बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2024 के पूर्व विधायक बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के आरोपी आकाशदीप कारज सिंह को जमानत दे दी है. जस्टिस डॉ. नीला गोखले की बेंच ने पंजाब के फाजिल्का निवासी आकाशदीप को राहत देते हुए निर्देश दिया कि वह हर दूसरे सोमवार को संबंधित पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगाए.
इसके अलावा, आरोपी को बिना ट्रायल कोर्ट की अनुमति के राज्य न छोड़ने और अपना पासपोर्ट जमा करने का भी आदेश दिया गया है. आकाशदीप इस मामले में जमानत पाने वाला पहला आरोपी है. उसे मुंबई क्राइम ब्रांच ने पंजाब की एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स के साथ मिलकर गिरफ्तार किया था.
जांचकर्ताओं का दावा था कि आकाशदीप शूटर्स और बिश्नोई गैंग के साजिशकर्ताओं के बीच समन्वय कर रहा था. हालांकि, बचाव पक्ष की दलीलों और सबूतों की कमी को देखते हुए अदालत ने उसे रिहा करने का फैसला किया.
सबूतों के अभाव में मिली जमानत...
आकाशदीप की तरफ से पेश वकील अभिषेक येंदे और शुभम काहीते ने कोर्ट में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ सिर्फ कॉल रिकॉर्ड्स ही एकमात्र सबूत हैं. ये कॉल रिकॉर्ड्स भी अक्टूबर 2024 में हुई हत्या से काफी समय पहले के हैं, जिससे हत्या की साजिश में उनकी सीधी संलिप्तता साबित नहीं होती. कोर्ट ने अभियोजन पक्ष से आकाशदीप की सटीक भूमिका और उससे जुड़े ठोस सबूत दिखाने को कहा था, जिन्हें देखने के बाद बेंच ने जमानत मंजूर कर ली.
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24वीं गिरफ्तारी और बिश्नोई गैंग का कनेक्शन
आकाशदीप सिंह इस मामले में होने वाली 24वीं गिरफ्तारी का हिस्सा था. पुलिस ने पूछताछ के आधार पर आरोप लगाया था कि वह लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्यों के संपर्क में था और साजिश का हिस्सा था. 12 अक्टूबर 2024 को बाबा सिद्दीकी की मुंबई के बांद्रा में उनके बेटे जीशान सिद्दीकी के दफ्तर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस हमले की जिम्मेदारी बाद में लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली थी.
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जमानत की सख्त शर्तें
जस्टिस नीला गोखले ने जमानत देते हुए कहा कि यह आदेश सिर्फ आकाशदीप के लिए है और इसका प्रभाव इस मामले के अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर नहीं पड़ेगा. रिहाई के लिए कोर्ट ने कड़ी शर्तें रखी हैं, जिसमें पुलिस स्टेशन में नियमित उपस्थिति और यात्रा प्रतिबंध शामिल हैं. अब तक इस चर्चित हत्याकांड में 27 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच एजेंसियां अन्य कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं.