महाराष्ट्र के मुस्लिम बहुल नगर निगम मालेगांव में मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव से पहले गजब का राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. कांग्रेस और बीजेपी भले ही एक दूसरे के विरोधी हों, लेकिन मालेगांव में दोनों पार्टियों के पार्षदों ने आपस में हाथ मिलाकर एक नया मोर्चा बनाया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि ISLAM पार्टी को मेयर बनाने से रोकने की रणनीति है या फिर उप मेयर की कुर्सी पर कब्जा जमाने का मंसूबा है?
मालेगांव नगर निगम चुनाव में बीजेपी के दो और कांग्रेस के तीन पार्षद जीते हैं. अब बीजेपी और कांग्रेस के पार्षद मिलाकर 'भारत विकास अघाड़ी' नाम से एक नया गठबंधन बनाया है.
मालेगांव नगर निगम में कुल 84 सदस्य हैं, लेकिन किसी एक पार्टी के पास मेयर बनाने का नंबर गेम नहीं है. हालांकि, ISLAM पार्टी 35 पार्षदों के सहारे सबसे बड़ा दल बनकर उभरा है, लेकिन बीजेपी और कांग्रेस के पार्षद को अगर जोड़ देते हैं तो उनकी संख्या 5 हो जाती है. ऐसे में पांच पार्षदों के सहारे क्या सियासी गेम करना चाहती है बीजेपी और कांग्रेस?
मालेगांव में बीजेपी-कांग्रेस पार्षदों का गठबंधन
महाराष्ट्र में भले ही 12 फीसदी मुस्लिम आबादी हो, लेकिन मालेगांव में 78 फीसदी से ज्यादा मुसलमान हैं. आजादी के बाद से अभी तक हुए चुनावों में मुस्लिम वोटर मालेगांव में कांग्रेस का समर्थन करते रहे. मुस्लिम वोटरों का यह ट्रेंड 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भी दिखा, लेकिन इस बार के शहरी निकाय चुनाव में मालेगांव के मुसलमानों का मिजाज बदला हुआ नजर आया. यहां मुसलमानों की पहली पसंद ISLAM पार्टी बन और उसने सारा गेम ही बदल दिया.
मालेगांव नगर निगम में इंडियन सेक्युलर लार्जेस्ट असेंबली ऑफ महाराष्ट्र (ISLAM) पार्टी के सबसे ज्यादा 35 नगर सेवक जीतकर अपना मेयर बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है. ऐसे में ISLAM पार्टी को रोकने के लिए कांग्रेस के जीतकर आए 3 और बीजेपी के दो पार्षदों ने आपस में हाथ मिला लिया है. कांग्रेस और बीजेपी ने नया मोर्चा बनाया है, जिसकी कमान कांग्रेस पार्षद एजाज बेग को मिली है. एजाज बेग अब मेयर और उपमेयर के चुनाव में ISLAM पार्टी को कब्जा जमाने से रोकने के फिराक में है या बार्गेनिंग की कवायद, लेकिन पांच सदस्यों के दम पर ये सब कैसे कर पाएंगे?
मालेगांव नगर निगम का गणित क्या है?
मालेगांव नगर निगम में कुल 84 सीटें है, मेयर बनाने के लिए 43 नगर सेवकों के समर्थन की जरूरत होती है. इंडियन सेक्युलर लार्जेस्ट असेंबली ऑफ महाराष्ट्र (ISLAM) पार्टी के सबसे ज्यादा 35 पार्षद है तो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के 21 पार्षद जीते हैं.
वहीं, शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के 18 पार्षद हैं तो सपा के 5, कांग्रेस के 3, बीजेपी के 2 पार्षद जीतकर आए हैं. इस तरह मालेगांव नगर निगम में किसी भी दल के पास बहुमत का आंकड़ा नहीं है, लेकिन सबसे बड़ा दल होने के नाते ISLAM की नजर मेयर की कुर्सी पर है. इसके लिए ISLAM पार्टी सपा के साथ गठबंधन करने की प्लानिंग कर रखी है, लेकिन बीजेपी और कांग्रेस के पार्षदों के एक साथ आने के बाद क्या सियासी खेला होगा?
मेयर बनाने के फिराक में ISLAM पार्टी
मालेगांव का मेयर का पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है, जिससे इस बात पर सस्पेंस बढ़ गया है कि आखिरकार नगर निकाय की कमान कौन संभालेगा. ISLAM पार्टी के सबसे ज्यादा पार्षद होने के चलते मेयर सीट पर उसका दावा माना जा रहा है. इस्लाम पार्टी के प्रमुख और पूर्व विधायक आसिफ शेख पार्टी के उम्मीदवार पर अंतिम फैसला लेंगे, जिसमें उनकी भाभी नसरीन शेख को एक मज़बूत दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है.
नियमों के अनुसार, मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव करने के लिए आरक्षण अधिसूचना के आठ से 12 दिनों के भीतर निगम की एक विशेष बैठक बुलाई जानी चाहिए. बैठक के बाद मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव होता है, लेकिन अभी तक तस्वीर साफ नहीं है. मालेगांव के मेयर पद पर सस्पेंस गहराता जा रहा है. ऐसे में आने वाले दिन मालेगांव की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं.
बीजेपी-कांग्रेस पार्षद ने क्यों मिलाया हाथ
कांग्रेस के पार्षद एजाज बेग, जो बीजेपी के साथ बने नए मोर्चे की अगुवाई कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मालेगांव में बीजेपी और कांग्रेस ने आपसी मतभेद भुलाकर एक साथ काम करने का फैसला किया है. मालेगांव में किसी भी दल के पास बहुमत नहीं है, जिसके लिए हम मिलकर ऐसा मोर्चा बनाया है ताकि शहर के विकास के लिए काम कर सकें.
कांग्रेस और BJP गठबंधन के उभरने से इस बात की भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि इस्लाम पार्टी मेयर सीट के लिए समर्थन देकर खासकर डिप्टी मेयर के चुनाव में अप्रत्यक्ष समर्थन मिल सकता है. इस तरह बार्गेनिंग पावर बढ़ाने का सियासी गेम माना जा रहा है.
शिवसेना-AIMIM में क्या होगी दोस्ती
मालेगांव में शिंदे की शिवसेना के 18 पार्षद जीतकर आए हैं तो असदुदुद्दीन ओवैसी की पार्टी 21 नगर सेवक हैं. AIMIM नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने दावा किया है कि शिवसेना नेता और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मालेगांव सहित कुछ नगर निगमों में पार्टी का समर्थन मांगा था.
जलील ने कहा कि AIMIM ने स्थानीय स्तर पर यह साफ कर दिया था कि वह BJP या शिवसेना के साथ गठबंधन नहीं करेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी किसी भी हालत में मालेगांव में शिंदे गुट का समर्थन नहीं करेगी. ऐसे में देखना है कि मालेगांव में क्या सियासी गेम होता है?