scorecardresearch
 

महाराष्ट्र: खेत सूखे, बांध खाली... बीड में 45 दिन से बारिश नहीं, 3 लाख हेक्टेयर फसलों पर संकट

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में इस साल 35 से 45 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण सूखे जैसे हालात बन गए हैं. बीड जिले में करीब 3 लाख हेक्टेयर फसलें सूख रही हैं, जिसमें कपास और सोयाबीन प्रमुख हैं. बांधों का जलस्तर भी तेजी से घट रहा है, जिससे सिंचाई पर रोक लगाई गई है.

Advertisement
X
पानी की कमी से सूख रही फसलों को किसान खुद खेत से निकाल रहे हैं. (Photo-ITG)
पानी की कमी से सूख रही फसलों को किसान खुद खेत से निकाल रहे हैं. (Photo-ITG)

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में इस साल बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. करीब 14 साल बाद इलाके में सूखे जैसे हालात बन रहे हैं. मराठवाड़ा में 35 से 45 दिनों से बारिश नहीं हुई है. इसका सबसे ज्यादा असर बीड जिले में दिख रहा है. यहां करीब 3 लाख हेक्टेयर फसलें सूखने लगी हैं.

अगस्त का पूरा महीना लगभग सूखा बीता. सितंबर के पहले हफ्ते तक मराठवाड़ा में बारिश 34 फीसदी से ज्यादा कम हुई है. बीड में हालात और खराब हैं. जिले में औसत बारिश 49 फीसदी कम हुई है. अगस्त में सिर्फ 14 फीसदी बारिश हुई.

कपास और सोयाबीन की फसलें सूखी

बीड में करीब 7 लाख 43 हजार हेक्टेयर में खरीफ की बुआई हुई थी. इसमें कपास, सोयाबीन, मक्का, अरहर और मूंग जैसी फसलें शामिल हैं. करीब 3 लाख हेक्टेयर में खड़ी सोयाबीन और कपास की फसलें खराब हो रही हैं.

कई किसान अब फसल को खेत से निकाल रहे हैं. कुछ किसान ट्रैक्टर से फसल को रोटावेटर कर रहे हैं. कुछ किसान फसल को जानवरों के चारे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि बारिश नहीं हुई तो पूरी मेहनत और लागत बर्बाद हो जाएगी.

Advertisement

बारिश नहीं होने से बांधों का जलस्तर भी तेजी से घट रहा है. सीना कोलेगांव बांध में उपयोगी पानी शून्य फीसदी रह गया है. माजलगांव बांध में 26 फीसदी पानी बचा है. मांजरा बांध में सिर्फ 12 फीसदी पानी है.

हालात को देखते हुए प्रशासन ने जायकवाड़ी को छोड़कर दूसरे प्रमुख जल स्रोतों से सिंचाई पर रोक लगा दी है. पानी को सिर्फ पीने के लिए सुरक्षित रखा गया है. अवैध तरीके से पानी उठाने वाले पंप जब्त करने के आदेश भी दिए गए हैं.

बीड और आसपास के इलाकों में अब पीने के पानी का संकट भी बढ़ रहा है. 450 से ज्यादा गांवों में पानी पहुंचाने के लिए 88 से ज्यादा टैंकर चल रहे हैं. किसानों को फसल के साथ पशुओं के चारे और पानी की भी चिंता सताने लगी है.

किसान सभा ने सरकार से बीड में जल्द सूखा घोषित करने की मांग की है. किसान सभा के बीड जिला अध्यक्ष एडवोकेट अजय बुरांडे ने कहा कि सूखा घोषित करने के लिए जरूरी हालात बन चुके हैं. सरकार से किसानों को राहत देने की मांग की गई है.

बीड के एक किसान ने बताया कि पिछले साल बाढ़ में उसकी 70 फीसदी जमीन प्रभावित हुई थी. दो झीलें भी फट गई थीं. इस साल उसने कर्ज लेकर खेती में करीब डेढ़ लाख रुपये लगाए. लेकिन डेढ़ महीने से बारिश नहीं हुई. खाद और बीज पर पूरा खर्च हो चुका है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: कहीं बाढ़, कहीं सूखा... मॉनसून के आखिरी दौर में देश के 35% हिस्से में बारिश की भारी कमी

महिला किसान संगीता उबाले ने बताया कि उन्होंने पांच एकड़ में सोयाबीन बोई थी. खेती पर करीब दो लाख रुपये खर्च हुए. बारिश नहीं होने से फसल सूख रही है. अब वह फसल को जानवरों के चारे के लिए इस्तेमाल कर रही हैं. उन्होंने सरकार से प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की मदद की मांग की है.

13-14 सितंबर को बारिश की उम्मीद

इस बीच मौसम विभाग से किसानों के लिए राहत की उम्मीद जगी है. बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है. इसके असर से 13 और 14 सितंबर को मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है.

अब किसानों की नजर इस बारिश पर है. देखना होगा कि बारिश होती है या नहीं. अगर बारिश हुई तो सूखती फसलों को कुछ राहत मिल सकती है. लेकिन लंबे सूखे के कारण किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकारी मदद भी जरूरी होगी.
 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement