4 मार्च को ओमान के पास समुद्र में एक बड़ा हादसा हुआ. एक तेल टैंकर पर ड्रोन बोट से हमला हुआ और इस हमले में 25 साल के भारतीय नाविक दिक्षित सोलंकी की मौत हो गई. इजरायल-अमेरिका का ईरान के साथ शुरू किए गए जंग की वजह से पश्चिम एशिया बीते एक महीने के अधिक समय से धधक रहा है.
लेकिन इस घटना के लगभग एक महीने बाद भी उनका शव घर नहीं पहुंच पाया है. जिसे लेकर परिवार की पीड़ा बढ़ गई है. परिवार सोलंकी के शव का इंतजार कर रहे हैं. इस मामले को लेकर दिक्षित के पिता अमृतलाल और बहन मिताली ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है. अमृतलाल और मिताली का कहना है कि दिक्षित के शव को सौंपने के प्रयास तेज किए जाएं और जल्द से जल्द सौंपा जाए.
कौन थे दिक्षित सोलंकी?
दिक्षित सोलंकी, 25 साल के, एक युवा नाविक थे. जो कि महाराष्ट्र के रहने वाले थे. वह अपने परिवार के सहारे थे और समुद्र में काम करके घर चलाते थे. इस हादसे में उनकी मौत हो गई, लेकिन परिवार को अभी तक उनका अंतिम दर्शन भी नसीब नहीं हुआ.
परिवार की परेशानी
दिक्षित के पिता और बहन लगातार अधिकारियों और कंपनी से संपर्क कर रहे हैं. उन्होंने कई ईमेल किए, जानकारी मांगी, लेकिन हर बार सिर्फ यही जवाब मिला कि “कोशिश जारी है.”
परिवार का कहना है कि उन्हें साफ जानकारी नहीं दी जा रही और सिर्फ एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाली जा रही है.
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मामला कोर्ट तक क्यों पहुंचा?
जब लंबे समय तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला, तो परिवार ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उनकी मांग है कि सरकार तुरंत उनके बेटे का शव भारत लाए ताकि अंतिम संस्कार किया जा सके.
उन्होंने यह भी कहा कि मौत के बाद भी इंसान को सम्मान मिलना चाहिए और परिवार को अंतिम संस्कार करने का अधिकार है.
अब आगे क्या?
इस मामले की सुनवाई 6 अप्रैल को होगी. अब सबकी नजर कोर्ट के फैसले पर है कि क्या परिवार को जल्द न्याय और उनके बेटे का शव मिल पाएगा.
इजरायल-अमेरिका का ईरान पर हमले का ताजा अपडेट
इजरायल-अमेरिका का ईरान पर हमले जारी हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक फिर से कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अब वह ईरान पर हमलों को तेज करेगा और उसके इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा. इन सब के बीच फ्रांस के लिए बड़ी राहत की खबर आई है. युद्ध शुरू के बाद से अब तक फ्रांस का एक भी जहाज होर्मुज से पार नहीं कर पाया था. लेकिन, शुक्रवार को फ्रांस का एक जहाज इस रास्ते से पार किया.