झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने गठबंधन धर्म के तहत कांग्रेस से बढ़ती खटास के बीच एक कदम पीछे खींचते हुए राज्यसभा चुनाव के लिए सिर्फ एक उम्मीदवार बैद्यनाथ राम, जो लातेहार से पूर्व विधायक रहे हैं, उनके नाम की घोषणा कर दी है. झामुमो के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने इसकी घोषणा की. उन्होंने कहा कि बैद्यनाथ राम पार्टी के मजबूत और समर्पित कार्यकर्ता हैं और आदिवासी तथा पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है.
यानी अब राज्यसभा की जिन दो सीटों पर चुनाव होने हैं, उन पर कांग्रेस और जेएमएम का एक-एक उम्मीदवार होगा. कांग्रेस ने पहले ही प्रणव झा को पार्टी का उम्मीदवार बनाया था, जिससे जेएमएम में नाराजगी थी.
आरोप था कि कांग्रेस ने जेएमएम को विश्वास में लिए बिना नाम की घोषणा कर दी थी. नाराज जेएमएम ने कहा था कि अब वह दो उम्मीदवार मैदान में उतारेगी. उसके इस रुख से कांग्रेस उम्मीदवार की राज्यसभा पहुंचने की संभावनाओं पर ताला लग सकता था. गठबंधन में कांग्रेस और जेएमएम के बीच तकरार भी बढ़ सकती थी.
सुप्रियो भट्टाचार्य ने बताया कि नामांकन 8 जून को होगा और खुद सीएम हेमंत सोरेन मौजूद रहेंगे. भट्टाचार्य ने महागठबंधन के अन्य दलों कांग्रेस और राजद से भी समर्थन की उम्मीद जताई.
उन्होंने कहा कि सीट बंटवारे को लेकर कुछ मतभेद थे, लेकिन अंतिम फैसला सभी को सूट करे, यह ध्यान रखकर और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है. वर्तमान अंकगणित के अनुसार किसी भी दल के पास अकेले इतने आंकड़े नहीं हैं कि वह राज्यसभा के लिए दो उम्मीदवारों को एक साथ चुनावी मैदान में उतार सके.
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इधर झारखंड से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार प्रणव झा ने शनिवार को नामांकन प्रक्रिया की शुरुआत करते हुए नामांकन पत्र खरीदा.

इस अवसर पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप, मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मंत्री दीपिका पांडे सिंह, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष सह मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी, रियाज अंसारी, सुल्तान अहमद तथा उज्ज्वल प्रकाश तिवारी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे.
विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं. इसमें जेएमएम के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और वाम दलों के 2 विधायक शामिल हैं. वहीं एनडीए के पास भाजपा के 21, आजसू के 1, जदयू के 1 और लोजपा के 1 विधायक हैं. इसके अलावा एक निर्दलीय विधायक भी हैं. राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 28 वोटों की आवश्यकता है. ऐसे में महागठबंधन की स्थिति दोनों सीटों पर मजबूत दिखाई दे रही है.