गोयल और अग्रवाल परिवार ने इस रिश्ते को 'परफेक्ट मैच' माना था. कुंडली मिलाई गई, 27 गुण मिले, परिवार के ज्योतिषी ने इसे सफल और आदर्श विवाह बताया और फिर पूरे रीति-रिवाज के साथ सगाई भी हो गई. लेकिन कुछ ही महीनों बाद वही रिश्ता अब देश के सबसे चर्चित हत्या मामलों में बदल चुका है और घर-घर इसी की चर्चा हो रही है.
परिवार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जनवरी 2026 में केतन अग्रवाल और सिया गोयल का रिश्ता आगे बढ़ाने से पहले दोनों परिवारों ने पारंपरिक तरीके से कुंडली मिलवाई थी. इसके लिए परिवार के ज्योतिषी को बुलाया गया था. बताया गया कि दोनों की कुंडलियों में 36 में से 27 गुण मिले थे, जिसे विवाह के लिए अच्छा माना गया. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, केतन का 'देव गण' और सिया का 'मनुष्य गण' बताया गया था. परिवार के ज्योतिषी ने इसे अनुकूल संबंध बताते हुए कहा था कि यह विवाह सफल हो सकता है. इसी के बाद दोनों परिवारों ने रिश्ते को अंतिम रूप दिया.
रिश्ते की शुरुआत, फिर बदला माहौल
पुलिस जांच के अनुसार, फरवरी में पुणे के एक होटल में दोनों की सगाई हुई. शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था. दोनों परिवार शादी की तैयारियों में जुट गए और नवंबर 2026 में विवाह की योजना बनाई गई. इसी बीच पुलिस सूत्रों का दावा है कि सगाई के बाद करीब दो महीने तक सिया ने नए रिश्ते को अपनाने की कोशिश की. हालांकि बाद में चेतन चौधरी फिर से उसकी जिंदगी में आया और यहीं से परिस्थितियां बदलने लगीं. पुलिस का आरोप है कि इसी दौरानहत्या की साजिश बनी. हालांकि अभी इन सभी आरोपों की पुष्टि होना बाकी है.
सिया के भाई साहिल गोयल ने क्या बताया
सिया के भाई साहिल गोयल ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि उसे इस बात की जानकारी थी कि सिया और चेतन एक-दूसरे को जानते थे और दोस्त थे. हालांकि उसके अनुसार, सगाई के बाद सिया बार-बार यही कहती थी कि अब उसका चेतन से कोई संपर्क नहीं है. जांच के दौरान केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि उनके बेटे ने शादी तय होने के बाद कई बार सिया के व्यवहार को लेकर चिंता जताई थी. पुलिस की जांच के अनुसार, केतन ने परिवार से पूछा था कि क्या सिया के बारे में पूरी तरह जानकारी लेने के बाद ही रिश्ता तय किया गया है. उसने यह भी बताया था कि कई बार जब वह सिया को फोन करता था तो उसका फोन व्यस्त मिलता था. बातचीत के दौरान सिया अक्सर चेतन चौधरी का नाम भी लेती थी, जिससे उसके मन में संदेह पैदा हुआ. हालांकि परिवार ने उसे समझाया कि चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि दोनों परिवार एक-दूसरे को पहले से जानते हैं.
बाली ट्रिप रद्द होने के बाद बढ़ी चिंता
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि 6 जून को प्रस्तावित बाली प्री-वेडिंग ट्रिप रद्द होने के बाद केतन ने अपने पिता से शिकायत की थी कि सिया छोटी-छोटी बातों पर विवाद करने लगी है. परिवार ने उस समय इसे सामान्य व्यवहार मानते हुए केतन को समझाया कि सिया अभी कम उम्र की है और शादी से पहले ऐसे मतभेद हो सकते हैं. इसलिए उन्होंने रिश्ता आगे बढ़ाने की सलाह दी. पुलिस का दावा है कि 18 जून की घटना से चार दिन पहले यानी 14 जून को भी केतन और सिया लोहागढ़ किले गए थे. जांच एजेंसी के अनुसार, उस दिन भी कथित रूप से एक ऐसी घटना हुई जिसमें केतन खाई की ओर गिरते-गिरते बच गया. पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान इस पहलू की भी पड़ताल की जा रही है.
18 जून को क्या हुआ
18 जून को केतन अग्रवाल की लोहागढ़ किले से गिरने के बाद मौत हो गई. पुलिस का आरोप है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने मिलकर हत्या की साजिश रची और वारदात को अंजाम दिया. दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. फिलहाल मामला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है. पुलिस के अनुसार, केतन और सिया का रिश्ता दोनों परिवारों के एक जानकार के माध्यम से तय हुआ था. परिवारों के बीच बातचीत के बाद सगाई संपन्न हुई और शादी की तैयारियां शुरू हो गई थीं. लेकिन कुछ महीनों बाद घटनाक्रम पूरी तरह बदल गया.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम सिया गोयल का लाई डिटेक्टर (पॉलीग्राफ) टेस्ट कराने की तैयारी में है. इसके लिए अदालत से अनुमति मांगी जा सकती है. जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि सिया परीक्षण के लिए सहमत होती है, तो पूछताछ के दौरान कई ऐसे सवालों के जवाब मिल सकते हैं, जो अब तक रहस्य बने हुए हैं. हालांकि, कानून के अनुसार पॉलीग्राफ टेस्ट केवल अदालत की अनुमति और संबंधित व्यक्ति की सहमति से ही कराया जा सकता है और इसकी रिपोर्ट स्वयं में अदालत में अंतिम साक्ष्य नहीं मानी जाती.
सबसे बड़ा सवाल क्या पुलिस के पास पर्याप्त सबूत हैं
केतन अग्रवाल की मौत के बाद से पुलिस लगातार इस मामले की जांच कर रही है. लेकिन अब तक सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारी के अनुसार घटनास्थल का कोई प्रत्यक्षदर्शी सामने नहीं आया है. जिस जगह से केतन के खाई में गिरने की बात कही जा रही है, वहां कोई सीसीटीवी कैमरा भी नहीं था. यही वजह है कि अब जांच का पूरा आधार डिजिटल और परिस्थितिजन्य साक्ष्य बनते जा रहे हैं. अब तक की जांच में पुलिस जिन बिंदुओं पर काम कर रही है, उनमें शामिल हैं सिया गोयल और चेतन चौधरी से लंबी पूछताछ, दोनों के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), कथित तौर पर डिलीट किए गए मैसेज, लोकेशन डेटा, सीसीटीवी फुटेज, क्राइम सीन रीक्रिएशन के साथ परिवार और अन्य लोगों के बयान. जांच एजेंसियां इन सभी कड़ियों को जोड़कर घटनाक्रम की पूरी तस्वीर तैयार करने की कोशिश कर रही हैं.