शनिवार को सात राज्यों में लोकसभा-विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं. नोटबंदी के 11वें दिन भी देश में हालात जस के तस हैं. लोग कैश के लिए बैंकों में घंटों लाइन लगाए खड़े हैं या तो एक एटीएम से दूसरे एटीएम भटक रहे हैं. ऐसे में ये उपचुनाव केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी के नोटबंदी के अहम फैसले के बाद आम जनता के बीच पहली कड़ी चुनावी परीक्षा भी साबित होंगे. वोटिंग सुबह 7 बजे शुरू हुई है और शाम 5 बजे तक चलेगी.
इन राज्यों में हो रहे हैं उपचुनाव
- मध्य प्रदेश: शहडोल लोकसभा सीट और नेपानगर
- असम: लखीमपुर लोकसभा सीट और बैठलांगसो विधानसभा सीट.
-पुड्डुचेरी: नल्लीथोप्पे विधानसभा सीट.
- बंगाल: कूच बिहार और तमलुक लोकसभा सीट और मोंटेश्वर विधानसभा सीट.
- तमिलनाडु: तंजावुर, अरावक्कूरिची और तिरुपर्रानकुंदरम विधानसभा सीट.
-त्रिपुरा की दो विधानसभा सीटों बरजाला और खोवाई पर उपचुनाव हो रहे हैं.
-अरुणाचल प्रदेश की ह्यूलांग विधानसभा सीट पर दो उम्मीदवारों के बीच मुकावला हो रहा है.
भोपाल के शहडोल लोकसभा और नेपानगर विधानसभा के लिए उपचुनाव शनिवार को हो रहे हैं. शहडोल में 17 और नेपानगर में 4 उम्मीदवार मैदान में हैं. नतीजे 22 नवंबर को आएंगे. के एक नेता ने कहा कि दोनों सुरक्षित सीटों पर काबिज रही बीजेपी के लिए यह उपचुनाव अहम हैं. यदि इनमें से किसी एक सीट पर भी बीजेपी हारती है तो यह समझा जाएगा कि नोटबंदी का ये फैसला आम लोगों को नहीं भाया है.
में लखीमपुर लोकसभा क्षेत्र और बैठालांसो विधानसभा क्षेत्र में हो रहे उपचुनाव में आठ उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा. दोनों सीटों पर 8,21, 199 महिलाओं सहित 16,91,313 वोटर हैं. पहले लखीमपुर का प्रतिनिधित्व असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल करते थे. वह माजूली से मई में विधायक बने.
Madhya Pradesh: Voting underway for Shahdol lok sabha bypoll
— ANI (@ANI_news)
Madhya Pradesh: Voting underway for Nepanagar assembly bypoll
— ANI (@ANI_news)
West Bengal: People queue up to vote for Cooch Behar lok sabha bypoll
— ANI (@ANI_news)
पश्चिम बंगाल में दो लोकसभा सीटों और एक विधानसभा सीट के लिए हो रहे हैं. उपचुनाव कूच बिहार और तमलुक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों और मोंटेश्वर विधानसभा क्षेत्र में हैं. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस, बीजेपी, वाम मोर्चा और कांग्रेस ने इन तीनों सीटों पर अपने अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं. हालांकि, इससे पहले इस साल की शुरुआत में कांग्रेस और वाम मोर्चा ने एक साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन दोनों ने इस उपचुनाव में अलग-अलग लड़ने का फैसला किया है.