दाऊद इब्राहिम के करीबी माने जाने वाले और कथित ड्रग्स तस्कर सलीम इस्माइल डोला से जुड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क पर प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है. ईडी के मुंबई जोनल कार्यालय ने 2 और 3 जून 2026 को मुंबई, सूरत, अंकलेश्वर और राजकोट में एक साथ 21 ठिकानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई. ईडी के अनुसार यह जांच सलीम डोला और उसके सहयोगियों द्वारा संचालित एक अंतरराष्ट्रीय संगठित नारकोटिक्स तस्करी सिंडिकेट से जुड़ी हुई है. जांच एजेंसी का कहना है कि यह नेटवर्क ड्रग्स के उत्पादन से लेकर उसकी सप्लाई, तस्करी और उससे होने वाली कमाई को छिपाने तक के पूरे तंत्र में सक्रिय था.
छापेमारी के दौरान ईडी ने सिर्फ ड्रग्स नेटवर्क के संचालकों को ही नहीं, बल्कि पूरे सप्लाई चेन को निशाना बनाया. इसमें प्रीकर्सर केमिकल सप्लायर, केमिकल ट्रेडर, सिंथेटिक ड्रग मेफेड्रोन (एमडी) के निर्माता और वितरक, हवाला ऑपरेटर तथा ड्रग्स से अर्जित धन से खरीदी गई बेनामी संपत्तियों को संभालने वाले लोगों के ठिकाने भी शामिल थे. जांच एजेंसी के मुताबिक इस कार्रवाई का मकसद सिंडिकेट की अवैध सप्लाई चेन और मनी लॉन्ड्रिंग के पूरे नेटवर्क को कमजोर करना था. ईडी का मानना है कि इन महत्वपूर्ण कड़ियों पर कार्रवाई से सिंडिकेट की परिचालन क्षमता और आर्थिक ढांचे को बड़ा झटका लगेगा.
21 ठिकानों पर ED की ताबड़तोड़ छापेमारी
छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, विदेशी मुद्रा, सोने की ईंटें और बैंक खातों में जमा रकम को जब्त या फ्रीज किया गया है. इनकी कुल कीमत लगभग 1.33 करोड़ रुपये बताई गई है. इसके अलावा 2,200 अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा भी बरामद की गई है. ईडी को छापेमारी के दौरान भारत और दुबई में स्थित कई करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं. एजेंसी का मानना है कि इन संपत्तियों में निवेश ड्रग्स कारोबार से हासिल अवैध कमाई के जरिए किया गया था.
बरामद दस्तावेज अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेंगे. ईडी ने बताया कि इस मामले की जांच विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा मुंबई में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी. इन मामलों में सलीम डोला और अन्य लोगों पर मादक पदार्थों और मन:प्रभावी पदार्थों की अवैध तस्करी से जुड़े आरोप लगाए गए थे.
अब तक की जांच में सामने आया है कि यह एक अत्यधिक संगठित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क था. यह नेटवर्क प्रीकर्सर केमिकल की खरीद, गुप्त रूप से मेफेड्रोन (एमडी) का निर्माण, राज्यों के बीच ड्रग्स की ढुलाई और वितरण, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी तथा हवाला चैनलों के जरिए अवैध धन के लेनदेन में शामिल था.
जांच एजेंसियों के अनुसार अपराध से अर्जित धन को छिपाने के लिए उसे कई स्तरों पर घुमाया जाता था. इसके बाद सहयोगियों और अन्य व्यक्तियों के नाम पर चल और अचल संपत्तियां खरीदी जाती थीं. इसी कारण ईडी की कार्रवाई का केंद्र केवल ड्रग्स तस्करी नहीं बल्कि उससे जुड़े पूरे आर्थिक नेटवर्क को तोड़ना भी है.
मेफेड्रोन ड्रग्स के निर्माण और तस्करी से जुड़े नेटवर्क की जांच
फिलहाल ईडी इस मामले में आगे की जांच कर रही है. एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क का विस्तार कितना बड़ा था, इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा अवैध कमाई को किन-किन माध्यमों से भारत और विदेशों में निवेश किया गया. शुरुआती जांच में मिले दस्तावेज और जब्त की गई संपत्तियां इस मामले में आगे कई बड़े खुलासों का आधार बन सकती हैं.