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J-K: कश्मीरी पंडितों के लिए लॉन्च होगी वेबसाइट, विस्थापितों को जमीन दिलाने की कोशिश

वेबसाइट के जरिए विस्थापित कश्मीरी पंडित अपनी अचल और सामुदायिक संपत्ति से संबंधित शिकायत दर्ज करा सकेंगे. यहां पर आवेदन करने के बाद एक यूनिक आईडी जेनरेट हो जाएगी.

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JK के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (फाइल-पीटीआई)
JK के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (फाइल-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कश्मीरी पंडितों को उनकी जमीन वापस दिलाई जाएगी
  • अचल-सामुदायिक संपत्ति से संबंधित शिकायत दर्ज होगी
  • आवेदन किए जाने के बाद एक यूनिक आईडी जेनरेट होगी

सरकार कश्मीरी पंडितों के लिए आज मंगलवार को एक वेबसाइट लॉन्च कर रही है. वेबसाइट लॉन्च करने के पीछे मकसद यही है कि विस्थापित कश्मीरी पंडितों को उनकी जमीन वापस दिलाई जा सके. 

वेबसाइट के जरिए विस्थापित कश्मीरी पंडित अपनी अचल और सामुदायिक संपत्ति से संबंधित शिकायत दर्ज करा सकेंगे. यहां पर आवेदन करने के बाद एक यूनिक आईडी जेनरेट हो जाएगी. 

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आवेदन होने के बाद 15 दिन के अंदर ही उनकी जमीन को आइडेंटिफाई करना होगा. फिर पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी ताकि उनका मालिकाना हक मिल सके.

90 के दशक में शुरू हुआ था पलायन 

वर्ष 1989-1990 में जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की शुरुआत के साथ, बड़ी संख्या में लोगों को अपने पैतृक निवास स्थान, विशेषकर कश्मीर से पलायन करना पड़ा. कश्मीरी हिंदुओं के साथ-साथ कई सिख और मुस्लिम परिवारों का भी बड़े पैमाने पर पलायन हुआ.

उथल-पुथल के दौरान करीब 60 हजार परिवार घाटी से चले गए, जिनमें से करीब 44 हजार प्रवासी परिवार राहत संगठन (एम) जम्मू-कश्मीर में पंजीकृत हैं, जबकि बाकी परिवारों ने अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में स्थानांतरित होने का विकल्प चुना. इस दौरान असहाय प्रवासियों को अपनी अचल और चल संपत्ति को पीछे छोड़ना पड़ा.

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मजबूर परिस्थितियों में, इन प्रवासियों की अचल संपत्तियों पर या तो अतिक्रमण कर लिया गया या उन्हें अपनी संपत्ति को औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर किया गया.

इस मुद्दे को हल करने के लिए, 2 जून 1997 को "जम्मू और कश्मीर प्रवासी अचल संपत्ति (संरक्षण, संरक्षण और संकट बिक्री पर संयम) अधिनियम, 1997" नामक एक अधिनियम अधिनियमित किया गया था. इस अधिनियम ने प्रवासियों की अचल संपत्ति की संकटकालीन बिक्री पर संरक्षण, सुरक्षा और संयम प्रदान किया.

नामकरण को लेकर उच्चस्तरीय कमेटी गठित 

वहीं, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने मंगलवार को स्कूलों, कॉलेजों और सड़कों का नामकरण शहीदों और प्रतिष्ठित हस्तियों के नाम पर करने के लिए सरकार को सिफारिश करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया. पैनल की अध्यक्षता प्रशासनिक सचिव गृह करेंगे और इसमें जम्मू-कश्मीर प्रशासन के वरिष्ठ नौकरशाह शामिल होंगे.

 

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