली नागरिक सहित दो गिरफ्तार

मुंबई (Mumbai) की साइबर पुलिस ने शनिवार को एक नेपाली व्यक्ति सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया, जिन पर बड़े पैमाने पर स्टॉक धोखाधड़ी करने के आरोप हैं. पुलिस ने उत्तर प्रदेश निवासी चंद्र शेखर और उसके नेपाली साथी दिलीपकुमार चाय को भारत-नेपाल सीमा से गिरफ्तार किया है. साइबर पुलिस ने चंद्र शेखर के अकाउंट से 4.5 करोड़ रुपये का मनी ट्रेल का पता लगाया है, जो कई भारतीयों को धोखा देने के बाद जमा किया गया था. दोनों आरोपी पिछले दो वर्षों से एक्टिव हैं और लोगों को निशाना बनाकर अपने अकाउंट्स में पैसे जमा कर रहे थे. 

भारी रिटर्न का वादा करके ठगी

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के मुताबिक इस धोखाधड़ी की वजह से अपना पैसा गंवाने वाले लोगों की कम से कम 72 शिकायतें हैं. पुलिस ने बताया कि ये उन्हीं संबंधित आंकड़ा है, जो शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे आए, जबकि कई ऐसे भी हैं जिन्होंने अभी तक कोई शिकायत नहीं की है. साइबर पुलिस ने कहा कि ऐसे कई बैंक हैं, जिनमें शेखर के अकाउंट्स थे और पैसा उनमें जमा किया जाता था. ये दोनों आरोपी नए कॉर्पोरेट खाते खोलते थे और कॉल करने वालों की एक अलग टीम उनके लिए काम करती थी. 

पुलिस के मुताबिक आरोपियों के काम करने का तरीका यह था कि वे लोगों को बेतरतीब ढंग से फोन करते थे और बिना सोचे-समझे पीड़ितों को भारी रिटर्न का वादा करके शेयरों में निवेश करने के लिए लुभाते थे. इसके बाद पीड़ितों को एक व्हाट्सएप ग्रुप (057) 'momentum stock camp' में जोड़ा गया, जहां उन्हें स्टॉक और शेयर ट्रेडिंग के बारे में जानकारी दी गई. 

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जालसाजों ने पीड़ितों के साथ एक लिंक भी शेयर किया और डमी शेयर पेश करते हुए उन्हें 'रिटेल होम' ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा. पुलिस ने बताया कि लोगों को धोखाधड़ी के बारे में तब पता चला, जब आरोपियों ने पैसे स्वीकार कर लिए और उसके बाद उनकी कॉल का जवाब नहीं दिया.

यह भी पढ़ें: साल 2011 में साइबर धोखाधड़ी के कारण बैंकों को हुआ घाटा

साइबर डिटेक्शन अधिकारी एपीआई अमोल वाघमारे ने कहा कि दिलीपकुमार चाय एक चीनी नागरिक के संपर्क में था और नए खोले गए भारतीय कॉर्पोरेट अकाउंट्स की डीटेल्स- लॉगिन आईडी, पासवर्ड, डेबिट कार्ड डीटेल्स, चेक बुक और सिम कार्ड उसके साथ शेयर किया गया था. इसके बाद चाय चीनी नागरिक को सारी जानकारी बेच देता था और वह प्रति पीड़ित लगभग 1 से 3 लाख रुपये कमाता था और उसमें से एक हिस्सा शेखर को दे देता था.

दोनों प्रमुख संदिग्धों को 16 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है और भारतीय दंड संहिता (IPC) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत धोखाधड़ी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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