महाराष्ट्र के 75 फीसदी हिस्से में सूखा घोषित होने और मुंबई में 10 फीसदी पानी की कटौती लागू होने के बीच बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सड़कों को धोने की योजना बनाई है. इसके लिए करीब 8 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. बीएमसी के इस फैसले को लेकर विपक्षी नेताओं ने पानी की उपलब्धता और उसके प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं.
मुंबई में सार्वजनिक सड़कों पर वायु प्रदूषण और धूल को कंट्रोल करने के लिए बीएमसी ने शहर की सड़कों को रोजाना धोने का फैसला किया है. योजना के तहत मुंबई के सात जोन में बारिश के दिनों को छोड़कर 150 दिनों यानी करीब पांच महीने के लिए टैंकर सेवाएं ली जाएंगी. सड़कों को धोने के लिए जेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके तहत 2 हजार, 5 हजार और 10 हजार लीटर क्षमता वाले टैंकर इस्तेमाल किए जाएंगे. इस काम के लिए 8 करोड़ 25 लाख 33 हजार 48 रुपये का ठेका किया गया है.
बुधवार को स्टैंडिंग कमेटी के सामने आएगा प्रस्ताव
सड़कों को धोने से जुड़ा प्रस्ताव बुधवार को बीएमसी की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में पेश किया जाना है. हालांकि, इससे पहले ही विपक्षी नेताओं ने इस खर्च को लेकर नगर निगम प्रशासन से सवाल पूछे हैं. विपक्ष ने सवाल उठाया है कि जब राज्य में पानी की कटौती के आदेश हैं और मुंबई में भी 10 फीसदी पानी की कटौती लागू है, तो सड़कों को रोजाना धोने के लिए इतनी बड़ी मात्रा में पानी कहां से आएगा.
स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन प्रभाकर शिंदे ने भी प्रशासन से पानी की व्यवस्था स्पष्ट करने को कहा है. उन्होंने कहा, "पहले पानी की योजना स्पष्ट की जाए, उसके बाद इस तरह का प्रस्ताव लाया जाए." एक तरफ पानी की उपलब्धता और आपूर्ति को लेकर चुनौती बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ सड़कों को धोने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने के प्रस्ताव ने बीएमसी की योजना को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.