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पहले सिया, फिर चेतन और क्राइम स्पॉट... किले से जहां गिरा केतन, वहां तक पहुंचने में लगते हैं 25 मिनट

केतन विशाल अग्रवाल मर्डर केस में पुलिस दो बार लोहगढ़ किले पहुंची. पहली बार सिया गोयल के साथ, दूसरी बार चेतन चौधरी के साथ. दोनों बार क्राइम रिक्रिएशन हुआ. लेकिन जब आजतक की टीम उसी रास्ते पर चली, तो समझ आया कि रास्ता कितना जोखिमभरा और दुर्गम है... जहां तक पहुंचने में ही 20-25 मिनट लगते हैं. घना जंगल, फिसलन भरे पत्थर, खड़ी ढलान और सैकड़ों फीट गहरी खाई...

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क्राइम रिक्रिएशन के बाद वहीं पड़ी है डमी. (Photo: Screengrab)
क्राइम रिक्रिएशन के बाद वहीं पड़ी है डमी. (Photo: Screengrab)

पुणे के लोहगढ़ किले पर हुए केतन विशाल अग्रवाल हत्याकांड में पुलिस अब तक दो बार क्राइम रिक्रिएशन कर चुकी है. पहले मुख्य आरोपी सिया गोयल को घटनास्थल ले जाया गया, फिर चेतन चौधरी के साथ भी पूरी वारदात को दोहराया गया. लेकिन जब 'आजतक' की टीम उसी रास्ते पर चली, तो सामने आया कि जिस जगह केतन का शव मिला था, वहां तक पहुंचना किसी आसान ट्रैकिंग जैसा नहीं, बल्कि जान जोखिम में डालने जैसा है.

लोहगढ़ किले पर रोज सैकड़ों पर्यटक पहुंचते हैं. ऊपर तक का रास्ता अपेक्षाकृत आसान है. लेकिन केतन अग्रवाल का शव जिस जगह मिला, वहां पहुंचने के लिए मुख्य रास्ता छोड़कर घने जंगल की ओर उतरना पड़ता है. आजतक की टीम ने इसी रास्ते को पैदल तय किया. करीब 20 से 25 मिनट तक फिसलन भरे पत्थरों, झाड़ियों और खड़ी ढलानों से गुजरने के बाद टीम उस जगह तक पहुंच सकी, जहां पुलिस के मुताबिक केतन का शव मिला था और बाद में क्राइम रिक्रिएशन भी कराया गया.

यहां देखें Video...

यह रास्ता इतना दुर्गम है कि सामान्य व्यक्ति के लिए यहां उतरना भी जोखिम भरा साबित हो सकता है. जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी के साथ अलग-अलग समय पर घटनास्थल पर क्राइम रिक्रिएशन कराया.

दोनों बार केतन की लंबाई और वजन के बराबर डमी का इस्तेमाल किया गया. आरोपियों से पूरी घटना दोहराने को कहा गया, ताकि यह समझा जा सके कि कथित वारदात किस तरह हुई होगी और शव खाई तक कैसे पहुंचा. क्राइम रिक्रिएशन किसी भी गंभीर आपराधिक जांच का अहम हिस्सा माना जाता है. इससे जांच एजेंसी आरोपियों के बयानों और घटनास्थल की परिस्थितियों का मिलान करती है.

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First Siya then Chetan it takes 25 minutes to reach spot below fort where Ketan fell

घटनास्थल तक पहुंचने के दौरान सबसे बड़ा अहसास यही हुआ कि यह कोई सामान्य लोकेशन नहीं है. घना जंगल, संकरी पगडंडी, फिसलन भरी चट्टानें और नीचे सैकड़ों फीट गहरी खाई. कई जगह तो बैंलेंस बिगड़ने का मतलब सीधा खाई की ओर फिसलना हो सकता है.

यह भी पढ़ें: व्हाइट टी-शर्ट, फेस कवर और लोहागढ़ किला... सीढ़ियों से उतरती सिया गोयल का Exclusive वीडियो

जांच एजेंसियों के लिए ऐसे मामलों में यह समझना जरूरी होता है कि आरोपी किस रास्ते से गए, घटनास्थल तक पहुंचने में कितना समय लगा, रास्ते की भौगोलिक स्थिति क्या थी और कथित घटनाक्रम उपलब्ध परिस्थितियों से मेल खाता है या नहीं. इसी वजह से पुलिस ने आरोपियों के साथ मौके पर जाकर पूरी घटना को दोहराया. जब आजतक की टीम घटनास्थल तक पहुंची, तो यह साफ महसूस हुआ कि यह इलाका सामान्य आवाजाही वाला नहीं है.

First Siya then Chetan it takes 25 minutes to reach spot below fort where Ketan fell

लोहगढ़ किले का यह इलाका बताता है कि किसी दुर्गम स्थल पर हुई घटना की जांच कितनी चुनौतीपूर्ण हो सकती है. घटनास्थल तक पहुंचना, साक्ष्य जुटाना, आरोपियों के साथ क्राइम रिक्रिएशन करना और हर गतिविधि को रिकॉर्ड करना... ये सभी प्रक्रियाएं सामान्य जगह के क्राइम की तुलना में कहीं अधिक कठिन होती हैं.

केतन अग्रवाल हत्याकांड में पुलिस लगातार जांच आगे बढ़ा रही है. आरोपियों से पूछताछ, डिजिटल सबूत, फॉरेंसिक रिपोर्ट और क्राइम रिक्रिएशन... इन सभी को जांच का हिस्सा बनाया गया है. कई बार किसी केस में सबसे बड़ा गवाह कोई इंसान नहीं, बल्कि घटनास्थल होता है. लोहगढ़ की यह खाई भी कुछ ऐसी ही है. यहीं से पुलिस ने कहानी जोड़ने की कोशिश की. यहीं आरोपियों से पूरी घटना दोहरवाई गई. और यह समझने की कोशिश हुई कि आखिर उस दिन क्या हुआ होगा. फिलहाल, इस केस में पुलिस की जांच अभी जारी है.

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क्या है पूरी कहानी

पुलिस के मुताबिक, 18 जून को 26 साल के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल अपनी मंगेतर सिया गोयल के साथ लोहागढ़ किले पर घूमने पहुंचे थे. जांच में सामने आया कि सिया का कथित बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी भी पहले से वहां मौजूद था. शुरुआती तौर पर केतन की मौत को हादसा माना गया, लेकिन घटनास्थल से जुटाए गए सबूतों, तकनीकी जांच और पूछताछ के बाद पुलिस ने दावा किया कि यह एक प्लानिंग से की गई हत्या थी.

इसी आधार पर सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया गया. पुलिस का कहना है कि मामले की हर कड़ी को जोड़ने के लिए दोनों आरोपियों से अलग-अलग क्राइम रिक्रिएशन भी कराया गया. अब दोनों के मोबाइल, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), चैट, लोकेशन हिस्ट्री और दूसरे डिजिटल फुटप्रिंट की जांच की जा रही है. इसके साथ ही घटना से पहले और बाद की गतिविधियों, आपसी बातचीत और कथित साजिश की पूरी टाइमलाइन तैयार की जा रही है.

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