मैदानी इलाकों की गर्मी से बचने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहाड़ी इलाकों की ओर उमड़ रहे है. जिससे सप्ताहांत में हिमाचल प्रदेश के कई मुख्य रास्तों पर घंटों तक ट्रैफिक जाम रहा. इसके चलते कुछ लोगों को अपनी यात्रा की योजना रद्द करके वापस लौटना पड़ा. एक एजेंसी के मुताबिक रविवार को लगभग 22 किलोमीटर लंबे खज्जीयार-डलहौजी रास्ते पर ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई और लकरमंडी रूट पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं. सैकड़ों पर्यटक घंटों तक जाम में फंसे रहे.
लकरमंडी, चंबा जिले में एक ऊंचे पहाड़ी दर्रे और मुख्य जंक्शन (चौराहे) पर स्थित है. खूबसूरत इलाकों से गुजरने वाला यह रास्ता डलहौजी से खज्जीयार तक जाता है. जिसे "भारत का मिनी-स्विट्जरलैंड" कहा जाता है. सामान्य ट्रैफिक में इस सफर को पूरा करने में लगभग एक घंटा लगता है. जाम में फंसे लोगों ने प्रशासन से सवाल किया कि जब वे पर्यटकों से कई तरह की फीस वसूलते हैं, तो बदले में ट्रैफिक का सही प्रबंधन क्यों नहीं कर पाते.
जाम के चलते पर्यटकों ने जताई नाराजगी
बिहार और बनारस से आए नाराज पर्यटकों ने कहा कि वे चार घंटे तक जाम में फंसे रहे, अधिकारी कहीं नजर नहीं आए और हर टूरिस्ट सीजन में भारी भीड़ आने के बावजूद "ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए कोई ठोस योजना" नहीं दिखती. बिहार की एक पर्यटक वसुंधरा ने कहा, "हमने इस यात्रा पर बहुत पैसा खर्च किया है, लेकिन यहां न तो टॉयलेट हैं और न ही पानी की सुविधा है. अब ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए पुलिस तैनात की गई है."
स्थानीय लोगों ने बताया कि टूरिस्ट सीजन के दौरान डलहौजी-खज्जीयार रूट पर गाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ती है, लेकिन पार्किंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट की सुविधाएं उस अनुपात में नहीं बढ़ाई गई हैं. उन्होंने कहा कि यही वजह है कि हर सीजन में लंबे समय तक ट्रैफिक जाम लगना आम बात हो गई है. पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अपील की कि वे गाड़ियों की आवाजाही सुचारू रूप से चलाने के लिए लंबे समय तक चलने वाले समाधान निकालें.
कांगड़ा जिले में धर्मशाला से अपर धर्मशाला (मैकलियोडगंज) तक का खूबसूरत सफर, जो कभी पहाड़ियों के बीच 15 मिनट की सुखद ड्राइव हुआ करता था, वह भी सप्ताहांत में जाम से जूझता रहा. ट्रैफिक जाम की बिगड़ती स्थिति ने इमरजेंसी सेवाओं के लिए चिंताजनक हालात पैदा कर दिए हैं. गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों को ले जाने वाली एम्बुलेंस अक्सर भारी ट्रैफ़िक में फंस जाती हैं, जबकि सरकारी अधिकारी, स्कूल बसें या गाड़ियां और रोज़ाना सफ़र करने वाले लोगों को भी काफ़ी देरी का सामना करना पड़ता है.
भीड़ के चलते मैकलूटगंज नहीं जा रहे सैलानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि जाम वाली सड़कों पर गाड़ी चलाने वालों में झुंझलाहट के कारण अक्सर तीखी बहस और कभी-कभी हाथापाई तक हो जाती है. मैकलियोड गंज की एक दुकानदार निलोफ़र ने कहा, "जब तक अपर धर्मशाला में आने वाली गाड़ियों की संख्या को नियंत्रित नहीं किया जाता, तब तक हालात और बिगड़ेंगे. भीड़-भाड़ की वजह से सैलानी इस इलाके में आने से बच रहे हैं और स्थानीय कारोबार पर बुरा असर पड़ रहा है."
इसी तरह स्थानीय ट्रांसपोर्टर अभय देव ने कहा, "अब कई सैलानी मैकलियोड गंज की यात्रा बुक करने से हिचकिचाते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि उन्हें ट्रैफ़िक में घंटों फंसे रहना पड़ सकता है. इसका सीधा असर हमारी रोज़ी-रोटी पर पड़ रहा है." धर्मशाला और मैकलियोड गंज हर साल हज़ारों देसी और विदेशी सैलानियों को अपनी ओर खींचते हैं. इनमें तीर्थयात्री, आध्यात्मिक खोज करने वाले, ट्रेकर्स और ऐसे सैलानी शामिल होते हैं, जो तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा की मौजूदगी और धौलाधार पहाड़ों की ख़ूबसूरती से आकर्षित होकर यहां आते हैं.